China Panda Diplomacy: अमेरिका को 2 पांडा गिफ्ट करेंगे जिनपिंग, दोनों बनेंगे दोस्ती के दूत, प्यारा सा दिखने वाला जानवर पिघलाएगा रिश्तों में जमी बर्फ

अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार लाने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पांडा डिप्लोमेसी के तहत अटलांटा चिड़ियाघर को दो विशाल पांडा उपहार में देने का ऐलान किया है। इन्हें दोस्ती के दूत के रूप में भेजा जा रहा है। तनाव के बीच चीन का यह कूटनीतिक कदम दोनों महाशक्तियों के आपसी रिश्तों में गर्मजोशी लाने की कोशिश है।
अमेरिका दौरे के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। शी जिनपिंग ने अमेरिकी जनता के लिए 'दोस्ती के दूत' (Envoy of Friendship) के रूप में दो विशाल पांडा उपहार में देने का ऐलान किया। शी जिनपिंग ने घोषणा करते हुए कहा दो पांडा, पिंग पिंग और फुचुआन, जल्द ही अटलांटा चिड़ियाघर पहुंचेंगे और अमेरिकी जनता से रूबरू होंगे। यह विशाल पांडा चीनी और अमेरिकी लोगों के बीच दोस्ती और आपसी विश्वास के सच्चे दूत साबित होंगे। तनावपूर्ण रिश्तों के बीच चीन का यह कदम एक बार फिर पुरानी पांडा डिप्लोमेसी को जीवित कर दोनों महाशक्तियों के बीच गर्मजोशी लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
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ये दो पांडा अटलांटा ज़ू को तोहफ़े में दिए जाएँगे
अप्रैल में चाइना वाइल्डलाइफ़ कंजर्वेशन एसोसिएशन और अटलांटा ज़ू के बीच हुए नए रिसर्च एग्रीमेंट के तहत ये दो पांडा अटलांटा ज़ू को तोहफ़े में दिए जाएँगे। इस एग्रीमेंट के तहत, CWCA चेंगदू रिसर्च बेस ऑफ़ जाइंट पांडा ब्रीडिंग से नर पांडा पिंग पिंग और मादा पांडा फू शुआंग को भेजेगा। हालाँकि, पिंग पिंग और फू शुआंग अटलांटा कब पहुँचेंगे, यह अभी पता नहीं है।
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क्या है पांडा डिप्लोमेसी
पांडा दक्षिण मध्य चीन में पाया जाने वाला भालू प्रजाति का एक जानवर है ये तो आप सभी जानते हैं। ये पांडा चूकिं चीन में ही पाया जाता है। इसलिए चीन के राष्ट्र की पहचान भी कहा जाता है। जिन देशों के साथ चीन के अच्छे संबंध होते हैं। अथवा जिन देशों के साथ चीन अपने संबंधों को सुधारना चाहता है तो उसे उपाहार के तौर पर पांडा ही भेंट करता है। इससे पता चलता है कि चीन इन देशों के साथ अपने संबंध को महत्ता दे रहा है। इसे ही चीन की पांडा कूटनीति कहते हैं। चीन ने 1957 में यूएसएसआर को अपना पहला पांडा पिंग पिंग गिफ्ट के तौर पर दिया था।
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निक्सन और माओ की मुलाकात और गिफ्ट में 2 पांडा
1972 में जब अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन पहली बार अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर चीन गए थे तो चीन ने उन्हें दो पांडे ही भेंट किए थे। इस यात्रा के बाद से ही चीन और अमेरिका के संबंधों में सुधार हुआ था। इसी के चलते चीन ने ब्रिटेन, जापान और अन्य देशों को भी पांडा भेंट किया था। ताकी इन देशों के साथ उसके संबंध आगे मजबूत हो सके। चीन के बारे में कहा जाता है कि वो हर चीज में कारोबार और मुनाफा देखता है। दुनिया के कई देशों को चीन ने उनके चिड़ियाघरों में रखने के लिए लोन पर पांडा दिए हैं और इसे दोस्ती का नाम दिया।
पांडा के बदले 1 मिलियम की राशि देनी पड़ती है
1972 में जब निक्सन और माओ की मुलाकात के बाद पांडा डिप्लोमेसी शुरू हुई तो न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसे नम्रता से लड़ी जाने वाली जंग यानी पोलाइट वॉरफेयर कहा था। चीन ये जानवर अमेरिका और दूसरे देशों को सालान किराए पर देता है। चीन ने साल 1941 से लेकर 1984 तक दूसरे देशों को पांडा गिफ्ट किए। लेकिन 1984 के बाद इस नीति में बदलाव करते हुए वो दूसरे देशों में आने वाले पांडा पर ट्रैक्स लगाना शुरू कर दिया। चीन जिन देशों को पांडा देता है उन्हें हर साल चीन को 1 पांडा के बदले 1 मिलियम की राशि देनी पड़ती है। संरक्षण परियोजनाओं की तरफ से दिए जाते हैं।
मीटिंग के दौरान ट्रंप और जिनपिंग ने ये बातें कहीं
दिन में हुई मीटिंग के दौरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन के रिश्ते पहले से कहीं बेहतर हैं। उन्होंने अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ दोनों देशों के आपसी संबंधों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि दोनों देश मिलकर ऐसे रिश्ते बना सकते हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए खुशहाली और सुरक्षा को बढ़ावा दें। अपनी बात रखते हुए शी ने कहा कि चीन-अमेरिका संबंध एक और ऐतिहासिक मोड़ पर आ गए हैं। उन्होंने कहा आज राष्ट्रपति ट्रंप और मैंने ईमानदारी और गहराई से बातचीत की और कई मुद्दों पर आम सहमति बनाई। इससे रणनीतिक स्थिरता वाले चीन-अमेरिका के रचनात्मक संबंधों को नई मजबूती मिली है और चीन-अमेरिका संबंधों को नई रणनीतिक दिशा मिली है। ट्रंप और शी ने अमेरिका और चीन के बीच ऐतिहासिक संबंधों का ज़िक्र किया। ट्रंप ने 158 साल पहले बोस्टन में आए पहले चीनी राजनयिकों की यात्रा को याद किया। इसके जवाब में शी ने जॉर्ज वॉशिंगटन के पास मौजूद चीनी पोर्सिलेन (चीनी मिट्टी के बर्तनों) के बड़े संग्रह और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान दोनों देशों के बीच हुए सहयोग को याद किया।
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