Iran पर कहर बनकर टूटेगा America? फिर से निकाल दिया अपना ब्रह्मास्त्र

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अभिनय आकाश । Jul 23 2026 7:01PM

अमेरिका ने इसे यूके के एयरबेस से उड़ाया है और सीधे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉप्स यानी आईआरजीसी के ठिकाने को उड़ाने का आदेश दे दिया है। यह हमला सिर्फ सैन्य हमला नहीं है बल्कि ईरान को एक सीधा अल्टीमेटम था कि अब अमेरिका रुकने वाला नहीं है।

अमेरिका ने पहली बार अपने उस ब्रह्मास्त को जंग के मैदान में उतार दिया जिसके नाम मात्र से दुश्मन की सेना थर-थर कांपती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं बी वन लैंसर लॉन्ग रेंज बॉम्बर की। मंगलवार को जब दुनिया सो रही थी तब इन आसमानी शिकारियों ने ईरान के ठिकाने पर वो भी हमला किया जिसने तेहरान से लेकर मॉस्को तक हड़कंप मचा दिया।  मिलिट्री एक्सपर्ट्स इसे द बोन कहते हैं। यह अमेरिकी वायुसेना का वो बम वर्ष है जो सबसे भारी बम ले जाने में सक्षम है। अब B1 लेंसर बमबर अमेरिका का सबसे घातक संदेश है ईरान के लिए। इसकी खासियतों की बात करें तो सबसे पहले नंबर पर आता है रफ्तार। यह आवाज की गति यानी सुपरसोनिक स्पीड से भी तेज उड़ान भर सकता है। दूसरी खासियत है मारक क्षमता। यह दो दर्जन 2000 पाउंड से भारी भरकम बम या दर्जन क्रूज मिसाइलें एक साथ दाग सकता है। तीसरी खासियत है यह बहुत कम ऊंचाई पर उड़कर रडार को चकमा देने में माहिर है। और यह सबसे बड़ी खासियत है इसकी। 

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अमेरिका ने इसे यूके के एयरबेस से उड़ाया है और सीधे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉप्स यानी आईआरजीसी के ठिकाने को उड़ाने का आदेश दे दिया है। यह हमला सिर्फ सैन्य हमला नहीं है बल्कि ईरान को एक सीधा अल्टीमेटम था कि अब अमेरिका रुकने वाला नहीं है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस मिशन की गंभीरता को समझते हुए बहुत नपे तुले शब्दों में जानकारी साझा की है पूरी दुनिया के सामने। हालांकि उन्होंने सीधे B1 का नाम तो नहीं लिया लेकिन जो तबाही हुई वो गवाही दे रही है कि यह हमला यह हमला B1 का है। अब चलिए जानते हैं कहां-कहां हुई तबाही। क्या-क्या अमेरिका ने बयान दिया है। तो अमेरिका के निशाने पर थे पहला है ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर। दूसरा है समंदर में हमला करने वाली बोट्स और नेवल कैपेबिलिटीज और तीसरा है ड्रोन स्टोरेज साइट्स। जहां से हुती और अन्य गुटों को ड्रोन की सप्लाई होती है। चौथा है लॉजिस्टिक हब और एयरक्राफ्ट हैंगर्स। मकसद साफ है हॉररमज स्टेट यानी स्टेट ऑफ हॉरमज में ईरान की दादागिरी को पूरी तरह खत्म करना। अमेरिका चाहता है कि ईरान जहाजों को निशाना बनाना बंद करे वरना उसका पूरा मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर खंडर बना दिया जाएगा। तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख इस बार पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक है। 

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डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है। साफ कर दिया है कि अगर अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो अमेरिका केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप ने साफ चेतावनी दे दी है कल की अगर फोरमज स्टेट में जहाजों पर हमले जारी रहेंगे तो अमेरिका तेहरान के पुलों, बिजली घरों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएगा। यानी कुल मिलाकर इसका मतलब समझिए अमेरिका अब टोटल वॉर की तरफ आगे निकल चुका है। अगर ईरान की बिजली काट दी गई और उसके पुल उड़ा दिए गए तो पूरे देश में सिविल वॉर जैसी स्थिति सिचुएशन पैदा हो जाएगी। ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। उसने पलटवार करते हुए धमकी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह खाड़ी देशों यानी गल्फ कंट्रीज के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाएंगे अपनी मिसाइलों से। यानी यह जंग अब केवल दो देशों की नहीं बल्कि पूरी खाड़ी देशों मिडिल ईस्ट को तबाह करने वाली आग बन सकती है। यही नहीं ईरान के इशारे पर यमन के हूं विद्रोहियों ने रेड सी में एक नया मोर्चा खोल दिया है। कल भारत तक पर हमने आपको खबर भी दिखाई थी कि उन्होंने सऊदी अरब के जहाजों पर हमला कर दिया है और बाप अलमदेव में नाकाबंदी का ऐलान कर दिया है। इसके डर से दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों ने अपने रास्ते बदल लिए हैं। जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महंगाई का एक नया खतरा मंडराने लगा है। एक तरफ बम बरस रहे हैं तो दूसरी तरफ क़तर और ओमान जैसे देश सुलह की कोशिशों में जुटे हैं। 

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