कभी शेख अब्दुल्ला के जन्मदिन पर छुट्टी मनाता था J&K, वक्त बदला, अब महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी मनायी जा रही है

Maharaja Hari Singh
ANI
हम आपको बता दें कि महाराजा हरि सिंह ही वह शख्सियत थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारों को 75 साल क्यों लग गये महाराजा हरि सिंह की जयंती पर अवकाश घोषित करने में।

आजादी के अमृत काल में जम्मू-कश्मीर वाकई नयी सुबह देख रहा है। पहले यहां शेख अब्दुल्ला के जन्मदिवस 5 दिसंबर को सरकारी छुट्टी होती थी लेकिन अब अनुच्छेद 370 हटने के बाद वह छुट्टी खत्म हो गयी है। अब मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह की जयंती 23 सितम्बर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा से पूरे जम्मू-कश्मीर में खुशी की लहर देखी जा रही है। जब हम पूरे जम्मू-कश्मीर की बात कर रहे हैं तो पाक अधिकृत कश्मीर की भी बात कर रहे हैं। जी हाँ, जैसे जम्मू के अलावा कश्मीर घाटी के इलाकों में लोग महाराजा हरि सिंह जी की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किये जाने के निर्णय को सराह रहे हैं और धूमधाम से नाच गाकर उनकी जयंती मना रहे हैं उसी प्रकार पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में रह रहे लोग भी सोशल मीडिया पर एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं और कह रहे हैं कि उनके क्षेत्र में भी महाराजा हरि सिंह की जयंती पर छुट्टी होनी चाहिए।

हम आपको बता दें कि महाराजा हरि सिंह ही वह शख्सियत थे जिन्होंने जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ विलय किया था। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकारों को 75 साल क्यों लग गये महाराजा हरि सिंह की जयंती पर अवकाश घोषित करने में। खैर देर आये दुरुस्त आये। महाराजा हरि सिंह के कार्यों को भुलाने का काम भले पिछली सरकारों ने किया लेकिन अब उनकी उपलब्धियों को जनता को बताया जा रहा है और महाराजा को पूर्ण सम्मान भी दिया जा रहा है।

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हम आपको बता दें कि महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग लंबे अरसे से हो रही थी लेकिन अब जाकर यह मांग मानी गयी है। जम्मू-कश्मीर के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी एक अधिसूचना के मुताबिक ‘महाराजा हरि सिंह जी की जयंती मनाने के लिए प्रत्येक वर्ष 23 सितंबर का दिन परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 के तहत केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी के रूप में मनाया जाएगा।’

जहां तक इस निर्णय के राजनीतिक निहितार्थ की बात है तो माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले जम्मू क्षेत्र के मतदाता और खासकर डोगरा मतदाता भाजपा के साथ मजबूती से खड़े होंगे। इस निर्णय के बाद से भाजपा के कार्यालय के बाहर लगातार जश्न का माहौल भी देखा जा रहा है जो दर्शाता है कि महाराजा की जयंती पर अवकाश घोषित करने का निर्णय कितना लाभप्रद होने जा रहा है।

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