Kanker NIA Court ने 2015 के पुलिस मुठभेड़ मामले में 5 माओवादियों को सुनाई सजा

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एनआईए की विशेष अदालत ने 2015 में पुलिस दल पर हुए माओवादी हमले के मामले में पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने इनामी नक्सली दंपति प्रभाकर राव और राजे कांगे को सात-सात साल तथा तीन अन्य सहयोगियों को पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई। इस मामले में पुलिस ने आधुनिक ई-साक्ष्यों और वैज्ञानिक विवेचना को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया था।
कांकेर, आठ सितंबर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत ने 2015 में भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी इलाके में पुलिस दल पर हुए माओवादी हमले के मामले में माओवादी दंपती समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि माओवादी दंपती पर क्रमशः 25 लाख रुपये और आठ लाख रुपये का इनाम है।
उन्होंने बताया कि कांकेर में एनआईए की विशेष न्यायाधीश विभा पांडेय की अदालत ने सोमवार को 2015 के भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी पर हुए पुलिस दल पर हमले के मामले में ‘स्पेशल जोनल कमेटी’ सदस्य प्रभाकर राव और उनकी पत्नी ‘डिविजनल कमेटी’ सदस्य राजे कांगे समेत पांच नक्सलियों को दोषी ठहराया। अधिकारियों ने बताया कि अन्य आरोपियों में श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार और रमेश कुमार कुमेटी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि अदालत ने प्रभाकर और राजे को सात-सात वर्ष तथा अन्य नक्सलियों को पांच-पांच वर्ष कारावास की सजा सुनाई।
उन्होंने बताया कि नक्सली प्रभाकर और राजे कांगे के खिलाफ हत्या, लूट, अपहरण सहित विभिन्न थानों में कुल 64 और 36 मामले दर्ज हैं। उनके खिलाफ कई गंभीर नक्सली वारदातों में शामिल होने, थाना प्रभारी और गोपनीय सैनिक की हत्या एवं जनअदालत में हत्या जैसे मामले में शामिल होने के आरोप हैं। अधिकारियों ने बताया कि सात सितंबर, 2015 को कांकेर जिले के कोरेर थाना से 49 पुलिस कर्मियों को गश्त में रवाना किया गया था।
जब वह भैंसगांव-नागरमारी पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे थे तब नक्सली प्रभाकर और राजे कांगे तथा लगभग आठ अन्य वर्दीधारी माओवादियों ने उनपर गोलीबारी कर दी। बाद में पुलिस दल ने जब जवाबी कार्रवाई की तब नक्सली वहां से फरार हो गए। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बाद में प्रभाकर, राजे कांगे तथा उन्हें सहयोग और संरक्षण देने के आरोप में श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार और रमेश कुमार कुमेटी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने सुनवाई के बाद 29 अगस्त 2026 को मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया था तथा सोमवार को आरोपियों को मामले में दोषी पाते हुए निर्धारित धाराओं के तहत सजा सुनाई। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक तथा तकनीकी तरीके से सुरक्षित रखने और अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में कांकेर पुलिस ने विशेष सावधानी बरती। अधिकारियों ने बताया कि माओवादी प्रभाकर और राजे कांगे से प्राप्त इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज/डिजिटल साक्ष्यों को साइबर प्रकोष्ठ, पुलिस मुख्यालय के तकनीकी सहयोग से आवश्यक प्रक्रिया के तहत जुटाया और संरक्षित किया गया।
इसके बाद उस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को विधिवत अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया। इसी प्रकार, जांच के दौरान पुलिस द्वारा की गई विभिन्न कार्यवाहियों और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों को भी ई-साक्ष्य के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में संरक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप विवेचना संबंधी कार्यवाहियों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए उन्हें अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया।
अदालत द्वारा इन ई-साक्ष्यों और इलेक्ट्रॉनिक रूप से संरक्षित विवेचना संबंधी दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना, कांकेर पुलिस की आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग, वैज्ञानिक विवेचना तथा साक्ष्य संकलन की बेहतर प्रक्रिया को दर्शाता है।
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