अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएंगे...अमेरिका में अल सैयद की जीत पर ओवैसी ने UP के मुस्लमानों को दिया बड़ा मैसज

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अभिनय आकाश । Nov 4 2026 2:24PM

अमेरिका के मिशिगन सीनेट चुनाव में अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद पहले मुस्लिम सदस्य बने। इस पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के मुस्लिम समाज को अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने का संदेश दिया। वहीं, भारतीय-अमेरिकी पिया डंडिया ने फ्लोरिडा से यूएस हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया।

अमेरिका के मिशिगन सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी उच्च सदन (सीनेट) के सदस्य बनने वाले पहले मुस्लिम हैं। इस ऐतिहासिक नतीजे का असर भारत के सियासी गलियारों में भी दिखा, जहाँ AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज को एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। ओवैसी ने अमेरिकी राजनीति के इस बदलाव की मिसाल देते हुए यूपी के अल्पसंख्यकों को अपनी संगठित राजनीतिक ताकत और हिस्सेदारी बढ़ाने की नसीहत दी। मिशिगन में एक 'अब्दुल' जीत गया है; अब उत्तर प्रदेश के 'अब्दुल' को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करनी होगी। संघियों ने 'अब्दुल' शब्द को एक ताने के रूप में इस्तेमाल करने की बहुत कोशिश की है। अब समय आ गया है कि हम दिखा दें कि 'अब्दुल' अल्लाह के सिवा किसी के सामने नहीं झुकता। अब हम और नमाज़ की चटाई नहीं बिछाएंगे।

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अब्दुल अल-सैयद कौन हैं?


अल-सैयद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई की और रोड्स स्कॉलर के तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। ​​सैयद ने सारा जकाकू से शादी की है, जिनके माता-पिता भारतीय मूल के हैं। सैयद खुद को पूंजीवादी (कैपिटलिस्ट) मानते हैं। उनका चुनाव अभियान मुख्य रूप से जीवन-यापन की लागत और अन्य मुद्दों पर केंद्रित था, और वे पिछले साल न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी के चुनाव अभियान से प्रभावित थे। उन्होंने सभी के लिए मेडिकेयर इज़राइल को दी जाने वाली सैन्य सहायता को खत्म करने और चुनाव वित्तपोषण (कैंपेन फाइनेंस) में सुधार जैसे मुद्दों पर प्रचार किया। मिशिगन के डेमोक्रेटिक गवर्नर पद के प्राइमरी चुनाव में 20 प्रतिशत से अधिक के अंतर से हारने के सात साल बाद, सैयद ने फिर से राजनीति में कदम रखा है। 2018 में गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में ग्रेचेन व्हिटमर से हारने के बाद, सैयद राजनीति से दूर हो गए थे। इस दौरान उन्होंने एक पॉडकास्ट शुरू किया, एक किताब लिखी और यूट्यूब तथा टेलीविजन पर नियमित रूप से दिखाई देने लगे।

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भारतीय-अमेरिकी पिया डंडिया ने फ्लोरिडा से US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीता

भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया। मंगलवार को घोषित US मध्यावधि चुनाव के नतीजों के अनुसार, पूर्व हाई स्कूल प्रिंसिपल डंडिया को 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि असकर को 49.1 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। उनके चुनाव अभियान की वेबसाइट के मुताबिक, डंडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपने करियर में हाई स्कूल प्रिंसिपल, पॉलिसी लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में काम करते हुए समुदायों को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया है। फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं डंडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल के प्रिंसिपल के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने एक ऐसा हाई स्कूल शुरू किया, जिसका मकसद कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए अवसरों को बेहतर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना था। चुनाव अभियान की वेबसाइट के अनुसार, इस स्कूल के सभी ग्रेजुएट्स को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि यहां के 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते थे। डंडिया 28 साल की उम्र में इस स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।

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