Delhi High Court में PIL: प्रदर्शनों के लिए बने सख्त SOP, ट्रैफिक जाम रोकने की मांग

Court
ANI
अभिनय आकाश । Oct 13 2026 12:44PM

दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक समान एसओपी बनाने और नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक जाम और रास्तों की रुकावट को रोकना है, ताकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और आम नागरिकों के निर्बाध आवागमन के अधिकार में संतुलन बना रहे।

एक वकील ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करने और एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाने की मांग की है। इसका मकसद राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनों के कारण सड़कों पर रुकावट, ट्रैफिक में बाधा और अदालतों व व्यावसायिक इलाकों तक पहुँचने में होने वाली दिक्कतों को रोकना है। जनहित याचिका (PIL) में वकील ऋषभ सक्सेना ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की है कि विरोध-प्रदर्शन कानून के मुताबिक तय जगहों पर ही हों। साथ ही, शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के संवैधानिक अधिकार और लोगों के बिना रुकावट आने-जाने के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखा जाए। याचिका में मजदूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत सरकार' और 'अमित साहनी बनाम पुलिस कमिश्नर' मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के साथ-साथ दिल्ली पुलिस के उस स्टैंडिंग ऑर्डर को भी लागू करने की मांग की गई है, जिसमें प्रदर्शन करने के लिए शर्तें तय की गई हैं।

इसे भी पढ़ें: Supreme Court से Rahul Gandhi को राहत, मोदी टिप्पणी मानहानि केस की कार्यवाही पर रोक


याचिकाकर्ता ने मौजूदा नियमों की समीक्षा की भी मांग की है ताकि दिल्ली पुलिस द्वारा हाल ही में तय की गई विरोध-प्रदर्शन की वैकल्पिक जगहों को भी इसमें शामिल किया जा सके। उन्होंने तर्क दिया है कि सिर्फ़ जंतर-मंतर से विरोध-प्रदर्शन को दूसरी जगहों पर ले जाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक कि स्पष्ट नियम और ट्रैफ़िक मैनेजमेंट के असरदार इंतज़ाम न किए जाएं। याचिका के अनुसार, 12 अक्टूबर को डिफ़ेंस कॉलोनी से बाराखंभा रोड पर सक्षम अधिकारी के पास पेशेवर काम के लिए जाते समय, याचिकाकर्ता को मंडी हाउस गोलचक्कर के पास सड़क और सेंट्रल ट्रैफ़िक आइलैंड पर लोगों की भीड़ मिली। उन्होंने दावा किया कि ट्रैफ़िक में रुकावट के कारण उनकी यात्रा में लगभग दो घंटे की देरी हुई और वे शाम करीब 4 बजे अपनी मंज़िल पर पहुँचे। याचिका के साथ जमा की गई तस्वीरों में भीड़ के पास धीरे-धीरे चलती या रुकी हुई गाड़ियों (जैसे टैक्सी, ऑटो-रिक्शा, मोटरसाइकिल और निजी कारें) को दिखाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि तस्वीरों में ट्रैफ़िक पुलिसकर्मी, बैरिकेड्स, डायवर्जन के संकेत और इमरजेंसी कॉरिडोर दिखाई नहीं दे रहे थे। 

इसे भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को राहत, मानहानि मामले में ट्रायल पर लगाई रोक


हालाँकि, याचिका में यह भी माना गया है कि सिर्फ़ तस्वीरों से यह पता नहीं चल सकता कि रुकावट कितने समय तक रही, कितनी गाड़ियाँ प्रभावित हुईं या क्या कहीं और ट्रैफ़िक के इंतज़ाम किए गए थे। याचिका में पिछले कुछ वर्षों में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और लंबे समय तक चले धरनों का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से सेंट्रल दिल्ली में ट्रैफ़िक की आवाजाही और बिज़नेस डिस्ट्रिक्ट, सरकारी संस्थानों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों तक पहुँचने में दिक्कत हो सकती है। इसमें 2023 में पहलवानों के विरोध-प्रदर्शन और रोज़गार व परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर धरनों सहित कई आंदोलनों का ज़िक्र किया गया है और आरोप लगाया गया है कि लंबे समय तक चलने वाले प्रदर्शनों और ट्रैफ़िक डायवर्जन से यात्रियों, ऑफ़िस जाने वालों, व्यापारियों, मरीज़ों, इमरजेंसी सेवाओं, ड्राइवरों और दिहाड़ी मज़दूरों पर असर पड़ा है। याचिका में दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर, 2026 के उस आदेश का भी ज़िक्र किया गया है, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटा दिया गया था और रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD मैदान को वैकल्पिक जगहों के तौर पर तय किया गया था।

All the updates here:

अन्य न्यूज़