मतदाता सूची SIR शुद्धिकरण प्रक्रिया है, इस पर राजनीति न हो: RSS नेता Dattatreya Hosabale

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इंदौर में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मृतकों और दोहरे नाम वाले लोगों को हटाकर सूचियों को त्रुटिहीन बनाना एक नियमित प्रक्रिया है। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक दलों से केवल विरोध के लिए विरोध न करने की अपील की।

इंदौर (मध्यप्रदेश), चार नवंबर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को बुधवार को उचित ठहराते हुए कहा कि इस प्रक्रिया का मकसद इन सूचियों को त्रुटिहीन बनाना है। उन्होंने एसआईआर के सियासी विरोध पर हैरत जताई और कहा कि राजनीतिक दलों को किसी मुद्दे पर केवल विरोध के लिए विरोध करने के बजाय उसकी सच्चाई पर ध्यान देना चाहिए। होसबाले ने यह बात ऐसे वक्त कही, जब कथित चुनावी अनियमितताओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

वह इंदौर में संघ के प्रमुख संगठनात्मक निकाय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की वार्षिक बैठक खत्म होने के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रहे थे। होसबाले ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडा के मुताबिक काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें किसी मुद्दे पर केवल विरोध के नाम पर विरोध करने के बजाय देखना चाहिए कि उस मुद्दे में कुछ सच्चाई है भी या नहीं। उन्होंने कहा कि एसआईआर का मकसद मतदाता सूचियों का परिष्कार (शुद्धिकरण या किसी चीज को त्रुटिहीन बनाने की प्रक्रिया) करना होता है।

होसबाले ने कहा कि देश में जिन लोगों के नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं, उनमें से कई लोगों की पहले ही मौत हो चुकी है, जबकि कई मतदाताओं के नाम दो जगहों पर दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग भारत के नागरिक नहीं हैं, उनके नाम मतदाता सूचियों में दर्ज होना आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से गलत है। संघ के वरिष्ठ नेता ने कहा कि एसआईआर के तहत मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाने की प्रक्रिया देश में नियमित तौर पर होती आई है और यह बात उनकी समझ से परे है कि इस पर राजनीति क्यों होनी चाहिए।

होसबाले ने एक सवाल पर यह भी कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) चुनावों के जरिये होता है, लेकिन सत्ता परिवर्तन के मकसद की आड़ में अशांति व हिंसा फैलाना या भेदभाव उत्पन्न करना समाज के हित में नहीं है। उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘जेन-जी’ आंदोलन से जुड़े सवाल पर कहा कि देश के अंदर और बाहर की कुछ ‘अराजक शक्तियां’ युवाओं को साजिश के तहत भड़काने का प्रयत्न कर रही हैं। होसबाले ने कहा,‘‘....लेकिन युवाओं के मन में जो आकांक्षाएं और बातें हैं, उनके बारे में किसी भी समाज और शासन को ध्यान देना चाहिए।

संघ युवाओं के साथ संवाद किए जाने का आग्रह करता है।’’

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