Dalit Vote Bank पर Congress की नजर? कांशीराम को भारत रत्न के वादे पर Mayawati ने उठाए तीखे सवाल

BSP vs Congress
ANI

बसपा प्रमुख मायावती ने कांशीराम को भारत रत्न देने के कांग्रेस के चुनावी वादे को अवसरवादी राजनीति बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिसने आंबेडकर को सम्मान नहीं दिया, वह कांशीराम का सम्मान कैसे कर सकती है, और समर्थकों को सतर्क रहने की सलाह दी।

 बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर शनिवार को सवाल उठाया कि यदि वह केंद्र में सत्ता में आती है तो बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मायावती ने देश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं से अन्य राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कांग्रेस द्वारा बसपा को कमजोर करने के प्रयासों के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र में कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने बी आर आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया तो अब पार्टी कांशीराम को सम्मानित करने का प्रस्ताव कैसे रख सकती है। कांशीराम की जयंती रविवार को मनाई जाएगी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘कांग्रेस ने दलितों के मसीहा और संविधान के प्रमुख निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को कभी उचित सम्मान नहीं दिया, न ही उन्हें भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया... तो अब वही पार्टी कांशीराम को कैसे सम्मानित कर सकती है?’’ उनकी यह टिप्पणी यहां कांग्रेस द्वारा आयोजित संविधान सम्मेलन में पारित एक प्रस्ताव के एक दिन बाद आई है, जिसमें कहा गया कि सत्ता में आने पर पार्टी कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करेगी।

मायावती ने कहा, ‘‘केंद्र में सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने कांशीराम के निधन पर एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। इसी तरह, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार ने भी राजकीय शोक की घोषणा नहीं की।’’ उन्होंने कहा कि दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई संगठन और राजनीतिक दल, जो अक्सर बड़े राजनीतिक दलों के हाथों की कठपुतली बनकर काम करते हैं, बसपा को कमजोर करने की कोशिश करते हुए राजनीतिक लाभ के लिए कांशीराम के नाम का लगातार इस्तेमाल कर रहे हैं।

मायावती ने कहा, ‘‘अब ये सभी दल कांशीराम द्वारा बनाई गई पार्टी बसपा को आए दिन अलग-अलग हथकंडे इस्तेमाल करके कमजोर करने में लगे हैं इसलिए उनके (कांशीराम के) अनुयायियों और समर्थकों को सतर्क रहना चाहिए, विशेष रूप से कांग्रेस के खिलाफ, जिसकी दलित विरोधी विचारधारा और मानसिकता ने बसपा के गठन को आवश्यक बना दिया।’’ बाद में एक बयान में बसपा प्रमुख ने कहा कि बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता कांशीराम को संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की खातिर स्मरण करना विरोधी पार्टियों ख़ासकर कांग्रेस एवं सपा का नया अवसरवादी फैशन हो गया है।

उन्होंने कहा कि कांसीराम के मिशन के प्रति समर्पित होकर संविधान के पवित्र समतामूलक और कल्याणकारी उद्देश्यों को ज़मीन पर उतारने का कार्य अगर सही नीयत से किया गया होता तो न तो उन्हें बसपा की स्थापना की ज़रूरत करनी पड़ती और न ही अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी एवं पिछड़ेपन आदि का बोझ बहुजन समाज को आज तक झेलते रहना पड़ता। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंता की बात है कि वही जातिवादी द्वेष एवं सोच आज भी जारी है तथा इन वर्गों से जुड़े ‘आरक्षण’ को निष्प्रभावी बनाकर इस शोषणकारी व्यवस्था को मज़बूती प्रदान की जा रही है। मायावती ने कहा कि बहुजन समाज’ ने अपने हित, कल्याण आदि हेतु कांग्रेस, भाजपा, सपा जैसी पार्टियों को बार-बार आज़माया है लेकिन हर बार उन्हें भारी निराशा ही मिली है क्योंकि ये पार्टियां गिरगिट की तरह रंग बदलती हुई ज़्यादातर नज़र आती हैं।

उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं/समर्थकों को आगाह किया कि किसी भी हाल में वे वोट के इन सौदागरों के हाथों में न खेलें,यही बाबा साहेब डा. भीमराव आंबेडकर एवं कांशीराम जी के जीवन संघर्ष के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। दरअसल कल 15 मार्च को कांशीराम की जयंती है। इस अवसर पर बहुजन समाज पार्टी हमेशा कार्यक्रम आयोजित करती है। इस बार कांशीराम जयंती के अवसर पर कांग्रेस ने लखनऊ में 13 मार्च को संविधान सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शिरकत कर थी। समाजवादी पार्टी भी कल 15 मार्च को एक कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

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