Badrinath National Highway पर दरारों से यात्रा को लेकर चिंता बढ़ी

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जोशीमठ में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के कई जगह पर धंसने और दरारें पड़ने से कुछ महीनों बाद शुरू होने वाली बदरीनाथ यात्रा को लेकर चिंता बढ़ी है। टीसीपी क्षेत्र से लेकर मारवाड़ी पुल तक राष्ट्रीय राजमार्ग काफी पहले से भूधंसाव की चपेट में था, लेकिन हाल में इसके बढ़ने के बाद अब यह और ज्यादा स्थानों पर धंस रहा है।

गोपेश्वर। जोशीमठ में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के कई जगह पर धंसने और दरारें पड़ने से कुछ महीनों बाद शुरू होने वाली बदरीनाथ यात्रा को लेकर चिंता बढ़ गयी है। जोशीमठ नगर में टीसीपी क्षेत्र से लेकर मारवाड़ी पुल तक राष्ट्रीय राजमार्ग काफी पहले से भूधंसाव की चपेट में था, लेकिन हाल में इसके बढ़ने के बाद अब यह और ज्यादा स्थानों पर धंस रहा है। जोशीमठ निवासी दिनेश लाल ने बताया कि दो और तीन जनवरी को जब उनके घर दरारें आने से क्षतिग्रस्त हुए, उसी दिन राष्ट्रीय राजमार्ग में भी सबसे ज्यादा भूधंसाव हुआ था।

उन्होंने बताया, उसी दिन जेपी कॉलोनी के समीप भूधंसाव से सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया था। राजमार्ग का भूधंसाव बाइपास रोड पर सिंहधार वार्ड, नृसिंह मंदिर को जाने वाले मोटर मार्ग, गोरांग तथा मारवाड़ी के इलाकों में साफ देखा जा सकता है। असुरक्षित घोषित होने के बाद ध्वस्त किए जा रहे होटल माउंटव्यू और मलारी इन के पास से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर दरारें हालात खुद बयां कर रही हैं। जोशीमठ से राजमार्ग बदरीनाथ धाम होते हुए माणा दर्रे तक जाता है जबकि जोशीमठ से पन्द्रह किलोमीटर की दूरी पर गोविन्द घाट कस्बे से एक सड़क श्री हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी के लिए मुड़ जाती है। हर साल अप्रैल—मई में शुरू होने वाली चारधाम यात्रा के दौरान राजमार्ग पर यातायात का काफी दवाब रहता है।

राजमार्ग पर भूधंसाव और दरारों से हुई क्षति के बारे में चमोली के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) इसका आकलन कर रहा है जिसकी निगरानी उत्तराखंड सरकार के स्तर पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी भूधंसाव से सड़क क्षतिग्रस्त अवश्य हैं लेकिन इस पर आवागमन पूर्ववत चल रहा है। उधर, बीआरओ सूत्रों ने बताया कि राजमार्ग पर सात—आठ स्थानों पर धंसाव है जिनमें से कुछ स्थान पहले से ही धंस रहे हैं। उन्होंने बताया कि सड़क के सुधार के लिए प्रयास जारी है और इस मसले पर बीआरओ के अधिकारियों और राज्य सरकार के बीच बैठकें चल रही हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार भूधंसाव के विभिन्न पहलुओं से जांच में लगे तकनीकी संस्थानों की रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है जिसके बाद ही इस बारे में कोई निर्णय लिया जाएगा। उनके मुताबिक निर्माणाधीन हेलंग——मारवाडी बाइपास बदरीनाथ यात्रा के लिए वैकल्पिक रास्ता हो सकता था, लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले इसके पूरा होने की संभावना नहीं दिखाई देती।

जोशीमठ आपदा राहत कार्यो की जानकारी देते हुए मुख्य विकास अधिकारी ललित नारायण मिश्र ने बताया कि जोशीमठ नगर क्षेत्र में भूधंसाव के कारण 863 भवनों में दरारें मिली हैं जिनमें से 181 भवन असुरक्षित क्षेत्र में है। मिश्र ने बताया कि जोशीमठ में आपदा प्रभावित 278 परिवारों के 933 सदस्यों को सुरक्षा के दृष्टिगत राहत शिविरों में पहुंचाया गया है जहां उन्हें भोजन, पेयजल, चिकित्सा इत्यादि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। भूधंसाव वाले इलाकों में धरती के धंसने की रफ्तार की लगातार निगरानी की जा रही है जबकि दरार वाले भवनों के चिन्हीकरण का कार्य भी जारी है। उधर,जोशीमठ में असुरक्षित घोषित दो होटलों, लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन और तीन निजी भवनों को तोडे जाने का कार्य भी केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की तकनीकी निगरानी में किया जा रहा है।

देहरादून में आपदा प्रबंधन सचिव रंजीत सिन्हा ने बताया कि 310 प्रभावितों को सरकार की ओर से अंतरिम सहायता के रूप में 3.72 करोड रू की धनराशि वितरित की जा चुकी है। जोशीमठ के मारवाडी क्षेत्र में जेपी कॉलोनी में अज्ञात भूमिगत स्रोत से लगातार हो रहे पानी के रिसाव की मात्रा घटकर 182 लीटर प्र​ति मिनट हो गयी है। छह जनवरी को यह मात्रा 540 लीटर प्रति मिनट थी। उधर, जोशीमठ की ऊंची चोटियों पर हिमपात फिर शुरू हो गया है जिससे सर्दी बढ़ गई है।

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