पैसे की बचत, जिंदगी पर आफत? Electric Scooters में क्यों लग रही आग?

पैसे की बचत, जिंदगी पर आफत? Electric Scooters में क्यों लग रही आग?
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सरकार की तरफ से ईवी गाड़ियों ईवी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन एक के बाद एक इलेक्ट्रिक स्कूटर से जुड़ी घटनाएं सामने आ रही है। जिसके बाद से लोगों में इसको लेकर डर और आशंकाएं बढ़ रही हैं।

देश में लगातार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी परेशान है। 100 रुपये देने के बाद भी एक लीटर पेट्रोल नहीं मिल पाता है। ऐसे में अगर जरूरतों के लिए भी केवल गाड़ियों को इस्तेमाल में लाया जाए तो भी ये बेहद खर्चीला साबित हो रहा है। तभी बचत का सबसे कारगर तरीका इलेक्ट्रिक व्हीकल के रूप में सामने आया। इलेक्ट्रिक वाहन पर पेट्रोल के मुकाबले कई गुना तक बचत की जा सकती है। सरकार की तरफ से ईवी गाड़ियों ईवी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, लेकिन एक के बाद एक इलेक्ट्रिक स्कूटर से जुड़ी घटनाएं सामने आ रही है। जिसके बाद से लोगों में इसको लेकर डर और आशंकाएं बढ़ रही हैं। हालांकि सरकार की तरफ से लापरवाही बरतने वाली इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी गई है। इसके अलावा ऐसी घटनाएं न हो इसके लिए सरकार की तरफ से सख्त प्लान भी बनाया जा रहा है। 

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विजयवाड़ा में चार्जिंग के दौरान बड़ा हादसा

ईवी हादसे का ताजा मामला आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से सामने आया है। आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में तड़के एक इलेक्ट्रिक बाइक की बैटरी फटने से एक 40 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। इलेक्ट्रिक बाइक की बैटरी फटने से शख्स के बेडरूम में आग लग गई, इस दौरान उस शख्स की पत्नी भी आग में झुलस गई। पुलिस ने बताया कि महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। ई-बाइक की बैटरी में विस्फोट के बाद कमरे में आग लग गई, जिससे एयर-कंडीशनिंग मशीन और कुछ घरेलू सामान जल कर खाक हो गए। घर से धुंआ उठता देख पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़ा और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला। एम्बुलेंस में अस्पताल ले जाने के दौरान शिवकुमार की मौत हो गई। इस ब्लास्ट में उनके दो बच्चे भी घायल हुए हैं जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने बताया कि आग में झुलस गई शिवकुमार की पत्नी को इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां महिला को 48 घंटे की निगरानी में रखा गया है। शिवकुमार के दोनों बच्चे भी कमरे में आग लगने से झुलस गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “विस्फोट के सही कारणों की जानकारी नहीं मिल पाई है। दमकलकर्मियों ने भी कारण का पता लगाने की कोशिश की। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हमने ईवी कंपनी से इस बात की जांच करने के लिए बात की है कि क्या बैटरी विस्फोट का कारण शॉर्ट सर्किट हो सकता है।” इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच की जा रही है।

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पहले भी हो चुके हैं कई हादसे

बता दें कि इस हादसे के तीन दिन पहले तेलंगाना के निजामाबाद में एक इलेक्ट्रिक गाड़ी की बैट्री फटने से एक 80 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई थी। ये दो घटनाएं तो तेलगूभाषी राज्यों की हैं। लेकिन । इलेक्ट्रिक वाहनों में आग या धमाके की खबरें महाराष्ट्र और तमिलनाडु से भी आ रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों में ओला इलेक्ट्रिक, ओकिनावा, प्योर ईवी और जितेंद्र ईवी द्वारा निर्मित सहित एक दर्जन से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई है। पिछले महीने, वेल्लोर में एक ओकिनावा स्कूटर में आग लग गई, जिसमें एक व्यक्ति और उसकी 13 वर्षीय बेटी की जान चली गई। इस महीने की शुरुआत में नासिक में फैक्ट्री से ले जाते समय जितेंद्र ईवी द्वारा बनाए गए 20 से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लग गई थी। तेलंगाना के निजामाबाद में प्योर ईवी द्वारा बनाए गए एक इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी फटने से एक 80 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। इन हादसों के मद्देनजर नीति आयोग ने हाल ही बैट्ररी स्वापिंग पॉलिसी ड्राफ्ट करने की बात कही थी। जिसमें स्वाप्बेल बैट्री से जुड़े इंसेंटिव और उसके कड़े टेस्टिंग प्रोटोकॉल से जुड़े नियम शामिल होंगे। 

ईवी कंपनियों पर सख्त हुए गडकरी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट कर कहा था कि ‘पिछले 2 महीने के दौरान इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें लोगों की मौत के साथ ही घायल होने की खबर आई है। यह दुखद है। हमने एक एक्सपर्ट कमिटी बनाई है, जो इस मसले की छानबीन करेगी और इसमें सुधार से जुड़ीं बातों से हमें अवगत कराएगी। रिपोर्ट में जिन कंपनियों की लापरवाही सामने आएगी उनके ऊपर पेनल्टी लगाई जाएगी। इसके साथ ही उन्हें सभी डिफेक्टिव इलेक्ट्रिक वाहनों को वापस लेना पड़ेगा। गडकरी ने कहा था कि जो भी कंपनियां गुणवत्ता पर खड़ी नहीं उतर रही है, वह अपने डिफेक्टिव बैच को तत्काल रिकॉल कर सकती है।

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ओला इलेक्ट्रिक ने 1,400 से अधिक स्कूटर क्यों वापस मंगवाए हैं

ओला इलेक्ट्रिक ने कहा है कि वह दोपहिया वाहनों में आग लगने की दर्जनों घटनाओं के मद्देनजर अपने 1,400 से अधिक इलेक्ट्रिक स्कूटरों को वापस बुला रही है, जिसमें अब तक कम से कम चार लोग मारे गए हैं। यह कदम केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा ईवी निर्माताओं को अपने वाहनों के सभी दोषपूर्ण बैचों को तुरंत वापस बुलाने के लिए "अग्रिम कार्रवाई" करने के लिए कहने के बाद आया। ओला इलेक्ट्रिक एक विशिष्ट बैच के 1,441 स्कूटरों को वापस बुला रही है, जिनमें से एक पिछले महीने पुणे के एक व्यस्त इलाके में सड़क के किनारे पार्क करते समय आग की लपटों में घिर गया था। कंपनी ने कहा कि घटना की संभावना "पृथक" थी। पुणे में 26 मार्च को वाहन में आग लगने की घटना की हमारी आंतरिक जांच जारी है और प्रारंभिक आकलन से पता चलता है कि थर्मल घटना एक अलग घटना थी। इसके अलावा अन्य कंपनियों ने कहा है कि वे आग के संभावित कारणों की जांच कर रही हैं। प्योर ईवी ने 2,000 इलेक्ट्रिक स्कूटरों को वापस बुलाने की पहल की है; ओकिनावा ने घोषणा की है कि वह संभावित सुरक्षा मुद्दों की जांच के लिए 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को वापस बुला रहा है।

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अमेरिकी जांच में क्या पाया गया

अमेरिका में जब इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही थीं तब वहां इसकी जांच करवाई गई। इस जांच में ये पाया गया कि इलेक्ट्रिक वाहनों में लिथियम ऑयन बैट्री का इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से ये बैट्री ज्यादा तापनाम में गर्म होकर आग पकड़ लेती है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में आग लगने के पीछे वाइब्रेसन को भी एक बहुत बड़ा कारण माना गया था। इसमें बताया गया कि वाहन के चलते समय बैट्री ज्यादा वाइब्रेट करती है तो इससे भी आग लग सकती है। इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग के दौरान कोई खामी रह जाए तो भी ऐसी दुर्घटनाएं संभव हैं।

 बैटरी में आग लगने की क्या है वजह?

ईवी में इस्तेमाल होने वाली सभी बैटरी प्लास्टिक कैबिनेट के साथ आ रही है। ऐसे में इसके गरम होने की सूरत में प्लास्टिक पिघल जाती है। जिससे इसमें लगे सर्किट भी पिघलने लगते हैं। जिससे आग लगने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

अधिकतर बैट्री लिथियम ऑयन बेस्ट होती है। जिससे हीट ज्यादा निकलती है। बैटरी ऑपरेटर की तरफ से हीट सिंक का कम ही इस्तेमाल किया जाता है। इसका बड़ा कारण बैटरी का स्वेपैबल होना भी है। हीट सिंक से बैट्री का वजन बढ़ जाता है। इसलिए इसे हल्का रखने के लिए ही ऐसा किया जाता है। 

चार्जिग स्टेशन के दौरान गाड़ियों में आग लगने की बड़ी वजह शार्ट सर्किट होना है।  ये करंट इतना हैवी होता है कि अगर बैटरी का जॉइंट टाइट नहीं होते हैं तो उसमें शॉर्ट सर्किट की संभावना बढ़ जाती है। 

बैटरी बनाने वाले ज्यादातर मैन्युफैक्चरर चाइनीज और ताइवानी है। ऐसे में बैट्री का वजन और कीमत कम करने की वजह से उसमें हीट सिंक का अच्छी तरह से इस्तेमाल नहीं किया जाता है। 

सुधार की जरूरत 

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या करीब 10 लाख 76 हजार है। जबकि भारत में पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की संख्या 1742 है। हालांकि एक अनुमान के मुताबिक वर्ष 2026 तक भारत को चार लाख चार्जिंग स्टेशन की जरूरत पड़ेगी और 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों की इंडस्ट्री 11 लाख करोड़ रुपये की हो जाएगी। यानी आज की तुलना में ये उद्योग 90 गुणा बड़ा हो जाएगा। इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत के लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना चाहते हैं लेकिन ईवी कंपनियों को भी ये समझना होगा कि अगर वो इस टेक्नोलाजी को सुरक्षित नहीं बनाएंगी तो लोग इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से डरने लगेंगे। क्योंकि पैसा तो किसी और भी तरीके से बचाया जा सकता है लेकिन जान नहीं बचाई जा सकती है। इसलिए इस टेक्नोलाजी का सुरक्षित होना जरूरी है। 

-अभिनय आकाश 






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