BJP में शामिल हुए Bhupen Borah, कांग्रेस छोड़ते हुए बताई 'अंदर की कहानी'

Bhupen Borah
ANI
एकता । Feb 22 2026 12:15PM

असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा, रकीबुल हुसैन के साथ आंतरिक खींचतान का हवाला देते हुए बीजेपी में शामिल हो गए हैं, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। 32 वर्षों के अनुभवी नेता का यह कदम कांग्रेस के लिए एक बड़ा संगठनात्मक झटका है, खासकर जब उनके नेतृत्व में पार्टी ने लोकसभा में सीटें जीती थीं।

असम की राजनीति में रविवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोरा ने आधिकारिक तौर पर बीजेपी जॉइन कर ली। गुवाहाटी में असम बीजेपी चीफ दिलीप सैकिया की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली। उनके साथ संजू बरुआ और सर्बनारायण देवरी जैसे युवा कांग्रेस नेता भी बीजेपी में शामिल हुए हैं।

कौन हैं भूपेन बोरा?

भूपेन बोरा एक अनुभवी नेता हैं, जो पिछले 32 सालों से कांग्रेस से जुड़े हुए थे। उनके करियर की कुछ मुख्य बातें, वे 2006 से 2016 तक बिहपुरिया से विधायक रहे। वे 2021 से 2024 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। तरुण गोगोई की सरकार में वे सरकार के प्रवक्ता और पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी भी रहे।

उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी में यूनियन के जनरल सेक्रेटरी भी रहे। दिलचस्प बात यह है कि केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और भूपेन बोरा एक ही यूनिवर्सिटी में साथ पढ़ते थे।

इसे भी पढ़ें: Delhi On High Alert । लश्कर की धमकी के बाद दिल्ली में किलेबंदी, भीड़भाड़ वाले इलाकों में Security सख्त

कांग्रेस छोड़ने की बड़ी वजह

भूपेन बोरा ने पार्टी छोड़ने के पीछे कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन को एक बड़ी वजह बताया है। बोरा का आरोप है कि असम में कांग्रेस की असली कमान रकीबुल हुसैन के हाथों में है, जबकि स्टेट यूनिट चीफ गौरव गोगोई सिर्फ नाम के पद पर हैं। बोरा का कहना है कि पार्टी के भीतर इसी खींचतान की वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। रकीबुल हुसैन ने अभी इन आरोपों का सीधा जवाब नहीं दिया है।

इसे भी पढ़ें: Gurugram Horror । शादी के जिक्र पर भड़का आशिक, सैनिटाइजर डालकर Live-in Partner के प्राइवेट पार्ट में लगाई आग

कांग्रेस के लिए अहम थे

भूपेन बोरा कांग्रेस के एक मजबूत सांगठनिक नेता माने जाते थे। उन्होंने छात्र संगठन एनएसयूआई से लेकर यूथ कांग्रेस और फिर स्टेट कांग्रेस तक का सफर तय किया। वे एआईसीसी के सचिव भी रहे और असम के साथ-साथ उत्तर-पूर्व के अन्य राज्यों में भी पार्टी को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में ही पिछले साल कांग्रेस ने असम में तीन लोकसभा सीटें जीती थीं। अब चुनाव से ठीक पहले उनका बीजेपी में जाना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़