भारतीयों की जान जाने के बाद फुल एक्शन में दिखे जयशंकर, रूस के मंत्री लावरोव को दिखाया आईना

विदेश मंत्रालय ने सबसे पहले दिल्ली में रूसी राजनयिक को तलब किया और एक कड़ा मैसेज दिया था। लेकिन असली रणभूमि बनी फिलीपींस की राजधानी मनीला। यहां मौके पर क्वाड यानी कि भारत, अमेरिका, जापान और और आसियान देशों की बैठक का एक तरफ चीन की विस्तारवादी नीतियों पर चर्चा हो रही थी। दूसरी तरफ रूस भी यह डायलॉग पार्टनर के तौर पर वहां मौजूद था। इसी माहौल के बीच जयशंकर साहब ने अपना दांव चला।
जब चार भारतीयों की जान चली गई तो भारत की खामोशी भी गरजने लगी। यूक्रेन की जंग में जब मिसाइल हमले में निर्दोष भारतीय नाविकों की जान गई तो दिल्ली से लेकर मनीला तक हड़कंप मच गया। पूरी दुनिया देख रही थी कि क्या जयशंकर हमेशा की तरह रूस के साथ सिर्फ व्यापार की बात करेंगे। लेकिन जयशंकर कहां छोड़ने वाले थे। उन्होंने लावरोव से हाथ जरूर मिलाया लेकिन उसी हाथ से रूस को भारत की लाल लेखा भी दिखा दी। 19 जुलाई की शाम यूक्रेन का ओडसा पोर्ट मालवाहक जहाज अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ रहा था। अचानक एक मिसाइल ने उसे निशाना बनाया। जहाज पर 17 चालक दल सदस्य थे। जिनमें से पांच भारतीय थे और इस हमले में चार भारतीयों की जान तुरंत चली गई। अब जरा कल्पना कीजिए उन परिवारों की जिनके बेटे विदेशी धरती पर सिर्फ रोजीरोटी के लिए गए थे और जंग का शिकार हो गए। भारत ने इसे सिर्फ एक हादसा नहीं माना। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन था और भारत ने इसे बहुत ही गंभीरता से लिया। हमले के तुरंत बाद दिल्ली में हलचल शुरू हुई।
इसे भी पढ़ें: Jaishankar-Wang Yi Meeting: सीमा पर शांति के बिना सामान्य नहीं होंगे रिश्ते, जिनपिंग के मंत्री को सामने बिठा जयशंकर ने दिया साफ संदेश
विदेश मंत्रालय ने सबसे पहले दिल्ली में रूसी राजनयिक को तलब किया और एक कड़ा मैसेज दिया था। लेकिन असली रणभूमि बनी फिलीपींस की राजधानी मनीला। यहां मौके पर क्वाड यानी कि भारत, अमेरिका, जापान और और आसियान देशों की बैठक का एक तरफ चीन की विस्तारवादी नीतियों पर चर्चा हो रही थी। दूसरी तरफ रूस भी यह डायलॉग पार्टनर के तौर पर वहां मौजूद था। इसी माहौल के बीच जयशंकर साहब ने अपना दांव चला।
इसे भी पढ़ें: Manila में S Jaishankar और Marco Rubio की बड़ी बैठक: Trade, Tariffs और AI पर बनी नई रणनीति
उन्होंने क्वाड की व्यवस्था के बीच लावारू के साथ द्विपक्षी बैठक कर ली। अब जयशंकर साहब की कूटनीति की सबसे बड़ी खूबी है सही समय पर सही बात कहना। उन्होंने लावरूफ के साथ बैठक की तस्वीरों तो साझा की लेकिन उनके शब्दों में छिपा संदेश बेहद तीखा था। जयशंकर साहब ने साफ कहा कि द्विपक्षी संबंधों की समीक्षा तो जरूरी है लेकिन भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हमारी सबसे पहले प्राथमिकता है। उन्होंने यूक्रेन संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र के हालातों पर रूस को आईना दिखाया। जयशंकर साहब ने यह मुद्दा उस मंच पर उठाया जहां अमेरिका, जापान जैसे देश भी मौजूद थे और यह रूस को बताने का तरीका था कि भारत की दोस्ती को कमजोरी ना समझा जाए। व्यापार और निवेश की चर्चा तो हुई लेकिन भारत के नाविकों की मौत का साया पूरी बातचीत पर हावी रहा।
मनीला में जो कुछ हुआ वह सिर्फ एक मुलाकात नहीं है। यह इंडोपेसिफिक में बदलते गेम पावर का सबूत है। चीन की नाक के नीचे भारत, अमेरिका और रूस का एक साथ होना यह बताता है कि भारत अब किसी एक के पाले में खड़े होने वाला देश नहीं है। यूक्रेन ने इस हमले के लिए सीधे रूस को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि भारत ने सीधे किसी का नाम नहीं लिया लेकिन जयशंकर साहब का लावर को तेवर दिखाना यह साफ करता है कि भारत को पता है कि गोली कहां से चली है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने जिस सख्त लहजे से इसकी निंदा की वो भारत की न्यू फॉरेन पॉलिसी का हिस्सा है। खैर साफ है कि भारत अब वो देश नहीं है जो अपने नागरिकों की मौत पर सिर्फ शोक संवेदनाएं जता कर बैठ जाए। जयशंकर साहब ने मनीला में जो किया वो भारत की बढ़ती ताकत का एहसास है। उन्होंने रूस को बता दिया कि हमारे संबंधों की गहराई तभी बनी रहेगी जब हमारे लोगों की जान सुरक्षित रहेगी। मौके पर चौका मारना इसी को कहते हैं मुलाकात भी हुई, हाथ भी मिलाया और देश का पक्ष भी पूरी मजबूती से रख दिया।
अन्य न्यूज़














