सुनहरे दरवाजे से निकले पुतिन, पूरी कैबिनेट लेकर मोदी से मिलने आए शख्स से मिलाया हाथ

। ऐसा क्या संकट है कि अपने देश को बचाने के लिए राष्ट्रपति नाहियान लगातार विदेशी दौरे कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात क्या चाहता है और भारत रूस क्या बड़ा धमाका कर रहे हैं।
मॉस्को में ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस का यह मशहूर सुनहरा दरवाजा खुला और रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन इस दरवाजे से एक विशाल हॉल में दाखिल हुए। इस हॉल में पुतिन उस शख्स से मिले जिसने कुछ दिन पहले ही पीएम मोदी से मुलाकात की थी। जानकारी के लिए बता दें कि ग्रैंड क्रेमलिन पैलेस पुतिन का ऑफिशियल रेजिडेंस है और इसी पैलेस में लगे इन सुनहरे दरवाजों से एक बार पुतिन पीएम मोदी के साथ भी निकले थे। बहरहाल 29 जनवरी को पुतिन ग्रैंड क्रमन पैलेस के इसी हॉल में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहियान से मिले। दिलचस्प बात यह है कि 10 दिन पहले ही अल नाहियान अपनी पूरी कैबिनेट के साथ पीएम मोदी से भी मिलने पहुंचे थे।
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ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या संयुक्त अरब अमीरात किसी बड़े संकट में है? क्यों संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति पहले पीएम मोदी से मिले और उसके बाद राष्ट्रपति पुतिन से। ऐसा क्या संकट है कि अपने देश को बचाने के लिए राष्ट्रपति नाहियान लगातार विदेशी दौरे कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात क्या चाहता है और भारत रूस क्या बड़ा धमाका कर रहे हैं। दरअसल संयुक्त अरब अमीरात इन दिनों सऊदी अरब के साथ गंभीर संकट में फंसा हुआ है। यह दोनों देश यमन और सूडान में अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं। जिसकी वजह से इन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक खींचतान शुरू हो गई है।
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सऊदी अरब ने तो यमन में संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले गुट पर एयर स्ट्राइक तक कर दी। इन दोनों देशों के बीच बढ़ रहे विवाद का एक यह कारण भी है कि संयुक्त अरब अमीरात ने वित्तीय और व्यापारिक केंद्र के रूप में सऊदी अरब को काफी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में दोनों की खींचतान और ज्यादा बढ़ गई है। लेकिन इसी खींचतान को पाकिस्तान और गहरा कर रहा है। पाकिस्तान ने इस विवाद को बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो सिर्फ सऊदी अरब के साथ एक डिफेंस डील कर ली। उसके बाद एक इस्लामिक नाटो बनाने की मांग भी कर दी जिसके शुरुआती मेंबर्स पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्की और कतर हो सकते हैं। अब यहां दिलचस्प बात यह है कि ये चारों देश संयुक्त अरब अमीरात से नाराज हैं।
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