कश्मीर पर आई बात तो भारत ने हिला डाले 57 मुस्लिम देश! PoK पर भी दे दिया अल्टीमेटम

संयुक्त राष्ट्र में ओआईसी द्वारा जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणियों को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उसके अभिन्न अंग हैं और ओआईसी को आंतरिक मामलों में बोलने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही, भारत ने पाकिस्तान को पीओके खाली करने का अल्टीमेटम दिया।
भारत कई मंचों पर दुनिया को यह बता चुका है कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का विभिन्न हिस्सा है और वो हमेशा रहेंगे और अब बात सिर्फ और सिर्फ पीओके पर होगी जिसे पाकिस्तान दशकों से हथिया कर बैठा है। लेकिन फिर भी यह बात कुछ लोगों के दिमाग में नहीं बैठ रही है। पाकिस्तान का पक्ष लेने और कश्मीर पर जहर उगलने के लिए कुछ कट्टरपंथी देश आए दिन नया-नया प्रोपेगेंडा लेकर सामने आ जाते हैं। हालांकि ऐसे देशों को भारत भी मुंहतोड़ जवाब देते हुए उनके सारे षड्यंत्र की हवा निकाल देता है। इस बार भी भारत ने कुछ ऐसा ही किया। जब इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी ने जम्मू कश्मीर को लेकर ज़हर उगला तो भारत ने एक साथ 57 मुस्लिम देशों को तगड़ा सुना डाला और ऐसी नसीहत दी कि सबको हिला कर रख दिया। यही नहीं बल्कि गुस्से में आए भारत ने पाकिस्तान को पीओके खाली करने का अल्टीमेटम दे डाला।
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दरअसल जिस वक्त न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा था तो इसी बीच ओआईसी की बैठक हुई। इस बैठक में ओआईसी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि संगठन कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करता है। ओआईसी ने मानव अधिकार और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। साथ ही 2019 के बाद भारत की ओर से उठाए गए कदमों को वापस लेने की मांग दोहराई। फिर क्या था? भारत ने ओआईसी को तगड़ा जवाब दे डाला। इस मुद्दे पर भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से बयान जारी किया गया। बयान में कहा गया कि भारत तथाकथित ओआईसी कॉन्ट्रैक्ट ग्रुप के जम्मू कश्मीर पर संयुक्त विज्ञापति में भारत के संदर्भ में की गई अनुचित और तथ्यात्मक रूप से गलत टिप्पणियों को स्पष्ट रूप से खारिज करता है। ओवैसी का उन मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है जो पूरी तरह भारत के आंतरिक मामले हैं। विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और कभी अलग ना होने वाले अंग हैं। राजनीतिक रूप से प्रेरित दुष्प्रचार को बार-बार दोहराने से यह वास्तविकता नहीं बदल सकती। इस तरह के प्रेज चीजों का बार-बार समर्थन ओवैसी की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
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भारत ने कड़े लहजे में कहा कि पाकिस्तान को अपने मनगढ़ंत और प्रेरित दुष्प्रचार के लिए मंच उपलब्ध कराने के बजाय ओवैसी को पाकिस्तान को सलाह देनी चाहिए। तो इस तरह से कश्मीर पर जहर उगलने वाले 57 मुस्लिम देशों के संगठन की भारत ने सारी हेकड़ी निकाल कर रख दी। इधर विदेश मंत्रालय ने कश्मीर के मुद्दे पर ओवैसी को आईना दिखाया तो उधर भारतीय डिप्लोमेट क्षितज त्यागी ने यूएन में पीओके को लेकर पाकिस्तान को अल्टीमेटम दे डाला। कश्मीर और भारत में मुस्लिमों पर पाकिस्तान की ज़हरीली बातों को लेकर शित ने जमकर फटकार लगाई और स्नाबान पर जम्मू कश्मीर के कुछ हिस्सों पर गैरकानूनी कब्जा करने का आरोप लगाया और उसे खाली करने की मांग की। दरअसल कुछ दिनों पहले ही जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने जम्मू कश्मीर का दौरा किया था तो उन्होंने वहां की धरती से खड़े होकर ऐलान कर दिया था कि जम्मू कश्मीर भारत का विन अंग रहा है और है और आगे भी रहेगा।
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