US Presidential frustration: ईरान जंग पर White House में फूट, Trump ने सैन्य विकल्पों पर जताई कड़ी नाराजगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान मामले में त्वरित समझौते की उम्मीदों के विपरीत युद्ध का लंबा खिंचना वाशिंगटन की सामरिक योजनाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। जॉर्डन और कुवैत जैसे पड़ोसी देशों तक बढ़ती आंच और ऊर्जा जहाजों पर होते हमले इस बात का प्रमाण हैं कि एक स्पष्ट सैन्य और कूटनीतिक रणनीति के अभाव में यह संघर्ष अनियंत्रित हो सकता है। कीवर्ड्स: ईरान संघर्ष, ट्रंप प्रशासन, मध्य पूर्व संकट, आईआरजीसी, रक्षा रणनीति
ईरान के साथ जारी संघर्ष अब पांचवें महीने में पहुंच चुका है और इसे लेकर अमेरिका के भीतर भी बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है। मौजूद जानकारी के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निजी तौर पर इस बात से नाराज हैं कि अब तक युद्ध को खत्म करने या किसी समझौते तक पहुंचने का कोई स्पष्ट रास्ता सामने नहीं आया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले सप्ताह डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में मौजूदा हालात पर असंतोष जताया। बताया जा रहा है कि उन्होंने उपलब्ध सैन्य विकल्पों और युद्ध समाप्त करने की ठोस रणनीति के अभाव पर चिंता व्यक्त की। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर ट्रंप लगातार विश्वास से भरे बयान देते रहे हैं, लेकिन प्रशासन के भीतर स्थिति को लेकर संतोष नहीं है।
बता दें कि एक रिपोर्ट में ट्रंप के करीबी सूत्र के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति को उम्मीद नहीं थी कि ईरान को किसी समझौते के लिए तैयार करना इतना कठिन होगा। सूत्र का कहना है कि युद्ध को लंबे समय तक जारी रखने की कोई स्पष्ट योजना नहीं थी और ट्रंप भी इसे लंबा खिंचने वाला संघर्ष नहीं बनाना चाहते थे।
गौरतलब है कि व्हाइट हाउस के भीतर भी आगे की रणनीति को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, इतने लंबे समय के बाद भी प्रशासन में अगले कदम को लेकर पूरी एकजुटता नहीं बन पाई हैं। हालांकि व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने अपना आपा नहीं खोया था और मीडिया में आई कुछ बातें सही नहीं है।
इस बीच युद्ध का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की हैं। इन हमलों में सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकाने तथा तटीय रक्षा केंद्रों को निशाना बनाया गया। बताया गया कि यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान की ओर से मिसाइल हमला किए जाने के बाद की गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, संघर्ष का असर अब आसपास के देशों पर भी दिखाई देने लगा हैं। कुवैत के उत्तरी हिस्से में एक चीनी कंपनी की इमारत पर हुए ईरानी हमले में एक कर्मचारी की मौत हो गई। वहीं जॉर्डन ने अपनी हवाई सीमा में प्रवेश करने वाली ईरान की पांच मिसाइलों को बीच रास्ते में ही रोक दिया है।
इसके अलावा मिस्र के दमियाता बंदरगाह पर दो प्राकृतिक गैस जहाजों में ड्रोन हमलों के बाद आग लगने की भी खबर सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच जल्द कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया में और अधिक अस्थिरता पैदा कर सकता है।
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