मुख्यमंत्री ने कैप्टन राम सिंह ठाकुर पर लिखित राजेंद्र राजन की किताब का विमोचन किया

मुख्यमंत्री ने कैप्टन राम सिंह ठाकुर पर लिखित राजेंद्र राजन की किताब का विमोचन किया

राष्ट्रगान ‘जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता’ की मूल धुन तैयार करने वाले कैप्टन रामसिंह थापा हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से सटे खनियारा में जन्में थे। कैप्टन राम सिंह थापा ने राष्ट्रगान से समूचे राष्ट्र को एक माला में पिरोया। उन्होंने लगभग 60 वर्ष पूर्व अपनी धुनों व गीतों से समूचे राष्ट्र को अंग्रेजों के विरुद्ध लोहा लेने के लिए अभिप्रेरित किया।

शिमला   मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां एक सफल और प्रख्यात हिंदी लेखक राजेंद्र राजन द्वारा रचित पुस्तक ‘अनसंग कम्पोजर आॅफ आईएनए कैप्टन राम सिंह ठाकुर जन गण धुन के जनक’ का विमोचन किया। इस पुस्तक में आईएनए सोल्जर के क्रमबद्ध इतिहास को प्रस्तुत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्र के लिए राम सिंह के उल्लेखनीय और ऐतिहासिक योगदान को प्रकाश में लाने के लिए लेखक के प्रयासों की सराहना की। कैप्टन राम सिंह एक स्वतंत्रता सेनानी और आईएनए तथा प्रोविंशियल आम्र्ड कांस्टेबुलरी, लखनऊ के प्रसिद्ध संगीत निर्देशक थे।

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राजेंद्र राजन हिंदी के एक प्रख्यात लेखक हैं और अब तक उनकी 12 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। पंचायत समिति संगड़ाह के अध्यक्ष मेला राम शर्मा और हिमाचल के प्रसिद्ध लेखक डाॅ. हेम राज कौशिक इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को शांता कुमार पर  लिखित ‘साहित्यसेवी राजनेता शांता कुमार’ नामक पुस्तक भी भेंट की।

 

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राष्ट्रगान ‘जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता’ की मूल धुन तैयार करने वाले कैप्टन रामसिंह थापा हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से सटे खनियारा में जन्में थे। कैप्टन राम सिंह थापा ने राष्ट्रगान से समूचे राष्ट्र को एक माला में पिरोया।  उन्होंने लगभग 60 वर्ष पूर्व अपनी धुनों व गीतों से समूचे राष्ट्र को अंग्रेजों के विरुद्ध लोहा लेने के लिए अभिप्रेरित किया। ‘कदम से कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा, ये जिंदगी है कौम की, इसे कौम पर लुटाए जा’ गीत की रचना कैप्टन रामसिंह थापा ने तब की थी, जब वह सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज में बैंड मास्टर थे। कैप्टन राम सिंह सेवानिवृत्ति के बाद लखनऊ बस गए। लेकिन आज भी हिमाचल के धर्मशाला में उनकी यादें ताजा हैं।  धर्मशाला में रहने वाले हर शख्स कैप्टन थापा को आज भी भुला नहीं पाया है। 





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