फॉर्म-6 पर Election Commission का स्पष्टीकरण महज शब्दों का खेल: Congress नेता Jairam Ramesh

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण की गंभीर खामियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयोग मतदाताओं से पहले गलत घोषणा पर हस्ताक्षर करा रहा है और फिर उन्हें कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए नई दलीलें पेश कर रहा है। पार्टी ने मांग की है कि नाम काटने और फिर नए मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की इस प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगे।

नयी दिल्ली, तीन नवंबर कांग्रेस ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग की ओर से फॉर्म-6 को लेकर दी गई ताजा सफाई को शब्दों की बाजीगरी करार देते हुए कहा कि इससे कुछ भी स्पष्ट नहीं होता है। मुख्य विपक्षी दल ने यह दावा भी किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की खामियां किसी भी तरह की कवायद से दूर नहीं की जा सकतीं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि निर्वाचन आयोग की हर सफाई से यह साबित हो रहा है कि एसआईआर प्रक्रिया को कितनी खराब तरीके से तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में स्पष्ट रूप से पूछा जाता है कि क्या आवेदक पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है। आयोग का यह कहना कि एसआईआर के दौरान दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने वाले मतदाताओं को भी पहली बार आवेदन करने वाला माना जा सकता है, केवल शब्दों का भ्रामक खेल है। रमेश ने आरोप लगाया कि आयोग पहले मतदाताओं से गलत घोषणा पर हस्ताक्षर करा रहा है और अब उन्हें इसके कानूनी परिणामों से बचाने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया ही मतदाताओं को सूची से बाहर करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी आयोग को पत्र लिखकर इस तरह फॉर्म-6 के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई थी। उनका यह भी कहना है कि इस मुद्दे पर मामला लंबित है और बंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने आयोग के तर्क पर सवाल उठाए हैं।

रमेश ने कहा कि एसआईआर में पहले मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और फिर उन्हें नए मतदाता के रूप में नाम जुड़वाने के लिए आवेदन करने को कहा जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए। दरअसल, निर्वाचन आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि मसौदा मतदाता सूची में नाम नहीं होने पर पहले से पंजीकृत मतदाता भी फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा शामिल कराने का अनुरोध कर सकते हैं।

आयोग के अनुसार, ऐसा आवेदन अपने आप में गलत घोषणा नहीं माना जाएगा और इसके आधार पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं होगी।

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