Bihar में जब्त मादक पदार्थों का Liquor Ban से कोई संबंध नहीं, मदन सहनी ने दावों को किया खारिज

बिहार के मद्य निषेध और उत्पाद मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को कहा कि राज्य में एनडीपीएस कानून के तहत पकड़े गए प्रतिबंधित पदार्थों का शराबबंदी से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों की सतर्कता से बरामद अधिकांश नशीले पदार्थ असल में दूसरे राज्यों में आपूर्ति के लिए ले जाए जा रहे थे। इस बीच राजद सांसद मनोज झा ने नशामुक्ति के लक्ष्य पर केंद्र से बिहार के हालात पर भी ध्यान देने की मांग की।
बिहार के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री मदन सहनी ने राज्य में जब्त किए गए मादक पदार्थों की मात्रा में बढ़ोतरी को शराबबंदी कानून से जोड़ने वाली खबरों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि दोनों के बीच कोई संबंध नहीं है। मंत्री ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि यह सही है कि बिहार में स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत जब्त प्रतिबंधित पदार्थों की मात्रा में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि ऐसा राज्य में शराबबंदी लागू होने के कारण हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रतिबंधित पदार्थों की जब्ती केवल बिहार में ही नहीं बढ़ी है, बल्कि अन्य राज्यों में भी यह स्थिति देखने को मिल रही है।
सहनी ने कहा, “संबंधित अधिकारियों की सतर्कता के कारण राज्य में एनडीपीएस अधिनियम के तहत जब्त प्रतिबंधित पदार्थों की मात्रा बढ़ी है। हालांकि, लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि बिहार में जब्त किए जाने वाले अधिकांश प्रतिबंधित पदार्थ दूसरे राज्यों में आपूर्ति के लिए ले जाए जा रहे होते हैं।’’ उन्होंने कहा कि इन पदार्थों को बिहार के रास्ते दूसरे राज्यों में ले जाया जाता है, लेकिन इसी दौरान उन्हें यहां पकड़ लिया जाता है। मंत्री ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इनकी आपूर्ति केवल बिहार में की जानी थी, जबकि वास्तविकता यह नहीं है।
मंत्री ने कहा, “बिहार में शराबबंदी काफी सफल रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में लागू किए गए इस कानून पर सवाल उठाने वाले निहित स्वार्थों से प्रेरित लोगों की दुर्भावनापूर्ण मंशा सफल नहीं होगी।” इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बिहार में नशे की लत के कारण पीढ़ियां बर्बाद हो रही हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा वर्ष 2029 के अंत तक भारत को नशामुक्त बनाने के लक्ष्य पर प्रतिक्रिया देते हुए झा ने उनसे बिहार की स्थिति पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि राज्य का नेतृत्व यहां नशे की समस्या से निपटने में सक्षम नहीं है। झा ने कहा, “यह अच्छी बात है कि अमित शाह ने वर्ष 2029 का लक्ष्य रखा है, 2047 का नहीं।” उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव होने वाले हैं, जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार नहीं है, लेकिन बिहार में नशे की समस्या के कारण पीढ़ियां बर्बाद हो रही हैं। राजद सांसद ने कहा कि अमित शाह को बिहार की ओर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि राज्य का नेतृत्व यहां की स्थिति को संभालने में असमर्थ है।
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