ABG Shipyard के 22,842 करोड़ के धोखाधड़ी पर कांग्रेस ने कहा- केंद्र सरकार की नीति हैं बैंक का पैसा लूटो और भागो

सुरजेवाला के मुताबिक, जालसाजों को धोखाधड़ी करने की पूरी छूट मिल रही है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 2,20,00,00,00,842 रुपये सार्वजनिक धन की ठगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की निगरानी में हुई 75 साल में भारत की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी है।
एबीजी ग्रुप के दो दर्जनों से ज्यादा बैंकों के साथ घोटाला को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि, मोदी सरकार के सात साल में बैंकों के एनपीए में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि, केंद्र सरकार की नीति हैं बैंक का पैसा लूटो और भागो। रणदीप सुरजेवाला ने आगे कहा कि, यह अब तक का सबसे बड़ा बैंक घोटाला है, जिसमें एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल के साथ-साथ भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक संघ को 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। सुरजेवाला के मुताबिक, जालसाजों को धोखाधड़ी करने की पूरी छूट मिल रही है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि, 2,20,00,00,00,842 रुपये सार्वजनिक धन की ठगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार की निगरानी में हुई 75 साल में भारत की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी है। बीते 7 सालो में 5,35,000 रुपये करोड़ की बैंक धोखाधड़ी ने हमारी बैंकिंग प्रणाली को बर्बाद कर दिया है।
“Loot & Escape” is Modi Govts ‘Flagship Scheme’ for Bank Fraudsters
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) February 13, 2022
₹2,20,00,00,00,842 of Public Money Swindled
India’s Biggest Bank Fraud in 75yrs has taken place under Modi Govts watch
‘Bank Frauds’ of ₹5,35,000 Cr in 7yrs have Wrecked our ‘Banking System’
Our Statement-: pic.twitter.com/89UlFNPLbz
क्या है पूरा मामला
सीबीआई ने देश के सबसे बड़े बैंक धोखाधड़ी मामले में एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड और उसके तत्कालीन अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ऋषि कमलेश अग्रवाल सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि यह मुकदमा भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले बैंकों के एक संघ से कथित रूप से 22,842 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के संबंध में दर्ज किया गया। एजेंसी ने अग्रवाल के अलावा तत्कालीन कार्यकारी निदेशक संथानम मुथास्वामी, निदेशकों - अश्विनी कुमार, सुशील कुमार अग्रवाल और रवि विमल नेवेतिया और एक अन्य कंपनी एबीजी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी कथित रूप से आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आधिकारिक दुरुपयोग जैसे अपराधों के लिए मुकदमा दर्ज किया। उन्होंने बताया कि इन लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा किया गया है।
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बैंकों के संघ ने सबसे पहले आठ नवंबर 2019 को शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर सीबीआई ने 12 मार्च 2020 को कुछ स्पष्टीकरण मांगा था। बैंकों के संघ ने उस साल अगस्त में एक नई शिकायत दर्ज की और डेढ़ साल से अधिक समय तक जांच करने के बाद सीबीआई ने इस पर कार्रवाई की। अधिकारी ने कहा कि कंपनी को एसबीआई के साथ ही 28 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 2468.51 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी थी। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2012-17 के बीच आरोपियों ने कथित रूप से मिलीभगत की और अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया, जिसमें धन का दुरुपयोग और आपराधिक विश्वासघात शामिल है। यह सीबीआई द्वारा दर्ज सबसे बड़ा बैंक धोखाधड़ी का मामला है। सीबीआई ने एक बयान में कहा, ‘‘शनिवार को सूरत, भरूच, मुंबई, पुणे आदि में एक निजी कंपनी, निदेशकों सहित आरोपियों के परिसरों में 13 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिसमें संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए।
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