ITI निर्माण में बड़ा घोटाला, भोपाल की तिरुपति कंस्ट्रक्शन ने एनपीसीसी को लगाया करोड़ों का चूना

Construction
सुयश भट्ट । Jun 16 2021 3:05PM

राजधानी भोपाल से सामने आया है जहां पर एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी तिरुपति कंस्ट्रक्शन ने सरकारी कंपनी NPCC को करोड़ो का चूना लगा दिया।सरकारी कंपनी एनपीसीसी(NPCC) ने भोपाल की श्री तिरुपति कंस्ट्रक्शन को प्रदेश के चार जिलों जबलपुर,रीवा,सागर और शहडोल में आईटीआई(ITI) निर्माण का ठेका दिया था। जिसका मूल्य 113.04 करोड़ था। जिसे NPCC की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड ने आवंटित किया था।

भोपाल। वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में जहां आम आदमी परेशान है। वहीं दूसरी ओर कई लोग ऐसे भी है जो इस आपदा को भी अवसर में तब्दील करने में जुटे हुए है। ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल से सामने आया है जहां पर एक प्राइवेट कंस्ट्रक्शन कंपनी तिरुपति कंस्ट्रक्शन ने सरकारी कंपनी NPCC को करोड़ो का चूना लगा दिया।

 यह है पूरा मामला

सरकारी कंपनी एनपीसीसी (NPCC) ने भोपाल की श्री तिरुपति कंस्ट्रक्शन को प्रदेश के चार जिलों जबलपुर,रीवा,सागर और शहडोल में आईटीआई(ITI) निर्माण का ठेका दिया था। जिसका मूल्य 113.04 करोड़ था। जिसे NPCC की अनुशंसा पर मध्यप्रदेश हाउसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड ने आवंटित किया था। नियमानुसार इसके लिए श्री तिरुपति कंस्ट्रक्शन को NPCC के नाम कुल ठेके का 10% की बैंक गारंटी जमा करवानी थी जो उसने फर्जी जमा करवाई है।

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 ऐसे प्रकाश में आया मामला

मामले का खुलासा तब हुआ जब एनपीसीसी ने शाहपुरा पुलिस को एक आवेदन सौंपा। और एनपीसीपी के पूर्व प्रदेश के जोनल मैनेजर सुनील कुमार जो वर्तमान में रायपुर में पदस्थ है श्री तिरुपति कंस्ट्रक्शन के मालिक नितिन सुभाष शर्मा और पार्टनर सौरभ मौर्य के खिलाफ फर्जी बैंक गारंटी देने को लेकर कार्यवाही की मांग की। अपनी शिकायत में NPCC ने बताया कि तिरुपति कंस्ट्रक्शन ने उसे फर्जी बैंक गारंटी यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया धरमपेठ ब्रांच नागपुर, यूको बैंक गोंडागांव नागपुर की दी थी जो जांच में फर्जी पाई गई हैं।

दरअसल आरोपियों को NPCC को ITI निर्माण के ठेके के एवज में ठेके की कुल रकम 113.04 करोड़ के 10% को बैंक गारंटी देनी थी जो 11 करोड़ होती है। इसी क्रम में तिरुपति कंस्ट्रक्शन ने पहली बैंक गारंटी 21अगस्त 2019 को 5.7 करोड़ की दी थी। उस दौरान एनपीसीसी के जोनल मैनेजर सुनील कुमार थे। तथा दूसरी बैंक गारंटी 4 मई 2021 को दी गई इस दौरान एनपीसीसी में जोनल मैनेजर बदल गए थे। और एम.ए. मंसूरी नए जोनल मैनेजर मध्य प्रदेश ब्रांच के बनाए गए। जब मार्च में नए जोनल मैनेजर एम.ए. मंसूरी आए तो उन्होंने बैंक गारंटी कैश कर काम शुरू कराना चाहा और ऑनलाइन सर्च किया तो वह बैंक में नही दिखाई दी। जब वह बैंक गारंटी लेकर बैंक पहुंचे तो बैंक ने बैंक गारंटी को नकली बताया। तब उन्हे पता चला कि बैंक गारंटी फर्जी हैं।

जब मंसूरी ने इसकी पूछताछ श्री तिरुपति कंस्ट्रक्शन के कर्ताधर्ताओं से की तो उन्होंने मामले को दबाने की कोशिश की। जिसपर मंसूरी ने इस घोटाले की जांच और FIR के लिए शाहपुरा थाने में आवेदन दिया क्योंकि श्री तिरुपति कंस्ट्रक्शन का ऑफिस बावड़िया कला स्थित है।

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 पहले भी गिरफ्तार हो चुका है सौरव

मामले में आरोपी सौरभ मौर्य प्रदेश के सीएम की फर्जी नोट शीट बनाने के मामले में आरोपी भी रह चुका है। बता दें कि पुलिस ने उसे इस मामले में भी आरोपी बनाया है। पूर्व में सौरभ मौर्य ने एक डॉक्टर को जबलपुर आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का रजिस्ट्रार बनाने के लिए वाले मामले में एक डॉक्टर को सीएम की फर्जी नोटशीट बनाकर दी थी और 5 लाख रुपए लिए थे। और नोटशीट पर सीएम की साइन भी कर दी थी।

 क्या है एनपीसीसी

राष्ट्रीय परियोजना निर्माण निगम लिमिटेड (एनपीसीसी) एक "मिनी-रत्न-श्रेणी-I" है, जिसकी स्थापना 9 जनवरी 1957 को एक प्रमुख निर्माण कंपनी के रूप में की गई थी। ताकि देश के आर्थिक विकास के लिए सिंचाई और जल संसाधनों के मुख्य क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी ढाँचा तैयार किया जा सके। बिजली और भारी उद्योग के क्षेत्र में केंद्र के उपक्रमों में काम करती है। यह देश की 9 रत्न कंपनी में से एक कंपनी है।

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