Nepal में बाढ़ प्रभावित रसुवा से सुरक्षित निकाले गए 3 भारतीय नागरिक, दूतावास करा रहा वापसी

Nepal Army
प्रतिरूप फोटो
AI-Generated

नेपाली सेना ने रसुवा जिले के चिलिमे गांव से तीन भारतीयों और उनके एक स्थानीय सहयोगी को सुरक्षित निकाल लिया है। भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने इस मदद के लिए नेपाली सेना का आभार जताया और बताया कि दूतावास उनकी स्वदेश वापसी की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही भारत की विशेषज्ञ टीमें नेपाल में आपदा प्रभावित इलाकों में बचाव और डीएनए जांच में जुटी हैं।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोमवार को बताया कि बाढ़ प्रभावित रसुवा जिले के चिलिमे गांव से नेपाली सेना द्वारा बचाए गए चार लोगों में तीन भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों में 26 अगस्त को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत बचाव और राहत अभियानों में पड़ोसी देश की लगातार सहायता कर रहा है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, सोमवार को इस आपदा में मरने वालों की संख्या 900 के पार पहुंच गई, जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।

श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘नेपाली सेना द्वारा चिलिमे गांव से बचाए गए तीन भारतीय नागरिकों और उनके नेपाली सहयोगी से मुलाकात की। रसुवा का यह गांव अचानक आयी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हम नेपाली सेना की मदद के लिए उनका धन्यवाद करते हैं।’’ उन्होंने बताया कि काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास इन लोगों की भारत वापसी की व्यवस्था कर रहा है।

इसे भी पढ़ें: Nepal में बाढ़ और भूस्खलन पीड़ितों की मदद के लिए Sikkim से रवाना हुआ 35 सदस्यीय विशेष दल

विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि भारत ने नेपाल में बचाव अभियानों और आपदा में मारे गए लोगों की पहचान में सहायता के लिए विशेषज्ञ दल भी भेजे हैं। मंत्रालय ने कहा कि 19 सदस्यीय भारतीय फोरेंसिक टीम ने रविवार से काठमांडू में काम शुरू कर दिया है। यह टीम शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूनों के विश्लेषण में सहायता करेगी।

इसे भी पढ़ें: नेपाल में बाढ़ के फर्जी वीडियो पर कार्रवाई, 72 सोशल मीडिया यूजर को हटाने का निर्देश

इसके अलावा, भारतीय सुरंग बचाव दल चिलिमे और लांगटांग स्थित जलविद्युत परियोजनाओं में अपना अभियान जारी रखे हुए है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, भारत और चीन के विशेषज्ञ दल नेपाल के बचाव दलों की मदद कर रहे हैं। ये दल विभिन्न जलविद्युत परियोजना स्थलों पर मौजूद उन 933 श्रमिकों और कर्मचारियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जिनसे 26 अगस्त से संपर्क नहीं हो पाया है।

इनमें से कई लोगों के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। माना जा रहा है कि नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या हिमस्खलन के कारण अचानक आयी बाढ़ ने भोटेकोशी नदी के आसपास भारी तबाही मचाई। बाढ़ में घर, सड़कें और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

इसे भी पढ़ें: सद्गुरु ने आपदाओं से निपटने के लिए भारत और चीन समेत पांच देशों के हिमालय बोर्ड की मांग की

भारतीय दूतावास ने बताया कि वह बाढ़ प्रभावित इलाकों से बचाए गए भारतीय नागरिकों की भारत वापसी में लगातार मदद कर रहा है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़