गुरु नानक देव का 550वां प्रकाश पर्व पर 1100 भारतीय सिख पाकिस्तान पहुंचे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 1, 2019   09:48
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गुरु नानक देव का 550वां प्रकाश पर्व पर 1100 भारतीय सिख पाकिस्तान पहुंचे

उन्होंने कहा, ‘‘ननकाना साहिब में बाबा गुरू नानक के 550वें प्रकाश पर्व समारोह में शामिल होने के लिए 1,100 सिखों का पहला जत्था वाघा सीमा से यहां पहुंचा।’’ हाशमी ने बताया कि सिख अपने साथ ‘‘स्वर्ण पालकी’’ लेकर आये है।

लाहौर। गुरू नानक देव के 550वें प्रकाश पर्व के लिए बृहस्पतिवार को भारत से 1,100 सिख श्रद्धालुओं का पहला जत्था यहां पहुंचा। ‘इवेक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड’ (ईटीपीबी) के प्रवक्ता आमिर हाशमी ने ‘पीटीआई’ को बताया कि ये सिख नौ नवंबर को करतारपुर गलियारे के ऐतिहासिक उद्घाटन का हिस्सा भी बनेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ननकाना साहिब में बाबा गुरू नानक के 550वें प्रकाश पर्व समारोह में शामिल होने के लिए 1,100 सिखों का पहला जत्था वाघा सीमा से यहां पहुंचा।’’ हाशमी ने बताया कि सिख अपने साथ ‘‘स्वर्ण पालकी’’ लेकर आये है।

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वाघा सीमा पर पंजाब के गवर्नर चौधरी सरवार, ईटीपीबी के अध्यक्ष आमेर अहमद और पाकिस्तान गुरूद्वारा सिख प्रबंधक समिति के अध्यक्ष सतवंत सिंह ने यहां ‘नगर कीर्तन’ (जुलूस) की अगवानी की। ईटीपीबी ने कहा कि ‘स्वर्ण पालकी’ के लिए संघीय राजस्व बोर्ड (एफबीआर) से कर में विशेष छूट मांगी गई है। ईटीपीबी ने कहा कि खानपान, चिकित्सा शिविर और परिवहन सहित तीर्थयात्रियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 12 नवम्बर को गुरू नानक के 550वें प्रकाश पर्व से पहले करतारपुर गलियारे का उद्घाटन करेंगे।

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पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे?

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 19, 2021   19:59
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पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे?

अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा निर्धारित की गई है। ये समयसीमा 20 जनवरी को खत्म होती है। अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत इस तारीख का जिक्र किया गया है। इससे पहले शपथ ग्रहण पांच मार्च को होता था।

अमेरिका में नए राष्ट्रपति आधिकारिक रूप से 20 जनवरी को शपथ ग्रहण करते हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह वॉशिंग्टन डीसी की कैपिटल बिल्डिंग की सीढ़ियों पर होता है। कल यानी 20 जनवरी को जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे साथ ही कमला हैरिस भी उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। 

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क्यों 20 जनवरी को ही होता है शपथ

अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा निर्धारित की गई है। ये समयसीमा 20 जनवरी को खत्म होती है। अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत इस तारीख का जिक्र किया गया है। इससे पहले शपथ ग्रहण पांच मार्च को होता था। जिसे बाद में 20 जनवरी को शपथ लेने की रवायत चल पड़ी। पहली बार 1937 में अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने दूसरी बार इस पद पर काबिज होने पर इस तारीख को शपथ ली थी। नियम के अनुसार अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होना तय है वहीं 20 जनवरी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को शपथ दिलवाई जाती है। 

पहले 5 मार्च को होता था शपथ ग्रहण 

1937 से पहले अमेरिका में 5 मार्च को शपथ ग्रहण होता था। जार्ज वाॅशिंगटन ने फेडरल हाॅल की बाॅलकनी में 30 अप्रैल 1789 को शपथ लीथी। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर उन्होंने 4 मार्च 1793 को शपथ लिया था। जेम्स मोनरो ने राष्ट्रपति बनने पर सुप्रीम कोर्ट के जजों से विचार करने के बाद 5 मार्च 1821 को अपना शपथ ग्रहण का कार्यक्रम रखा। इसके बाद अमेरिकी संविधान में 20वां संशोधन हुआ और राष्ट्रपति के शपथ लेने की तारीख 20 जनवरी हो गई। 







थाईलैंड के राजा का अपमान करना इस महिला को पड़ा भारी, हुई 43 साल कैद की सजा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 19, 2021   18:15
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थाईलैंड के राजा का अपमान करना इस महिला को पड़ा भारी, हुई 43 साल कैद की सजा

थाईलैंड के राजा का अपमान करने की दोषी महिला को रिकॉर्ड 43 साल कैद की सजा सुनाई गई है।अदालत की यह सजा ऐसे समय आई है जब प्रदर्शन चल रहे हैं और राजशाही की अभूतपूर्व तरीके से सार्वजनिक स्तर पर आलोचना हो रही है।

बैंकॉक। थाईलैंड की अदालत ने एक पूर्व नौकरशाह को यहां की राजशाही का अपमान करने या मानहानि के खिलाफ बने सख्त कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराते हुए मंगलवार को रिकॉर्ड 43 साल कैद की सजा सुनाई है। मानवाधिकार पर थाई वकीलों के समूह ने बताया कि बैंकॉक की फौजदारी अदालत ने महिला को फेसबुक और यूट्यूब पर राजशाही की आलोचना करने वाली टिप्पणी के साथ् ऑडियो क्लिप पोस्ट कर देश के महामहिम सम्मान कानून की 29 धाराओं का उल्लंघन करने का दोषी करार दिया।

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अदालत की यह सजा ऐसे समय आई है जब प्रदर्शन चल रहे हैं और राजशाही की अभूतपूर्व तरीके से सार्वजनिक स्तर पर आलोचना हो रही है। इस फैसले का अधिकार समूहों ने निंदा की है। ह्यूमन राइट्स वॉच में वरिष्ठ शोधकर्ता सुनई फासुक ने कहा, ‘‘ अदालत का आज का फैसला स्तब्ध करने वाला है और यह बहुत ही घातक संकेत है कि राजशाही की आलोचना बर्दाश्त ही नहीं की जाएगी बल्कि सख्त सजा भी दी जाएगी।’’ उल्लेखनीय है कि थाईलैंड में राजशाही का अपमान करने के खिलाफ कानून है जिसे आमतौर पर धारा-112 कहा जाता है और इसमें प्रत्येक अपराध पर तीन से 15 साल कैद का प्रावधान है।

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ह विवादित कानून है क्योंकि इसका इस्तेमाल न केवल फेसबुक पोस्ट आदि के लिए किया जाता है बल्कि इसमें कोई भी शिकायत कर दूसरे को वर्षों तक कानूनी कार्यवाही में फंसा सकता है। वकीलों ने सजायाफ्ता महिला की पहचान केवल नाम के पहले हिस्से अनचान के तौर पर जाहिर की है। उन्होंने बताया कि अपने जीवन के छठे दशक के मध्य में खड़ी महिला को अदालत ने शुरू में 87 साल कैद की सजा सुनाई लेकिन अपराध के लिए माफी मांगने पर सजा की अवधि घटाकर आधी यानी 43 साल कर दी गई।





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नमाज में पड़ रहा था खलल तो गुस्साई भीड़ ने रेडियो स्टेशन पर कर दिया हमला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 19, 2021   17:12
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नमाज में पड़ रहा था खलल तो गुस्साई भीड़ ने रेडियो स्टेशन पर कर दिया हमला

उत्तरी अफगानिस्तान में रेडियो स्टेशन पर गुस्साई भीड़ ने हमला किया।अफगानिस्तान इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने कहा कि इसी भीड़ ने निकट के दो अन्य रेडियो स्टेशनों पर भी हमले की कोशिश की लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस ने उनके यहां प्रवेश को रोक दिया।

काबुल। उत्तरी अफगानिस्तान में पिछले सप्ताह एक स्थानीय रेडियो स्टेशन पर गुस्साई भीड़ ने हमला कर दिया और वहां तोड़-फोड़ की। एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकार समूह ने मंगलवार को बताया कि एक मस्जिद के इमाम ने हमलवारों को यह कहते हुए उकसाया कि स्टेशन पर तेज ध्वनि से बजने वाली संगीत से नमाज में खलल पड़ता है। पत्रकारों के समूह इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) ने कुंदुज प्रांत के कुंदुज शहर में पिछले सप्ताह हुई इस घटना की निंदा की।

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समूह ने हमले का सामना करनेवाले रेडियो स्टेशन जोहरा रेडियो के निदेशक मोहसीन अहमद को उद्धृत करते हुए बताया कि भीड़ ने स्टेशन के उपकरणों को क्षति पहुंचाई और कई घंटे तक प्रसारण का काम रोकने को मजबूर कर दिया। हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। ब्रसेल्स से काम-काज करनेवाले समूह ने अपील करते हुए कहा, ‘‘ अफगानिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा अफगानिस्तान सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।’’ अफगानिस्तान इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने कहा कि इसी भीड़ ने निकट के दो अन्य रेडियो स्टेशनों पर भी हमले की कोशिश की लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस ने उनके यहां प्रवेश को रोक दिया।





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