भारत के खजाने में 800 अरब डॉलर कौन डालेगा? Morgan Stanley का होश उड़ाने वाला खुलासा

भारत जो बाहर से खरीदता है उसका आधा भुगतान हमारे विदेशों में बैठे वीर सिपाही या फिर आप इन्हें श्रमिक कह सकते हैं वो कर देते हैं। वैसे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। जीसीसी देशों यानी कि यूएई, सऊदी अरब, क़तर में काम कर रहे लाखों भारतीयों के रोजगार पर खतरा मंडराता दिख रहा है।
दुनिया युद्ध की आग में हर रोज जल रही है। चाहे पश्चिम एशिया की धक हो या फिर रूस यूक्रेन की भयंकर तबाही। लेकिन अब इन महासंकटों के बीच भारत ने एक ऐसा आर्थिक ब्रह्मास्त्र चला है जिससे पूरी दुनिया हैरान हो गई। दरअसल आज भारत केवल एक मुखदर्शक नहीं है बल्कि विश्व मित्र की भूमिका में है। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शांति का संदेश देते हैं। वहीं दूसरी तरफ हमारे यानी भारत के प्रवासी भारतीय अपनी मेहनत से देश की नींव मजबूत कर रहे हैं। यही वजह है कि मॉ्गन स्टैनली की ताजा रिपोर्ट भारत की इसी बढ़ती साख की गवाही दे रही है। बिल्कुल विदेश से पैसा घर भेजने के मामले में भारतीय प्रवासियों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। भारत को मिलने वाली रेमिटेंस यानी प्रवासियों द्वारा भेजा गया धन 138 बिलियन पहुंचने का अनुमान है। यह पिछले साल से 15% अधिक हैं। यह विशाल धनराशि हमारे व्यापार घाटे का 40 से 45% हिस्सा अकेले संभाल लेती है।
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भारत जो बाहर से खरीदता है उसका आधा भुगतान हमारे विदेशों में बैठे वीर सिपाही या फिर आप इन्हें श्रमिक कह सकते हैं वो कर देते हैं। वैसे अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। जीसीसी देशों यानी कि यूएई, सऊदी अरब, क़तर में काम कर रहे लाखों भारतीयों के रोजगार पर खतरा मंडराता दिख रहा है। पर्यटन, लॉजिस्टिक और निर्माण जैसे क्षेत्रों में सुस्ती दिखाई दे रही है और एक समय था जब भारत पूरी तरह खाड़ी देशों पर निर्भर था। लेकिन अब खेल पलट चुका है। यूएसए और विकसित देशों से अब कुल रेमिटेंस का 42% हिस्सा आ रहा है और भारतीय अब सिर्फ मजदूरी नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों और अर्थव्यवस्थाओं को चला रहे हैं। लेकिन केरल जैसे राज्यों के लिए यह खबर चिंताजनक है जहां की 20% रेमिटेंस सीधे खाड़ी देशों से आती है। अगर युद्ध लंबा खिसता है तो हमें एक होम कमिंग पॉलिसी की जरूरत होगी ताकि लौटने वाले हुनरमन भारतीयों को देश के निर्माण में लगाया जा सके।
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वैसे रेमिटेंस पर आरबीआई के पुराने सर्वे के मुताबिक कुल रकम में से ज्यादातर इस्तेमाल पारिवारिक जरूरतों के लिए किया जाता है। कुछ रकम को डिपॉजिट और निवेश के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है और इस तिमाही में रेमिटेंस बढ़ने की एक वजह यह भी है कि त्योहारों और शादियों की वजह से इस दौरान प्रवासी भारतीय काफी रकम अपने घर भेज रहे हैं। खैर भारत की असली ताकत उसकी सेना के साथ-साथ उसकी आर्थिक रीड भी है और मॉर्गन स्टैनली की ये रिपोर्ट हमें सचेत करती है और गौरवान्वित भी करती है।
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