प्रमोद तिवारी का दावा, Congress Revival से बैकफुट पर BJP, इसलिए Amit Shah को तोड़नी पड़ी चुप्पी

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ANI
अंकित सिंह । Oct 14 2026 1:21PM

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने दावा किया कि पार्टी की बढ़ती मजबूती के कारण गृह मंत्री अमित शाह को चुप्पी तोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर शाह के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने भाजपा के पुराने चुनावी इतिहास का हवाला दिया। वहीं संजय राउत ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक विरोध जारी रखने का ऐलान किया।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने बुधवार को कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लंबे समय की चुप्पी के बाद बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि कांग्रेस पार्टी फिर से मज़बूत हो रही है। अमित शाह की उस टिप्पणी का जवाब देते हुए जिसमें उन्होंने कहा था कि वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) में सहयोग न करके विपक्ष अवैध घुसपैठियों को बचाना चाहता है, तिवारी ने पार्टी के पुनरुद्धार के सबूत के तौर पर चार राज्यों में पार्टी की स्थिति का ज़िक्र किया।

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तिवारी ने कहा कि हमारी सबसे बड़ी कामयाबी यही है कि अमित शाह, जो इतने लंबे समय से चुप थे, उन्हें कल सामने आना पड़ा। शायद उन्हें इतिहास की जानकारी नहीं है। 1985 में मैंने अपनी आँखों से देखा था कि संसद में बीजेपी के दो सांसद थे... वे उत्तर प्रदेश विधानसभा में दहाई का आँकड़ा भी नहीं छू पाए थे... कांग्रेस अब वापसी की राह पर है; हमारे पास 4 राज्य हैं... जिस दिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में चुनाव होंगे, वहाँ कांग्रेस के नेतृत्व में तिरंगा लहराएगा।

वहीं, शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, तब तक INDIA गठबंधन का विरोध जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा; कल जब हम सब इकट्ठा हुए थे, तब राहुल गांधी ने यह बात कही थी। यह आंदोलन अब नहीं रुकेगा। यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं दे देते। ये बातें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की गिरफ्तारी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद कही गईं। इन कार्यकर्ताओं को जंतर-मंतर के पास विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। पार्टी सदस्य अजिंक्य शिंदे ने कहा कि कार्यकर्ता इस कार्रवाई से डरेंगे नहीं।

इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसने CJP के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन पर बार-बार सार्वजनिक शांति भंग करने, कानून तोड़ने और सोशल मीडिया के ज़रिए दूसरों को भी ऐसे ही गैर-कानूनी काम करने के लिए उकसाने का आरोप है। सौरव दास और आशुतोष रंका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि अजिंक्य शिंदे को शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए छह महीने के लिए पाबंद किया गया।

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दिल्ली पुलिस के मुताबिक, ये गिरफ्तारियां 13 अक्टूबर की सुबह हुई एक घटना के बाद की गईं। आरोप है कि तीन कार्यकर्ताओं और CJP के 11 अन्य सदस्यों ने एक निजी परिसर के ज़रिए जंतर-मंतर के उस विरोध स्थल में प्रवेश किया, जिसे अब विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत नहीं माना जाता है। पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर उनके काम में बाधा डाली गई। सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया और इस घटना के संबंध में दो FIR दर्ज की गईं।

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