राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय-अनिल मिश्रा के इस्तीफे की हुई आधिकारिक पुष्टि, बैठक में तय होगी अगली भूमिका

Champat Rai
ANI
अभिनय आकाश । Jun 27 2026 5:04PM

स्तीफ़े ऐसे समय में आए हैं जब अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच चल रही है। भक्तों के चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस मामले ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है, और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मामले की जांच कर रही है।

राम मंदिर के लिए दिए गए दान में कथित चोरी के मामले में, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरि ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट से इस्तीफ़ा दे दिया है। हालांकि राय के इस्तीफ़े की खबरें पहले ही सामने आ चुकी थीं, लेकिन ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व की ओर से यह पहली आधिकारिक पुष्टि है। इसके तुरंत बाद, राम मंदिर ट्रस्ट ने भी एक बयान जारी कर पुष्टि की कि उसे चंपत राय का इस्तीफ़ा मिल गया है। ट्रस्ट ने आगे बताया कि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। ये इस्तीफ़े ऐसे समय में आए हैं जब अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच चल रही है। भक्तों के चढ़ावे के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद इस मामले ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है, और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मामले की जांच कर रही है।

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क्या राम मंदिर दान चोरी में चंपत राय की भूमिका है?

सूत्रों के अनुसार, जांच में दान की गिनती की प्रक्रिया के प्रशासन द्वारा प्रबंधन को लेकर चंपत राय की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि जांचकर्ताओं ने यह आरोप नहीं लगाया है कि राय ने सीधे तौर पर गिनती या निगरानी कार्यों को संभाला, लेकिन SIT ने कथित तौर पर सवाल उठाया है कि क्या संदिग्ध चोरी के बारे में शिकायतों को वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाए जाने के बावजूद नजरअंदाज कर दिया गया था। सूत्रों का यह भी दावा है कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए कई लोगों को चंपत राय और अनिल मिश्रा की सिफारिश पर दान-गिनती के कार्यों में लगाया गया था। रिपोर्ट में पर्याप्त पृष्ठभूमि सत्यापन के बिना कुछ कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये निष्कर्ष SIT जांच का हिस्सा हैं और अदालत में इनकी पुष्टि नहीं हुई है।

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जांच में अब तक क्या पता चला है?

SIT ने 27 अप्रैल से 5 जून के बीच रिकॉर्ड किए गए CCTV फुटेज की जांच की और खबरों के मुताबिक, उन्हें लगभग 70 ऐसी घटनाएं मिलीं जिनमें दान की गिनती करने वाले कर्मचारी करीब 40 दिनों के दौरान कैश चुराते हुए देखे गए। जांच करने वालों का आरोप है कि कुछ आरोपी गिनती केंद्र के अंदर CCTV कैमरों की लोकेशन और 'ब्लाइंड स्पॉट' (जहां कैमरे की नज़र नहीं पड़ती) के बारे में जानते थे। जांच के मुताबिक, कथित चोरी के दौरान कभी-कभी कैमरों को बंद कर दिया जाता था या जानबूझकर उनमें रुकावट डाली जाती थी। इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से सिर्फ़ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव ही राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी थे, जबकि बाकी आरोपी कथित तौर पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) से जुड़े थे, जो मंदिर के दान की गिनती में मदद करता है। सूत्रों के मुताबिक, SIT ने राम शंकर यादव, उर्फ़ टिन्नू यादव की पहचान इस कथित चोरी के मुख्य आरोपी के तौर पर की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके पास दान-पात्रों की चाबियां थीं और मंदिर परिसर में दान की गिनती और अन्य कामकाज के लिए कर्मचारियों की तैनाती जैसे प्रशासनिक मामलों में उनका काफी प्रभाव था। एक अन्य आरोपी, रामाशंकर मिश्रा को कथित तौर पर टिन्नू यादव की सिफारिश पर दान की गिनती के काम में शामिल किया गया था। कहा जाता है कि CCTV फुटेज में उन्हें कई बार नकदी चुराते हुए देखा गया है। SIT ने अनिल मिश्रा की नियुक्तियों में भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और ट्रस्टी बनने के बाद उनकी संपत्ति में हुई बढ़ोतरी पर चिंता जताई है। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक नतीजा घोषित नहीं किया गया है।

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