H5N1 संक्रमण की पुष्टि के बाद वंडलूर का Arignar Anna प्राणी उद्यान दर्शकों के लिए बंद

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चेन्नई के पास स्थित वंडलूर चिड़ियाघर में जलपक्षियों के बीच बर्ड फ्लू संक्रमण सामने आने पर प्रशासन ने दो दिन के लिए आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। भोपाल स्थित एनआईएचएसएडी की जांच रिपोर्ट में एवियन इन्फ्लूएंजा की पुष्टि हुई थी। परिसर में कीटाणुशोधन और व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है।

भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान (एनआईएचएसएडी) द्वारा जलपक्षियों में एच5एन1 एवियन इन्फ्लूएंजा संक्रमण की पुष्टि किए जाने के बाद वंडलूर स्थित अरिग्नार अन्ना प्राणी उद्यान ने एहतियातन बृहस्पतिवार से दो दिन तक आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि एनआईएचएसएडी ने 21 अक्टूबर 2026 को जलपक्षियों में एच5एन1 संक्रमण की पुष्टि की थी। इसके बाद एहतियाती कदम के तौर पर 22 और 23 अक्टूबर को चिड़ियाघर में आगंतुकों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार, संक्रमण की रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं। इनमें कीटाणुशोधन, साफ-सफाई और जैव सुरक्षा संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करना शामिल है। अरिग्नार अन्ना प्राणी उद्यान के निदेशक की ओर से बुधवार को जारी बयान में कहा गया, नौ अक्टूबर 2026 के बाद से पक्षियों की मौत या उनके बीमार होने की कोई और घटना सामने नहीं आई है।

इस अस्थायी कदम का उद्देश्य व्यापक स्तर पर साफ-सफाई करना, जैव सुरक्षा उपायों को मजबूत करना और स्थिति पर करीबी नजर रखना है। आम लोगों से एहतियाती उपायों में सहयोग करने का अनुरोध किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, चिड़ियाघर के सबसे बड़े वेदांथंगल पक्षी बाड़े में तीन से नौ अक्टूबर के बीच सात जलपक्षियों की मौत हो गई थी।

इनमें चार पेंटेड स्टॉर्क , एक ग्रे पेलिकन , एक ग्रे हेरॉन और एक ओरिएंटल डार्टर शामिल थे। राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान ने नमूनों की जांच के बाद एच5एन1 संक्रमण की पुष्टि की थी। अधिकारियों का मानना है कि अब तक स्थिति स्थिर रहने के कारण संक्रमण का तत्काल प्रकोप संभवतः समाप्त हो चुका है।

हालांकि, दो दिन की अस्थायी बंदी के दौरान व्यापक स्तर पर साफ-सफाई और कीटाणुशोधन किया जा रहा है। पहले पक्षी की मौत के बाद ही संबंधित क्षेत्र को घेरकर अलग कर दिया गया था। चिड़ियाघर प्रशासन ने शेष पशु-पक्षियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जैव सुरक्षा उपाय भी तेज कर दिए हैं।

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