Census 2027 की विश्वसनीयता खत्म कर देंगे नए नियम, Congress नेता Jairam Ramesh का दावा

Jairam Ramesh
ANI
अंकित सिंह । Oct 17 2026 4:59PM

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 1990 के जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2027 की जनगणना में गणनाकारों का दायरा बढ़ाना RSS और BJP कार्यकर्ताओं के लिए रोजगार गारंटी योजना जैसा है। रमेश ने दावा किया कि इस बदलाव से आगामी जनगणना की विश्वसनीयता पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 17 अक्टूबर को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 2027 की जनगणना के लिए गणना करने वालों (एन्यूमरेटर्स) के दायरे को बढ़ाने से आरएसएस और भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं को फायदा होगा। रमेश ने कहा कि यह साफ है कि यह आरएसएस/भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं के लिए एक 'रोजगार गारंटी योजना' है।

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X पर एक पोस्ट में, उन्होंने आरोप लगाया कि ये बदलाव बेलगाम में 10 जुलाई से 12 जुलाई तक हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक हालिया बैठक के बाद किए गए हैं। रमेश ने दावा किया कि 'जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति' - जिसने भारतीय और विदेशी संगठनों से जनसांख्यिकीय बदलावों पर सुझाव मांगे थे - उसमें मुख्य रूप से RSS से जुड़े सदस्य शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अब जनगणना 2027 के लिए योग्य गणनाकारों (enumerators) की सूची का विस्तार कर दिया है। इसके पीछे काफी गड़बड़ी है। 10-12 जुलाई 2026 के दौरान, RSS ने बेलगाम में अपने कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था, जिसका एकमात्र एजेंडा 'जनगणना 2027' था। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 26 मई 2026 को गठित 'जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर उच्च-स्तरीय समिति' ने अभी हाल ही में देश में जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर जनता (जिसमें भारतीय और विदेशी संगठन भी शामिल हैं) से सुझाव मांगे हैं। इस समिति में 'उच्च-स्तरीय' बस एक ही बात है - इसके सदस्यों का RSS इकोसिस्टम से जुड़ा होना। इसलिए, हमें पता है कि ये सुझाव कहां से आने वाले हैं।

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रमेश ने आगे आरोप लगाया कि इस संशोधन से 2027 की जनगणना की विश्वसनीयता खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इसमें भी 'सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना' (SIR) की तरह ही हेरफेर की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले से ही खराब हो चुकी जनगणना और भी ज्यादा दूषित हो जाएगी। एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है। SIR की तरह, जनगणना में भी खतरनाक तरीके से छेड़छाड़ की जाएगी। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की जोड़ी की कुटिल योजनाओं की कोई सीमा नहीं है। यह टिप्पणी केंद्र सरकार द्वारा 16 अक्टूबर को 1990 के जनगणना नियमों में किए गए उस संशोधन के बाद आई है, जिसके तहत जनगणना करने वालों (एन्यूमेरेटर) के दायरे को बढ़ा दिया गया है। अब इसमें सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, सरकारी अधिकारी, क्लर्क और अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है।

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