UN में नेतन्याहू के सामने बुर्के वाली डिप्लोमैट का तहलका, हिली दुनिया !

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के भाषण के दौरान 77 देशों के राजनयिकों ने वॉकआउट किया, जबकि यूएई और अजरबैजान ने इसका बहिष्कार नहीं किया। यूएई ने शांति के लिए सीधे कूटनीतिक संपर्क को जरूरी बताया। वहीं, इजराइली राजदूत डेनी डेनन ने एक ईरानी राजनयिक को आजादी और जानकारी के लिए सैटेलाइट इंटरनेट डिवाइस देने की पेशकश की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण देने आए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को देख 77 देशों के डिप्लोमेट्स ने वॉकआउ कर दिया। इनमें से ज्यादातर मुस्लिम देश थे। कुछ यूरोपीय और कुछ लैटिन अमेरिकी देश भी थे। इसी बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा के हॉल में इजराइल के एक डिप्लोमेट ने खाली पड़ी कुर्सियों के पास जाकर लिस्ट बनानी शुरू कर दी। इजराइल का डिप्लोमेट लिस्ट में उन देशों के नाम लिख रहा था जिन्होंने वॉकआउट किया है ताकि इन देशों से आगे निपटा जाए। अब इस लिस्ट में जिस-जिस देश का नाम होगा उसके साथ बड़ा कांड होगा। आज नहीं तो उस दिन जब इनका इजराइल से वास्ता पड़ेगा। बहरहाल इसी बीच नेतन्याहू के सामने बुर्का पहनकर बैठी इस डिप्लोमेट ने भयंकर बवाल मचा दिया। बवाल भी ऐसा कि भारत में बैठे मुस्लिम भी परेशान हो गए। इस महिला डिप्लोमेट की वजह से मुस्लिम देशों की टूट सबके सामने आ गई है। वैसे इस महिला डिप्लोमेट के साथ-साथ इस युवा डिप्लोमेट के पीछे भी मुस्लिम पड़ गए हैं। मामला यहीं नहीं रुका।
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यूएन में इजराइल के राजदूत अचानक ईरानी डिप्लोमेट के पास पहुंच गए और एक होश उड़ा देने वाला ऑफर दे दिया। दरअसल हर मुस्लिम देश ने न नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार किया। लेकिन इस मुस्लिम महिला डिप्लोमेट ने नेतन्याहू के भाषण का बहिष्कार नहीं किया। यह डिप्लोमेट उठकर नहीं गई। इसने नेतन याहू का पूरा भाषण सुना। दरअसल यह है यूएन में संयुक्त अरब अमीरात की डिप्लोमेट। यानी संयुक्त अरब अमीरात ने इजराइल का बहिष्कार नहीं किया। जबकि तुर्की, सऊदी अरब, कतर, ईरान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, स्पेन और आयरलैंड जैसे 77 देश उठकर चले गए। भारत ने भी इजराइल का बहिष्कार नहीं किया। मजे की बात देखिए कि तुर्की और पाकिस्तान के दोस्त अजरबैजान ने भी नेतन्याहू का बहिष्कार नहीं किया। यह युवा डिप्लोमेट अज़र बैजान का ही है। हैरानी की बात देखिए कि अब भारत और दुनिया भर के कई लिबरल और मुस्लिम लोग संयुक्त अरब अमीरात और अज़रान के इन डिप्लोमेट्स को गालियां दे रहे हैं। मगर संयुक्त अरब अमीरात ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए और फिलिस्तीन के मुद्दे को सुलझाने के लिए इजराइल के साथ बातचीत और सीधे कूटनीतिक संपर्क का रास्ता खुला रखना चाहिए। इजराइल का बहिष्कार करने से कुछ हासिल नहीं होगा।
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संयुक्त अरब अमीरात की बात बिल्कुल सही है। इसीलिए यह मुस्लिम देश भारत का भी दोस्त है और इजराइल का भी। बहरहाल जो लोग संयुक्त अरब अमीरात और अज़रबैजान को गालियां दे रहे हैं उन पर इजराइल ने और भी ज्यादा नमक छिड़क दिया। दरअसल संयुक्त राष्ट्र में इजराइल के राजदूत डेनी डेनन एक ईरानी डिप्लोमेट के पास पहुंच गए। डेनी डेनन ने ईरानी डिप्लोमेट को एक सेटेलाइट इंटरनेट डिवाइस देने की कोशिश की। इजराइयली राजदूत डेनी डेनन ने ईरानी मिशन के सदस्य नासिर असदी को यह डिवाइस देने की कोशिश की। डेनी ने कहा कि इसे अपने साथ तेहरान ले जाओ। यह इंटरनेट डिवाइस आपके बहुत काम आ सकता है। इसके जरिए ईरान के लोगों को आजादी और जानकारी तक पहुंचने का मौका मिलेगा।
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