Kolkata के Rabindra Sarobar में 6 साल बाद Chhath Puja की तैयारी, सरकार देगी सशर्त छूट

Kolkata के Rabindra Sarobar में 6 साल बाद Chhath Puja की तैयारी, सरकार देगी सशर्त छूट
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पश्चिम बंगाल सरकार प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त उपायों के साथ इस वर्ष दक्षिण कोलकाता के रवींद्र सरोवर में छठ पूजा की अनुमति देने पर विचार कर रही है। राज्य की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बुधवार को कहा कि स्थानीय श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नियमों के तहत रास्ता निकाला जा सकता है। वर्ष 2020 से एनजीटी के आदेश के तहत झील में पूजा सामग्री और विसर्जन पर पाबंदी लागू है।

कोलकाता, चार नवंबर पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार इस साल रवींद्र सरोवर में छठ पूजा की अनुमति देने को तैयार है, बशर्ते प्रदूषण रोकने के लिए पर्याप्त एहतियाती उपाय किए जाएं। यदि ऐसा होता है, तो दक्षिण कोलकाता की इस झील में छह साल बाद छठ पूजा की अनुमति मिलेगी। यहां 2020 से ही कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) ने प्रतिबंध सख्ती से लागू कर रखा है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश पर लगाए गए प्रतिबंध का पालन करने के लिए रवींद्र सरोवर में छठ पूजा पर रोक लगी हुई है। इस प्रतिबंध को कलकत्ता उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा था। इन पाबंदियों का उद्देश्य दक्षिण कोलकाता की इस झील के पारिस्थितिक तंत्र को प्रदूषण से बचाना था।

यह झील सुबह की सैर करने वालों, नौकायन करने वालों और प्रकृति प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है। पूजा सामग्री चढ़ाने, विसर्जन और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए ये प्रतिबंध लगाए गए थे। पॉल ने सवाल उठाया कि अगर झील में प्रवेश पर रोक जारी रहती है, तो आसपास के इलाकों में रहने वाले श्रद्धालु पूजा करने कहां जाएंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘रवींद्र सरोवर में छठ पूजा की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती? स्थानीय लोग कहां जाएंगे?’’ उन्होंने कहा कि प्रदूषण से जुड़े एहतियाती उपायों के साथ अनुमति देने की योजना है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश से निपटने की सरकार की योजना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है।

सूर्य देव को समर्पित छठ पूजा 15 और 16 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दौरान श्रद्धालु पहले दिन शाम को डूबते सूर्य और अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे।

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