पहले तमीज़ सीख लो फिर बात करना, बुरी तरह बेइज्ज़त हुआ चीन

China
ANI
अभिनय आकाश । Sep 9 2026 10:37AM

फिलीपींस के डिफेंस सेक्रेटरी ने चीन की तरफ से आए एक छोटे से कागज को ही चीन के खिलाफ हथियार बना दिया। लेकिन जो कुछ कहा गया उसमें कई ऐसी बातें हैं जिन्हें समझना बेहद जरूरी है।

साउथ कोरिया की राजधानी सोल में दुनिया के कई देशों के रक्षाधिकारियों का बड़ा मंच लगा था। चर्चा हो रही थी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री चुनौतियों की। फिलीपींस के डिफेंस सेक्रेटरी गिलबर्टो टोडेरो भी मंच पर मौजूद थे और अपने देश के सामने मौजूद समुद्री खतरों की बात कर रहे थे। तभी ऑडियंस की तरफ से चीन की स्थिति वाला एक नोट उन्हें दिया गया। नोट में लिखा था कि 2016 में साउथ चाइना सी को लेकर आया अंतरराष्ट्रीय फैसला गैरकानूनी है। चीन उसे नहीं मानता और उसकी कोई बाधिकारी ताकत नहीं है। गिलबर्टों ने पर्ची पढ़ी और फिर चीन को उसी के शब्दों में ऐसा जवाब दिया कि यह पूरा मामला सुर्खियों में आ गया। मतलब इस तरह चीन को कभी बेइज्जत होते नहीं देखा गया। फिलीपींस के डिफेंस सेक्रेटरी ने चीन की तरफ से आए एक छोटे से कागज को ही चीन के खिलाफ हथियार बना दिया। लेकिन जो कुछ कहा गया उसमें कई ऐसी बातें हैं जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। इसके पीछे करीब एक दशक पुराना एक बड़ा समुद्री विवाद है। एक ऐसा विवाद जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्र में अधिकार, चीन की दावेदारी और फिलीपींस की सुरक्षा सब कुछ एक साथ जुड़ा हुआ है। 

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दरअसल गिलबर्टो सोल डिफेंस डायलॉग में अंतरराष्ट्रीय कानून और साउथ चाइना सी में अपने देश की सुरक्षा पर बात कर रहे थे। तभी उन्हें चीन की तरफ से एक नोट दिया गया। गिलबर्टो ने उस नोट को सबके सामने पढ़ना शुरू कर दिया। चीन ने सोचा होगा कि वो इस नोट के जरिए उनको बता पाएगा कि उन्हें क्या बोलना है, क्या नहीं। लेकिन यहां पर चीन की चाल उल्टी ही पड़ गई। चीन ने जो नोट भेजा वो नोट गिलबर्टो ने उसी मंच से पढ़ना शुरू कर दिया और चीन को बेइज्जत करना शुरू कर दिया। दरअसल चीन की तरफ से कहा गया था कि साउथ चाइना सी ऑर्बिट्रेशन के मामले में चीन की स्थिति साफ है। चीन इस ऑर्बिट्रेशन को अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ मानता है और 2016 में आया अवार्ड गैर कानानूनी शून्य और बेअसर है। अब यहां गिलबर्टो ने चीन को पहली बार घेरा। 

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पहले तो उन्होंने चीन का नोट पढ़ा। फिर कहा कि अगर आप यह कह रहे हैं कि ऑर्बिट्रेशन अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है, तो फिर आपने जिस उन्ज़ पर दस्तखत किए, तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि उन्को ही अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करता है। यानी चीन की दलील को उसी के सामने पलट दिया गया। इसके बाद नोट में कहा गया कि 2016 के फैसले की कोई बाधिकारी ताकत नहीं है। गिलबर्टो ने जवाब दिया क्योंकि आप यूएन क्लॉज़ के अधीन होना नहीं चाहते और क्योंकि नोट में चीन की तरफ से इस फैसले को स्वीकार नहीं किया गया ना उसे मान्यता दी गई।

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