रूस पहुंची अफगानिस्तान की सेना, पाकिस्तान को उड़ाने की तैयारी शुरू!

रूस और तालिबान की बढ़ती नजदीकियों ने पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तालिबान के रक्षा प्रतिनिधिमंडल ने रूस के सैन्य अभ्यास में शामिल होकर आधुनिक ड्रोन, मिसाइलों और उन्नत हथियारों की जानकारी ली। इस दौरान अफगान दल ने भारत और चीन समेत कई देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें भी कीं।
जिस अफगानिस्तान को पाकिस्तान घेरने की कोशिशों में लगा हुआ है। इसके लिए लगातार वो कई इलाकों को निशाना बनाकर वहां बमबारी कर रहा है। अब ऐसा करना पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ने वाला है। क्योंकि अब भारत के सबसे पुराने दोस्त रूस ने तालिबान के लिए कुछ ऐसा किया है कि जिसने पूरे पाकिस्तान को हिला कर रख दिया है। हाल ही में जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में स्ट्राइक की थी, तो रूस ने इसकी कड़ी निंदा की थी और पाकिस्तान को ऐसे हमलों से बचने की चेतावनी दी थी। लेकिन अब रूस ने तालीबान को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ बहुत बड़ा धमाका कर दिया है जो मुनीर की सेना पर भारी पड़ेगा। दरअसल पाकिस्तान को चारों ओर से घेर कर ठोकने के लिए रूस अफगानिस्तान को ट्रेनिंग दे रहा है। यहां गौर करने वाली बात तो यह है कि जिस तालिबान को कभी पाकिस्तान ने सोवियत संघ के खिलाफ लड़ने के लिए मदद दी थी। आज वही तालीबान रूस के सैन्य अभ्यास में शामिल हो रहा है। इतना ही नहीं उसके लड़ाके और सैन्य अधिकारी रूस में आधुनिक हथियारों, ड्रोन और मिसाइल सिस्टम की जानकारी ले रहे हैं। तालीबान का एक बहुत बड़ा डिफेंस डेलीगेशन रूस के सेंटर 2026 सैन्य अभ्यास में पहुंचा है। यहां उसकी मुलाकात भारत, चीन और उत्तर कोरिया समेत कई दूसरे देशों के सैन्य अधिकारियों से भी हुई है।
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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच पहले से तनाव है। ऐसे में तालीबान की रूस से बढ़ती नजदीकी ने इस्लामाबाद के लिए एक बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। तालीबान के इस डेलीगेशन की अगुवाई मौलवी नसी उल्लाह मदनी कर रहे हैं। वो अब्दुल्ला बिन मसूद कोर के कमांडर हैं। रूस के सैन्य अभ्यास के दौरान तालीबान डेलीगेशन ने एडवांस्ड हथियारों की प्रदर्शनी भी देखी। यहां उसे रूस की नई सैन्य तकनीक को करीब से समझने का मौका मिला। प्रतिनिधि मंडल ने निगरानी करने और हमला करने वाले आधुनिक ड्रोन देखे। इसके अलावा लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों, भारी तोपों और दूसरे हथियारों की जानकारी ली। अधिकारियों ने रोबोटिक सिस्टम भी देखे जिनका इस्तेमाल युद्ध और सेना से जुड़े कामों में किया जा सकता है। डेलीगेशन ने कई देशों के सैन्य अधिकारियों के साथ बैठकें भी की। इन बैठकों में भारत, चीन, उत्तर कोरिया, वियतनाम, कोलंबिया, उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल थे। यानी कि जिस तालीबान को लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग माना जाता रहा, अब वो रूस के सैन्य मंच पर कई देशों के अधिकारियों से बातचीत करता दिख रहा है।
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यह घटनाक्रम रूस और तालीबान के बीच बढ़ते रिश्तों की एक बड़ी कड़ी है। मई 2026 में काबुल और मॉस्को के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग को लेकर एक बड़ा समझौता भी हुआ था। इस समझौते के तहत मुख्य रूप से सोवियत संघ के समय के और रूस में बने सैन्य उपकरण और हथियारों की मरम्मत और रखरखाव शामिल था। इससे पहले रूस ने जुलाई 2025 में तालीबान सरकार को औपचारिक रूप से मान्यता दी थी और ऐसा करने वाला रूस दुनिया का पहला देश बना था। जिसके बाद पाकिस्तान खूब तिलमिलाया भी लेकिन रूस ने वही किया जो उसे ठीक लगा। कुल मिलाकर साफ है कि भारत का दोस्त रूस जिस तरह से तालीबान को मजबूत करने वाले फैसले ले रहा है, वह पाकिस्तान की बहुत बड़ी मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं और यह भारत के लिए अच्छी खबर इसलिए भी है क्योंकि पिछले कुछ समय के अंदर भारत और तालिबान के संबंध काफी मजबूत हुए हैं।
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