उत्तराखंड में 1 लाख करोड़ रुपये की जमीन निजी हाथों में देने का आरोप, Congress ने CM धामी को घेरा

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने उत्तराखंड की 40 सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मंजूरी से करीब 1,080 एकड़ भूमि का मुद्रीकरण किया जा रहा है। पार्टी ने इस फैसले के विरोध में राज्यभर में आंदोलन शुरू करने और अदालत जाने की चेतावनी दी है।
नयी दिल्ली, चार नवंबर कांग्रेस महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा ने बुधवार को उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहरों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया और दावा किया कि इन संपत्तियों को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों पर स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंजूरी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने इसके विरोध में प्रदेशभर में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ अभियान’ शुरू किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्यपाल से मिलकर फैसले निरस्त करने की मांग करेंगे और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।
उनके आरोप पर उत्तराखंड सरकार और भारतीय जनता पार्टी की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आईं है। सैलजा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य की 40 सरकारी जमीनों और ऐतिहासिक धरोहर भवनों को बिक्री के लिए रखा गया है तथा 13 में से 12 जिलों की संपत्तियों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने दावा किया कि इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य कम से कम एक लाख करोड़ रुपये है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी विभागों की करीब 1,080 एकड़ जमीन होटल और निवेश परियोजनाओं के नाम पर निजी हाथों में सौंपने का रास्ता मुख्यमंत्री के दो अनुमोदनों से खुला। सैलजा के मुताबिक, जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री ने नैनीताल के पटवाडांगर, चकराता के नगऊ, धनौल्टी और टिहरी के मगरा की जमीनें होटल एवं रिसॉर्ट के लिए देने की मंजूरी दी थी। इसके बाद नवंबर 2025 में ई-फाइल पर भी मुख्यमंत्री की डिजिटल मंजूरी दर्ज हुई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ऋषिकेश स्थित आईडीपीएल की 633 एकड़, विकासनगर के डाकपत्थर की करीब 190 एकड़ और एचएमटी रानीबाग की 53 एकड़ जमीन समेत कई अन्य संपत्तियों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सैलजा ने नैनीताल के पटवाडांगर का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि 108 एकड़ जमीन के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी, इसके बावजूद वहां होटल परियोजना के लिए निविदा जारी कर दी गई। उन्होंने कहा कि इस जमीन के 13.64 एकड़ हिस्से को 90 साल के लिए देने के वास्ते 37.80 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य और पांच रुपये प्रति वर्गमीटर सालाना किराया तय किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संबंधित विभागों के मंत्रियों की सहमति के बिना जमीनों के मुद्रीकरण के फैसले किए, जो नियमों और संबंधित कानून के प्रावधानों के विपरीत हैं। उनका कहना था, ‘‘आज पूरे राज्य में अलग-अलग जगहों पर हमारे नेता और आमजन इस भ्रष्टाचार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
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