DK Shivakumar ने Karnataka में Form 7 के दुरुपयोग पर मांगी आपराधिक जांच

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान गरीबों और अल्पसंख्यकों के नाम काटने के लिए फर्जी आवेदन दिए गए। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की कानूनी जांच कराने की बात कहते हुए दावा किया कि प्रक्रिया में एक करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। वह इस संबंध में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे।
बेंगलुरु, एक अक्टूबर कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग की आपराधिक जांच सहित व्यापक तफ्तीश कराने की मांग की है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और कार्यकर्ता कथित तौर पर पार्टी नेताओं के निर्देश पर, अल्पसंख्यकों, गरीबों और दलितों के नाम मतदाता सूची से हटाने की मंशा से फॉर्म-7 आवेदन जमा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई नेताओं ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी तरीके से फॉर्म-7 आवेदन दाखिल किए जाने से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘इस मामले की कानून के दायरे में व्यापक जांच और आपराधिक अन्वेषण की जरूरत है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल कुछ विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक मंत्री ईश्वर खंड्रे के भाल्की, नयना मोटम्मा के मूडिगेरे समेत कई मौजूदा और पूर्व विधायकों के क्षेत्रों में भी ऐसी शिकायतें सामने आई हैं। शिवकुमार ने दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान एक करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं और 50 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
फिलहाल दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री और जनसेवक के तौर पर मैं आपके वोटों की रक्षा करने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं विफल रहा हूं। मुझे इसे स्वीकार करना होगा।’’ शिवकुमार ने कहा कि वह बृहस्पतिवार को व्यक्तिगत रूप से निर्वाचन आयोग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और राज्यभर से जुटाए गए दस्तावेजों तथा अन्य जानकारियों के साथ यह मुद्दा मीडिया के सामने उठाएंगे।
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