पूर्व IAS Rakesh Agrawal हत्याकांड: Bhopal में जांच के लिए SIT गठित, केयरटेकर पर 50 हजार का इनाम

मध्य प्रदेश पुलिस ने पूर्व प्रशासनिक अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या की समयबद्ध जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल बनाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर यह कदम आईएएस अधिकारी संघ द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग के बाद उठाया गया। वारदात के बाद से फरार चल रहे उनके केयरटेकर की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें दबिश दे रही हैं।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या की जांच के लिए पुलिस ने पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए एसआईटी का गठन किया गया है।
अग्रवाल 30 सितंबर को भोपाल के रातीबड़ इलाके में स्थित अपने आवास पर मृत मिले थे, उनका गला रेता हुआ था। उनकी हत्या का आरोपी और उनका देखभाल करने वाला वरुण कुमार फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
अधिकारी ने बताया कि भोपाल के पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने सहायक पुलिस महानिरीक्षक उमेश तिवारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित की है। इससे पहले, बुधवार शाम मध्यप्रदेश आईएएस अधिकारी संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री यादव से मुलाकात की थी। संघ के अध्यक्ष एवं अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव और आईएएस अधिकारी वीएस चौधरी कोलसानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से अग्रवाल की हत्या की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था।
रातीबड़ के थाना प्रभारी आरबी शर्मा ने बताया कि आरोपी की तलाश के लिए पुलिस की कई टीम गठित की गई है। आरोपी की गिरफ्तारी पर 50,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पुलिस ने बताया कि अग्रवाल अस्वस्थ रहते थे जिनकी देखभाल के लिए वरुण कुमार को नियुक्त किया गया था।
उसकी नियुक्ति के महज तीन बाद ही यह वारदात हुई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटनास्थल पर संघर्ष के कोई निशान नहीं मिले थे। आरोपी ने कथित तौर पर हत्या के बाद घर में आग लगाने की कोशिश की थी।
इसके लिए उसने गैस सिलेंडर की पाइप निकाल दी थी और पास में बिजली की इस्त्री चालू छोड़ दी थी। घर में सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। पंजाब के रहने वाले अग्रवाल 1982 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी थे और मध्यप्रदेश कैडर में शामिल हुए थे।
उन्होंने जिलाधिकारी सहित विभिन्न पदों पर सेवाएं दी थीं। वह कई विभागों में सचिव और प्रमुख सचिव भी रहे थे। उनकी अंतिम तैनाती भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के महानिदेशक के रूप में थी।
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