हैफा युद्ध में भारत की भूमिका पर बनाई जाएगी फिल्म

Battle of Haifa
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भारतीय फिल्म निर्माण कंपनी गोल्डन रेशियो फिल्म्स (जीआरएफ), ‘येलस्टार फिल्म्स’ और ‘हंड्रेड फिल्म्स’ हैफा की लड़ाई पर एक फीचर फिल्म बनाने जा रही हैं, जिसे 'इतिहास के अंतिम घुड़सवार युद्ध' के रूप में जाना जाता है।

भारतीय फिल्म निर्माण कंपनी गोल्डन रेशियो फिल्म्स (जीआरएफ), ‘येलस्टार फिल्म्स’ और ‘हंड्रेड फिल्म्स’ हैफा की लड़ाई पर एक फीचर फिल्म बनाने जा रही हैं, जिसे “इतिहास के अंतिम घुड़सवार युद्ध” के रूप में जाना जाता है। इस फिल्म के निर्माण की घोषणा हैफा दिवस के मौके पर की गई है। भारतीय सेना हर साल इस दिन तीन घुड़सवार रेजिमेंट- मैसूर, हैदराबाद और जोधपुर लांसर्स कोसम्मानित करती है। इन रेजिमेंट ने हैफा को मुक्त कराने में अंग्रेज सेना की मदद की थी।

‘विस्टास मीडिया कैपिटल’ की डिजिटल कंटेंट निर्माण कंपनी जीआरएफ; येलस्टार और हंड्रेड फिल्म्स इस फिल्म की सह-निर्माता हैं। फिल्म के लिए एक वैश्विक टीम तैयार करने की योजना है। हैफा की लड़ाई में वीरता दिखाने के लिए कैप्टन अमन सिंह बहादुर और दफादार जोर सिंह को इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट (आईओएम)जबकि कैप्टन अनूप सिंह और सेकेंड लेफ्टिनेंट सगत सिंह को मिलिट्री क्रॉस (एमसी) से सम्मानित किया गया था।

हैफा के नायक के तौर पर लोकप्रिय मेजर दलपत सिंह को उनकी बहादुरी के लिए मिलिट्री क्रॉस से सम्मानित किया गया था। भालों और तलवारों से लैस भारतीय घुड़सवार रेजिमेंट ने जबरदस्त वीरता दिखाई और माउंट कार्मेल के चट्टानी इलाकों से दुश्मनों को खदेड़ दिया था। हैफा में एक सभा को संबोधित करते हुए, इजराइल में भारत के राजदूत, संजीव सिंगला ने साहसी घुड़सवार सेना के पराक्रम को संभवतः अंतिम घुड़सवार युद्ध में से एक युद्ध करार दिया, जिसके बाद युद्ध का तरीका पूरी तरह से आधुनिक युद्ध तकनीकों में बदल गया।

डिस्क्लेमर: प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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