पूर्व जज से Digital Arrest कर 2.5 करोड़ ठगने के मामले में Kochi से एक और संदिग्ध धरा

राजस्थान पुलिस ने सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश से करोड़ों की ठगी के मामले में केरल के कोच्चि से एक और व्यक्ति को हिरासत में लिया है। आरोपियों ने पीड़ित को करीब 15 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर रकम अपने खातों में ट्रांसफर कराई थी।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर 2.5 करोड़ रुपये की ठगी करने के मामले में राजस्थान पुलिस ने एक और व्यक्ति को हिरासत में लिया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। कोच्चि शहर के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार को एलामक्करा निवासी एबिन बासिल को हिरासत में लिया।
इससे पहले, राजस्थान पुलिस ने कोच्चि पुलिस की मदद से वारापुझा के मन्नामथुरुथु निवासी आनंद बाबू को इस मामले में गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश से ठगी गई रकम केरलम में आरोपियों के बैंक खातों में अंतरित की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, राजस्थान पुलिस केरलम में अपनी जांच जारी रखे हुए है, क्योंकि इस धोखाधड़ी में राज्य के कुछ और लोगों के शामिल होने का संदेह है।
पीड़ित पूर्व जिला न्यायाधीश गणपत सिंह भंडारी (90) का आरोप है कि जालसाजों ने खुद को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रबंधक बताकर उनसे 2.5 करोड़ रुपये ठग लिए। जालसाजों ने इस साल अगस्त में उन्हें करीब 15 दिन तक कथित तौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कहा था कि उनका संबंध पुलवामा मामले से जुड़े हवाला लेनदेन से है।
इसी सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दी गई थी। ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें जालसाज खुद को पुलिस या किसी सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को आपराधिक मामलों में फंसाने का डर दिखाते हैं और गिरफ्तारी की धमकी देते हैं। वे पीड़ितों को कई घंटों या दिनों तक वीडियो कॉल पर बनाए रखते हैं और बैंक खातों के सत्यापन के बहाने उनसे अपने खातों में रुपये अंतरित करवा लेते हैं।
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