पाकिस्तान की ट्रेन में गैस सिलेंडर फटने से लगी भयानक आग, 65 की मौत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 31, 2019   11:34
  • Like
पाकिस्तान की ट्रेन में गैस सिलेंडर फटने से लगी भयानक आग, 65 की मौत

रेलमंत्री शेख रशीद अहमद ने कहा कि चलती ट्रेन में कुछ यात्रियों द्वारा नाश्ता बनाने के दौरान एक गैस का चूल्हा फट गया जिसके कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि हालाँकि ट्रेन में चूल्हे पर खाना बनाना गैरकानूनी है।

लाहौर। पाकिस्तान में गुरुवार को एक चलती ट्रेन में आग लगने के कारण कम से कम 65 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। ट्रेन में कुछ यात्री द्वारा ले जाए जा रहे गैस सिलेंडर में हुए विस्फोट के कारण आग लगी। तेज़गाम नाम की यह रेलगाड़ी कराची से लाहौर जा रही थी तभी यह हादसा हुआ। पंजाब प्रान्त में लाहौर से 400 किमी दूर रहीम यार खान के पास लियाकतपुर में ट्रेन के तीन डब्बे आग लगने से बर्बाद हो गए। जिला पुलिस अधिकारी आमिर तैमूर ने बताया कि आग लगने से कम से कम 65 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। उन्होंने कहा कि अधिकतर मौत लोगों के ट्रेन से कूदने के कारण हुई।

इसे भी पढ़ें: मोदी से मुलाकात के बाद सऊदी अरब ने कहा- कश्मीर भारत का आंतरिक मामला

रेलमंत्री शेख रशीद अहमद ने कहा कि चलती ट्रेन में कुछ यात्रियों द्वारा नाश्ता बनाने के दौरान एक गैस का चूल्हा फट गया जिसके कारण यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा कि हालाँकि ट्रेन में चूल्हे पर खाना बनाना गैरकानूनी है।अहमद के अनुसार मारे गए लोगों में तब्लीगी जमात (इस्लामी प्रचारक) के लोग शामिल थे जो एक बड़े आयोजन के लिए लाहौर जा रहे थे। रेलमंत्री ने कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि 40 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। 

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सेहत में सुधार

अधिकारियों ने बताया कि मृतकों की पहचान करने का प्रयास जारी है। सेना द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि राहत कार्य जारी है और घायलों को अस्पताल पहुँचाने के लिए हेलीकाप्टर की मदद ली जा रही है। प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस हादसे पर दुख जताया है और घायलों को उचित उपचार मुहैया करवाने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। 





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे?

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 19, 2021   19:59
  • Like
पहले 5 मार्च को होता था US के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण, फिर 20 जनवरी को क्यों होने लगा इनाॅगरेशन डे?

अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा निर्धारित की गई है। ये समयसीमा 20 जनवरी को खत्म होती है। अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत इस तारीख का जिक्र किया गया है। इससे पहले शपथ ग्रहण पांच मार्च को होता था।

अमेरिका में नए राष्ट्रपति आधिकारिक रूप से 20 जनवरी को शपथ ग्रहण करते हैं। यह शपथ ग्रहण समारोह वॉशिंग्टन डीसी की कैपिटल बिल्डिंग की सीढ़ियों पर होता है। कल यानी 20 जनवरी को जो बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे साथ ही कमला हैरिस भी उपराष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। 

इसे भी पढ़ें: कैपिटल हिल हिंसा: पांच बार के ओलंपिक पदक विजेता पर मामला दर्ज, बढ़ी मुश्किलें

क्यों 20 जनवरी को ही होता है शपथ

अमेरिकी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यकाल की समयसीमा निर्धारित की गई है। ये समयसीमा 20 जनवरी को खत्म होती है। अमेरिकी संविधान के 20वें संशोधन के तहत इस तारीख का जिक्र किया गया है। इससे पहले शपथ ग्रहण पांच मार्च को होता था। जिसे बाद में 20 जनवरी को शपथ लेने की रवायत चल पड़ी। पहली बार 1937 में अमेरिका के राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने दूसरी बार इस पद पर काबिज होने पर इस तारीख को शपथ ली थी। नियम के अनुसार अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव नवंबर के पहले मंगलवार को होना तय है वहीं 20 जनवरी को नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को शपथ दिलवाई जाती है। 

पहले 5 मार्च को होता था शपथ ग्रहण 

1937 से पहले अमेरिका में 5 मार्च को शपथ ग्रहण होता था। जार्ज वाॅशिंगटन ने फेडरल हाॅल की बाॅलकनी में 30 अप्रैल 1789 को शपथ लीथी। दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर उन्होंने 4 मार्च 1793 को शपथ लिया था। जेम्स मोनरो ने राष्ट्रपति बनने पर सुप्रीम कोर्ट के जजों से विचार करने के बाद 5 मार्च 1821 को अपना शपथ ग्रहण का कार्यक्रम रखा। इसके बाद अमेरिकी संविधान में 20वां संशोधन हुआ और राष्ट्रपति के शपथ लेने की तारीख 20 जनवरी हो गई। 







थाईलैंड के राजा का अपमान करना इस महिला को पड़ा भारी, हुई 43 साल कैद की सजा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 19, 2021   18:15
  • Like
थाईलैंड के राजा का अपमान करना इस महिला को पड़ा भारी, हुई 43 साल कैद की सजा

थाईलैंड के राजा का अपमान करने की दोषी महिला को रिकॉर्ड 43 साल कैद की सजा सुनाई गई है।अदालत की यह सजा ऐसे समय आई है जब प्रदर्शन चल रहे हैं और राजशाही की अभूतपूर्व तरीके से सार्वजनिक स्तर पर आलोचना हो रही है।

बैंकॉक। थाईलैंड की अदालत ने एक पूर्व नौकरशाह को यहां की राजशाही का अपमान करने या मानहानि के खिलाफ बने सख्त कानून का उल्लंघन करने का दोषी ठहराते हुए मंगलवार को रिकॉर्ड 43 साल कैद की सजा सुनाई है। मानवाधिकार पर थाई वकीलों के समूह ने बताया कि बैंकॉक की फौजदारी अदालत ने महिला को फेसबुक और यूट्यूब पर राजशाही की आलोचना करने वाली टिप्पणी के साथ् ऑडियो क्लिप पोस्ट कर देश के महामहिम सम्मान कानून की 29 धाराओं का उल्लंघन करने का दोषी करार दिया।

इसे भी पढ़ें: चेतावनी! मार्च तक बढ़ सकता है कोरोना का नया स्ट्रेन, WHO ने जताई चिंता

अदालत की यह सजा ऐसे समय आई है जब प्रदर्शन चल रहे हैं और राजशाही की अभूतपूर्व तरीके से सार्वजनिक स्तर पर आलोचना हो रही है। इस फैसले का अधिकार समूहों ने निंदा की है। ह्यूमन राइट्स वॉच में वरिष्ठ शोधकर्ता सुनई फासुक ने कहा, ‘‘ अदालत का आज का फैसला स्तब्ध करने वाला है और यह बहुत ही घातक संकेत है कि राजशाही की आलोचना बर्दाश्त ही नहीं की जाएगी बल्कि सख्त सजा भी दी जाएगी।’’ उल्लेखनीय है कि थाईलैंड में राजशाही का अपमान करने के खिलाफ कानून है जिसे आमतौर पर धारा-112 कहा जाता है और इसमें प्रत्येक अपराध पर तीन से 15 साल कैद का प्रावधान है।

इसे भी पढ़ें: अमेरिकी संसद भवन हिंसा मामले में 2 और लोग गिरफ्तार, एक ने किया आत्मसमर्पण

ह विवादित कानून है क्योंकि इसका इस्तेमाल न केवल फेसबुक पोस्ट आदि के लिए किया जाता है बल्कि इसमें कोई भी शिकायत कर दूसरे को वर्षों तक कानूनी कार्यवाही में फंसा सकता है। वकीलों ने सजायाफ्ता महिला की पहचान केवल नाम के पहले हिस्से अनचान के तौर पर जाहिर की है। उन्होंने बताया कि अपने जीवन के छठे दशक के मध्य में खड़ी महिला को अदालत ने शुरू में 87 साल कैद की सजा सुनाई लेकिन अपराध के लिए माफी मांगने पर सजा की अवधि घटाकर आधी यानी 43 साल कर दी गई।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




नमाज में पड़ रहा था खलल तो गुस्साई भीड़ ने रेडियो स्टेशन पर कर दिया हमला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 19, 2021   17:12
  • Like
नमाज में पड़ रहा था खलल तो गुस्साई भीड़ ने रेडियो स्टेशन पर कर दिया हमला

उत्तरी अफगानिस्तान में रेडियो स्टेशन पर गुस्साई भीड़ ने हमला किया।अफगानिस्तान इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने कहा कि इसी भीड़ ने निकट के दो अन्य रेडियो स्टेशनों पर भी हमले की कोशिश की लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस ने उनके यहां प्रवेश को रोक दिया।

काबुल। उत्तरी अफगानिस्तान में पिछले सप्ताह एक स्थानीय रेडियो स्टेशन पर गुस्साई भीड़ ने हमला कर दिया और वहां तोड़-फोड़ की। एक अंतरराष्ट्रीय पत्रकार समूह ने मंगलवार को बताया कि एक मस्जिद के इमाम ने हमलवारों को यह कहते हुए उकसाया कि स्टेशन पर तेज ध्वनि से बजने वाली संगीत से नमाज में खलल पड़ता है। पत्रकारों के समूह इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) ने कुंदुज प्रांत के कुंदुज शहर में पिछले सप्ताह हुई इस घटना की निंदा की।

इसे भी पढ़ें: चेतावनी! मार्च तक बढ़ सकता है कोरोना का नया स्ट्रेन, WHO ने जताई चिंता

समूह ने हमले का सामना करनेवाले रेडियो स्टेशन जोहरा रेडियो के निदेशक मोहसीन अहमद को उद्धृत करते हुए बताया कि भीड़ ने स्टेशन के उपकरणों को क्षति पहुंचाई और कई घंटे तक प्रसारण का काम रोकने को मजबूर कर दिया। हालांकि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। ब्रसेल्स से काम-काज करनेवाले समूह ने अपील करते हुए कहा, ‘‘ अफगानिस्तान में पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा अफगानिस्तान सरकार के लिए बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।’’ अफगानिस्तान इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ने कहा कि इसी भीड़ ने निकट के दो अन्य रेडियो स्टेशनों पर भी हमले की कोशिश की लेकिन मौके पर पहुंची पुलिस ने उनके यहां प्रवेश को रोक दिया।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।




This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept