दाऊद और छोटा राजन के दोस्ती-दुश्मनी की पूरी कहानी

दाऊद और छोटा राजन के दोस्ती-दुश्मनी की पूरी कहानी

एक समय ऐसा भी आया जब राजन को दाऊद का सबसे खास सिपहसालार माना जाने लगा था। लेकिन 1988 खत्म होते-होते इस दाऊद गैंग में एंट्री होती है शकील अहमद उर्फ छोटा शकील की। ये शख्स भी अपने करतूतों की वजह से दाऊद की गुड बुक्स में आ गया।

एक तस्वीर देखिए। इस तस्वीर में तीन लोग नजर आ रहे हैं। इंदिरा गांधी, कवि ह्रदयनाथ चट्टोपाध्याय और तीसरा शख्स है अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला। जिसका नाम शिवसेना के संजय राउत ने इंदिरा गांधी के साथ लिया। इंदिरा और करीम लाला को लेकर शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत के बयान पर खूब बवाल मचा। कांग्रेस ने इसे इंदिरा गांधी का अपमान बताया तो भाजपा ने सवाल उठाए कि आखिर अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला और कांग्रेस के बीच क्या संबंध थे? हालात भांप कर संजय राउत ने माफी मांगने में ही भलाई समझी। बहरहाल, मायानगरी मुंबई और अंडरवर्ल्ड के बीच गहरा नाता रहा है। यहां करीम लाला से लेकर दाऊद इब्राहिम तक का सिक्का चला। यूं तो 70 के दशक में अंडरवर्ल्ड चर्चा में आया था, लेकिन 1993 में मुंबई में हुए बम धमाकों के बाद से लेकर अब तक के दो दशक में अंडरवर्ल्‍ड का चेहरा काफी बदल गया है। तो आइए आज मुंबई की उसी नगरी में आपको लिए चलते हैं जहां कभी दाऊद इब्राहिम और छोटा राजन का सिक्का राज हुआ करता था। 

कहा जाता है कि जिस वक्त अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पैदा नहीं हुआ था उस वक्त करीम लाला मुंबई पर राजा करता था। 

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पुलिस कॉन्‍स्‍टेबल का बेटा दाऊद गैंगवार को देखते हुए बड़ा हुआ था। पिता के नाम का फायदा उठाते हुए दाउद ने छोटी-मोटी वसूली के रूप में अंडरवर्ल्‍ड की ओर कदम बढ़ाए थे। जल्‍द ही वह करीम लाला के गैंग से जुड़ गया। लाला के बड़े बेटे की मौत के बाद दाऊद इब्राहिम ने उसका धंधा संभाला और डी-कंपनी नाम से अपनी नई गैंग बनाई। दाऊद इब्राहिम ने मुंबई अंडरवर्ल्‍ड का नया नक्‍शा भी खींचा था। वह अपने दुश्‍मनों को कभी नहीं छोड़ता था और अनबन होने पर अपने करीबी को मारने से भी नहीं चूकता था। कहा जाता है कि करीम ने दाऊद इब्राहिम को मुंबई की सड़कों पर गिरा-गिराकर पीटा था। यही नहीं उसने 1981 में दाऊद के भाई शब्बीर को मरवा दिया था। 

मुंबई पुलिस की फाइलों में एक और नाम तेजी से आगे बढ़ रहा था। वो जो कभी ‘नाना’ तो कभी ‘छोटा राजन’ के नाम से जाना जाता। अपने अपराधों के बहीखाते में सिनेमा टिकट ब्लैक करने का पहला वर्किंग एक्सपीरियंस छोटा राजन ने महज 10 साल की उम्र में ही दर्ज करा लिया था। 1960 में पैदा हुआ राजेंद्र सदाशिव निखलजे 1970 में हिन्दुस्तान की आर्थिक राजधानी में टिकटें ब्लैक कर रहा था। इसी दौरान छोटा राजन की मुलाकात राजन नायर ऊर्फ अन्ना राजन से हुई। वह उसके गैंग में शामिल हो गया। राजेंद्र सदाशिव निखलजे को ‘छोटा’ विशेषण ‘बड़ा’ राजन अन्ना ने ही दिया। 

बड़ा राजन की मौत के बाद छोटा राजन ने पूरे गैंग की कमान संभाल ली। इसी दौरान अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से इसका संबंध बन गया। दोनों एक साथ मिलकर मुंबई में वसूली, हत्या, तस्करी और फिल्म फाइनेंस का काम करने लगे। छोटा राजन का नाम अंडरवर्ल्‍ड में पहली बार तब सुनाई दिया था, जब उसने क्रिकेट स्‍टेडियम में गैंगस्‍टर अब्‍दुल कुंजू को मौत के घाट उतारा था। कुंजू ने छोटा राजन के सरपरस्‍त बड़ा राजन की हत्‍या की थी। छोटा राजन के कारनामे से दाऊद काफी प्रभावित था और उसने उसे अपनी गैंग का हिस्‍सा बना लिया था।

एक समय ऐसा भी आया जब राजन को दाऊद का सबसे खास सिपहसालार माना जाने लगा था। लेकिन 1988 खत्म होते-होते इस दाऊद गैंग में एंट्री होती है शकील अहमद उर्फ छोटा शकील की। ये शख्स भी अपने करतूतों की वजह से दाऊद की गुड बुक्स में आ गया। अब दाऊद के पास छोटा शकील और छोटा राजन दो ऐसे मोहरे थे जिस पर वह दांव लगाता। जल्द ही इन दोनों के बीच डॉन दाऊद के सामने बेस्ट साबित करने की होड़ लगने लगी। यहीं से राजन और दाऊद के बीच तल्‍खी की नींव पड़ी थी।

दाऊद इब्राहिम ने अंडरवर्ल्‍ड को मैच फिक्सिंग, बॉलीवुड, उगाही, स्‍मगलिंग तथा रियल एस्‍टेट की दुनिया में स्‍थापित किया। 1993 में मुंबई में हुए सिलसिलेवार धमाके के बाद वह देश का सबसे बड़ा आतंकी तथा मोस्‍ट वांटेड अपराधी बन चुका था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि वह पाकिस्‍तान में रहकर अपने कारनामों को अंजाम दे रहा है। 

1988 में वह दुबई चला गया। इसके बाद दाऊद और राजन मिलकर भारत ही नहीं पूरी दुनिया में गैर-कानूनी काम करने लगे। मुंबई में उनकी तूती बोलने लगी। लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा हुआ, जिसने उनको अलग कर दिया।

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क्यों हुई दाऊद से दुश्मनी

तभी होता है कुछ ऐसा कि जिसने दाउद और छोटा राजन के बीच की राहे जुदा होने की नींव रख दी। 26 जुलाई 1992 को गवली के गुर्गों ने दाऊद के जीजा इब्राहिम पारकर की हत्या कर दी। इब्राहिम पारकर दाऊद की बहन हसीना का शौहर था। इस घटना से दाऊद काफी दुखी था। उसके तुरंत बदला चाहिए था। गैंग में नंबर दो होने की वजह से छोटा राजन की जिम्मेदारी थी कि वह अपने बॉस के जीजा के हत्यारों को सबक सिखाए। दाऊद पर किताब लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरिगोविंद विश्वकर्मा के मुताबिक छोटा राजन ने अपने आदमियों को कहा कि शूटर शैलेश हल्दनकर और बिपिन शेरे को जल्द ठिकाना लगाया जाए। ये दोनों जेजे अस्पताल में जख्मी हालत में भर्ती थे। छोटा राजन ने दाऊद को बताया कि वह पारकर भाई के हत्यारों का बदला लेने को तैयार है। लेकिन वे अस्पताल में संगीनों के साये में हैं, जिससे शूटर वहां पहुंच नहीं पा रहे। अस्पताल से बाहर निकलते ही उन्हें मौत दी जाएगी। इस मौके को भांपकर छोटा शकील दाऊद के पास गया और कहा कि छोटा राजन बदला लेने पर सीरियस नहीं है। इस बार उसे एक मौका दिया जाए। बहनोई की हत्या का बदला लेने के गुस्से में जल रहा दाऊद ने छोटा राजन से बिना पूछे ही कह दिया Go Ahead। वो दिन था 12 नवंबर 1992 का। 24 खतरनाक शूटर मुंबई के जेजे अस्पताल में पूरी सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर अंदर दाखिल होते हैं और शैलेश हल्दनकर को भूनकर रख दिया। इस हमले में 500 राउंड गोलियां चलीं और दो पुलिसवाले शहीद हो गए। इस घटना के बाद छोटा राजन बैकफुट पर था। वह चुप रह गया। ये एक ऐसा कांड था जिसने छोटा राजन को हिलाकर रख दिया। छोटा राजन समझ गया कि दाऊद के रास्ते अलग होते जा रहे हैं। बाबरी कांड के बाद 1993 में मुंबई बम ब्लास्ट ने राजन को दहला दिया। जब उसे पता चला कि इस कांड में दाऊद का हाथ है, तो वह उसका दु्श्मन बन बैठा। उसने खुद को दाऊद से अलग करके नया गैंग बना लिया। दोनों एक-दूसरे के जानी-दुश्मन बन बैठे। राजन ने खुद को दाऊद से अलग कर लिया और देशभक्‍त डॉन होने की डींगें भरने लगा। इस दौरान दोनों एक-दूसरे को मारने का प्लान बनाते रहे। दाऊद ने छोटा राजन पर कई बार जानलेवा हमला करवाया, लेकिन वह बचता रहा। राजन पर हमले की बड़ी साजिश दुबई में दाऊद के खास शूटर शरद शेट्टी के घर में रची गई, साल 2000 में पिज्जा डिलीवरी ब्वॉय बनकर आए दाऊद के लोगों ने बैंकॉक के एक होटल में राजन पर हमला कर दिया। छोटा राजन पर कई राउंड फायरिंग की गई, लेकिन वह वहां से बचकर भाग निकला। कहा जाता है कि छोटा राजन को बचाने में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का भी हाथ था। हालांकि, खुद राजन इस बात से इंकार करता है। बैंकॉक में हुए हमले का उसने बदला लिया। उसका हवाला कारोबार संभालने वाले उसके भाई रवि और विमल ने 2003 में दुबई के एक क्लब में छोटा शकील के खास शरद शेट्टी की हत्या कर दी थी। छोटा राजन को 25 अक्टूबर, 2015 को इंडोनेशिया के बाली शहर से गिरफ्तार किया गया था। पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत ने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन को सात साल की सजा सुनाई है।

लेकिन आज से करीब 15 साल पहले दाउद इब्राहिम की कहानी हमेशा-हमेशा के लिए खत्म हो जाती। 23 जुलाई 2005, ये वो तारीख थी जो दाऊद की मौत के लिए तय की गई थी। ये वो तारीख थी जब दाऊद की बेटी का वलीमा यानी रिसेप्शन था। दाऊद को दुबई के उसी होटल में मारा जाना था जहां रिसेप्शन था। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसी का ये पूरा आपरेशन मुंबई पुलिस की एक जरा सी गलती ने नाकाम बना दिया। ये खुलासा आरके सिंह ने किया जो उस वक्त देश के गृह सचिव थे। दाऊद की बेटी मारूख शेख का निकाह पाकिस्तान के क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनैद से मक्का में हुआ था। निकाह की खबर बेहद गोपनीय रखी गई थी। बस गिनती के लोगों को इसकी खबर थी। 1993 के सिरियल ब्लास्ट के बाद दाउद लगातार दुबई और पाकिस्तान के बीच ही घूम रहा था। लेकिन 2000 के मध्य में संयुक्त राष्ट्र ने जैसे ही दाऊद को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया, पाकिस्तान पर चौतरफा दबाव पड़ने लगा। इसी के बाद से दाऊद के मूवमेंट को लेकर बेहद गोपनीयता बरती जाने लगी थी। मक्का में दाउद की बेटी के निकाह की खबर दिल्ली तक पहुंच गई थी। सारी एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे। मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तब बस पांच महीने पहले ही जनवरी 2004 में आईबी यानी खुफिया ब्यूरो के निदेशक पद से रिटायर हुए थे। निकाह के बाद दावत ए वलीमा यानी रिसेप्शन की बारी थी। मियांदाद और दाऊद रिसेप्शन करांची में ही करना चाहते थे। पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने इसकी मंजूरी नहीं दी। लिहाजा ये तय हुआ कि दुबई के होटल ग्रैंड हयात में रिसेप्शन 23 जुलाई को होगा। इस बात की खबर पहली बार भारतीय एजेंसियों को लगी थी कि दाऊद किस तारीख को किस दिन कितने बजे कहां होगा। आईबी को पता था कि दाउद को मारने का इससे बेहतर अवसर नहीं मिलेगा। इसी के बाद आपरेशन दाऊद पर भारत सरकार द्वारा छोटा राजन गैंग के गुर्गों को महाराष्ट्र के बाहर किसी खुफिया जगह पर ट्रेनिंग दी जा रही थी। तभी मुंबई पुलिस के अधिकारी ट्रेनिंग स्पॉट पर अरेस्ट वॉरंट के साथ आए थे और यह खुफिया ऑपरेशन अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सका था। मुंबई पुलिस के ये अधिकारी दाऊद के साथ संपर्क में थे। और इस तरह दाऊद को मारने का मिशन फेल हो गया था। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में देश के पूर्व गृह सचिव और बीजेपी नेता आरके सिंह ने इसका खुलासा किया था।

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भारत के मोस्ट-वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम के बारे में कभी खबर आती है कि वो पाकिस्तान में है तो कभी कहीं और साथ ही ये भी कहा जाता है कि उसकी हालत गंभीर है। कुछ मीडिया खबरों के मुताबित करीब दाऊद को कराची के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। ब्रेन सर्जरी के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है। कुछ खबरों में बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है। सारी खबरें अपुष्ट सूत्रों के हवाले से आ रही हैं। लेकिन वास्तविकत यही है कि हजारों मासूमों का कातिल और मोस्ट वांटेड अपराधी दाऊद आज भी भारत की पहु्ंच से दूर है।

- अभिनय आकाश






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