Mekedatu Project: 20 बोरहोल से सिर्फ जांच होगी, वन भूमि डायवर्जन नहीं, केंद्र से बोला कर्नाटक

Karnataka
ANI
अभिनय आकाश । Oct 22 2026 6:51PM

कर्नाटक के डी. के. शिवकुमार ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री से प्रस्तावित मेकेदातु पेयजल परियोजना को वन्यजीव मंजूरी दिलाने में तेजी लाने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य केवल भू-तकनीकी जांच हेतु 20 बोरहोल की अनुमति मांग रहा है, वन भूमि के डायवर्जन की नहीं। यह परियोजना मुख्य रूप से बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने केंद्र से आग्रह किया है कि वे प्रस्तावित मेकेदातु पेयजल परियोजना के लिए वन्यजीव मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य अभी केवल भू-तकनीकी जांच के लिए 20 बोरहोल खोदने की अनुमति मांग रहा है, न कि संरक्षित वन भूमि को अन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की। शिवकुमार ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ एक बैठक के दौरान यह अनुरोध किया। उन्होंने मंत्री से कहा कि वे 'नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ' की स्थायी समिति से इस प्रस्ताव पर विचार करने और जल्द ही अपनी सिफारिश देने के लिए कहें। शिवकुमार ने अपने प्रतिवेदन में कहा यह प्रस्ताव केवल सर्वेक्षण और जांच गतिविधियों से संबंधित है। इसमें फिलहाल परियोजना के लिए किसी संरक्षित क्षेत्र की भूमि को अन्य उपयोग में बदलने (डायवर्जन) की मांग नहीं की गई है।

इसे भी पढ़ें: Dravidian Architecture का बेजोड़ नमूना है Chamundeshwari Temple, शिखर पर हैं 7 स्वर्ण कलश

कर्नाटक ने 1 जुलाई को केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को एक प्रस्ताव सौंपा, जिसमें कावेरी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर 0.0000352 हेक्टेयर क्षेत्र में 20 बोरहोल (छेद) करने की अनुमति मांगी गई है। इन जांचों का उद्देश्य प्रस्तावित 'मेकेदातू बैलेंसिंग रिज़र्वोयर' (जलाशय) और पेयजल परियोजना के लिए भू-तकनीकी (जियोटेक्निकल) जानकारी जुटाना है। इसलिए, राज्य की यह मांग केवल प्रस्तावित स्थल पर जांच करने की अनुमति के लिए है, न कि जलाशय के निर्माण या परियोजना के लिए अभयारण्य की भूमि को अन्य उपयोग में बदलने की मंजूरी के लिए। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित मेकेदातु से जुड़ी याचिकाओं की स्थिति के बारे में कुछ और दस्तावेज मांगे हैं। शिवकुमार ने कहा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हाल ही में इस मामले से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट में लंबित विभिन्न याचिकाओं की स्थिति के बारे में जरूरी दस्तावेज/जानकारी मांगी है, जो जल्द ही उपलब्ध करा दी जाएगी।

इसे भी पढ़ें: मंत्रियों को रोकने वाले Police अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, DK Shivakumar ने दिए जांच के आदेश

मेकेदातु को कावेरी नदी पर एक बैलेंसिंग रिज़र्वोअर (संतुलन जलाशय) और पेयजल परियोजना के रूप में प्रस्तावित किया गया है। कर्नाटक इसका इस्तेमाल बेंगलुरु की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए करना चाहता है। तमिलनाडु ने इस परियोजना पर आपत्तियां जताई हैं, क्योंकि उसे डर है कि इससे नदी के निचले बहाव और कावेरी के पानी के बंटवारे पर असर पड़ सकता है। शिवकुमार ने यादव से आग्रह किया कि वे मेकेदातु प्रस्ताव के साथ-साथ शरावती पंप स्टोरेज परियोजना से जुड़ी राज्य की मांग पर भी विचार करें। उन्होंने कहा, "इस संबंध में, NBWL की स्थायी समिति के अध्यक्ष के तौर पर, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया इन दोनों प्रस्तावों की जल्द से जल्द जांच करें और अपनी सिफारिश दें।

All the updates here:

अन्य न्यूज़