अयोध्या का नया अध्याय खोलने को AIMPLB तैयार, दायर करेगा रिव्यू पिटीशन

अयोध्या का नया अध्याय खोलने को AIMPLB तैयार, दायर करेगा रिव्यू पिटीशन

जिलानी के अनुसार कोर्ट द्वारा मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन दूसरी जगह लेने वाला प्रस्ताव शरीयत के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट मस्जिद की जमीन को नहीं बदल सकता है। अनुच्छेद 142 के मुताबिक वह किसी संस्थान के खिलाफ नहीं जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई वर्षों से चले आ रहे राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर आए फैसले के बाद लग रहा था कि ये मामला अब खत्म हो गया है। लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) अयोध्या का नया अध्याय खोलने की तैयारी में है। एआईएमपीएलबी अयोध्या फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। जफरयाब जिलानी के अनसार इसके लिए दिसंबर का महीना चुना गया है जिसमें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली जाएगी। जिलानी के अनुसार कोर्ट द्वारा मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन दूसरी जगह लेने वाला प्रस्ताव शरीयत के खिलाफ है। सुप्रीम कोर्ट मस्जिद की जमीन को नहीं बदल सकता है। अनुच्छेद 142 के मुताबिक वह किसी संस्थान के खिलाफ नहीं जा सकता।

बता दें कि बीते दिनों अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अयोध्या मामले पर पुनर्विचार अर्जी नहीं दाखिल करने का निर्णय लिया था। सुन्नी वक्फ बोर्ड के सात में से छह सदस्यों ने याचिका देने के खिलाफत की जबकि एक सदस्य ने याचिका देने की बात कही। बता दें कि अयोध्या पर सुप्रीम फैसले के बाद लगातार पुनर्विचार की मांग को लेकर मुस्लिम पक्ष में संशय बना हुआ था। एक तरफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से पुनर्विचार दाखिल किए जाने की बात कही जा रही थी तो वहीं सुन्नी वक्फ बोर्ड पर राय बंटी हुई नजर आ रही थी। जिसके बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड की लखनऊ में बैठक में अयोध्या मामले पर पुनर्विचार नहीं दाखिल करने का फैसला लिया गया। 





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