Maharashtra Foundation Day 2026: जब Mumbai को लेकर हुआ था बड़ा संघर्ष, जानिए संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन की अनसुनी कहानी

लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष के बाद 1 मई 1960 को महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ था। इसने मराठी भाषी लोगों को अलग पहचान मिली। मुंबई को राजधानी बनाकर इस राज्य ने देश की सांस्कृतिक और आर्थिक दिशा को भी बदल दिया।
लंबे और ऐतिहासिक संघर्ष के बाद 1 मई 1960 को महाराष्ट्र राज्य का गठन हुआ था। इसने मराठी भाषी लोगों को अलग पहचान मिली। मुंबई को राजधानी बनाकर इस राज्य ने देश की सांस्कृतिक और आर्थिक दिशा को भी बदल दिया। आज 01 मई को महाराष्ट्र दिवस मनाया जा रहा है। यह दिन सिर्फ उत्सव नहीं बल्कि बलिदान, संघर्ष और स्वाभिमान की उस कहानी को याद करने का मौका है, जिसने आधुनिक महाराष्ट्र की नींव रखी।
महाराष्ट्र का इतिहास
महाराष्ट्र का इतिहास काफी पुराना रहा है। सबसे पहले इस राज्य में सातावाहन राजवंश और इसके बाद वाकाटक वंश का राज्य रहा है। इस क्षेत्र पर चालुक्य, कलचुरी, यादव, दिल्ली के खिलजी और बहमिनी वंशों ने शासन किया है। फिर केंद्रीय सत्ता बिखरकर छोटी-छोटी सल्तनतों में बदल गई।
17वीं शताब्दी में शिवाजी के प्रभाव से आधुनिक मराठा राज्य का उदय हुआ। शिवाजी ने बिखरी ताकतों को एकजुट किया और शक्तिशाली सैन्य बल का संगठन बनाया। इस सेना की मदद से मुगलों को दक्षिण के पठार से आगे बढ़ने से रोका। लेकिन शिवाजी की मृत्यु के बाद मराठा शक्ति बिखरने लगी थी।
वहीं 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई के बाद मराठा शक्ति पूरी तरह से बिखर गई। फिर 1818 तक अंग्रेजों ने मराठा क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। 1857 में नाना साहब के सैनिकों ने गांधी और तिलक ने महाराष्ट्र के लोगों को सैनिकों ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सक्षम नेत्रत्व प्रादन किया।
महाराष्ट्र स्थापना दिवस
आजादी के समय बॉम्बे स्टेट एक बहुत बड़ा प्रांत था। यहां मराठी और गुजराती बोलने वाले लोग एक साथ रहते थे। महाराष्ट्र के गठन के पीछे एक ऐतिहासिक और लंबा आंदोलन जुड़ा हुआ है। इसको संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के नाम से जाना जाता है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मराठी भाषी क्षेत्रों को एक साथ लाकर अलग राज्य बनाना था। जिसकी राजधानी मुंबई हो। बम्बई प्रान्त में महाराष्ट्र और गुजरात शामिल थे, ऐसे में जब गुजरात और महाराष्ट्र के गठन का प्रस्ताव आया, तो तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू ने मुंबई को अलग केंद्र शासित राज्य बनाने की वकालत की।
पीएम नेहरू का तर्क था कि अगर मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी बने रहता है, तो इसको केंद्रशासित करना जरूरी है। लेकिन देश के पहले वित्त मंत्री और वित्त विशेषज्ञ चिंतामणि ने इसका विरोध किया। बाद में बंबई पुनर्गठन अधिनियम 1960 के तहत 01 मई 1960 को इस सम्मिलित प्रांत को महाराष्ट्र और गुजरात नाम से दो अलग राज्यों में बांट दिया गया। इस तरह से नए महाराष्ट्र राज्य की राजधानी बन गई। वहीं साल 1995 में बंबई का नाम बदलकर मुंबई रख दिया गया।
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