छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सियासी सफर, विनोद खन्ना को हराकर सांसद बने थे प्रताप सिंह बाजवा

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सियासी सफर, विनोद खन्ना को हराकर सांसद बने थे प्रताप सिंह बाजवा
प्रतिरूप फोटो

पंजाब में प्रताप स‍िंह बाजवा का नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है। वह प्रदेश के सबसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में से एक हैं और वर्तमान में पंजाब से राज्यसभा सांसद भी हैं। प्रताप सिंह बाजवा को अपने पिता से सियासत के गुर मिले और उन्होंने 1976 में छात्र राजनीति से अपने सियासी पारी की शुरुआत की।

जालंधर। कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रताप सिंह बाजवा किसी पहचान के मोहताज नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को पद से हटाए जाने के बाद कांग्रेस नया मुख्यमंत्री तलाश कर रही थी। इस रेस में प्रताप सिंह बाजवा भी शामिल थे। हालांकि बाद में कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए दलित कार्ड खेला और चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी की। ऐसे में आज हम बात करेंगे पंजाब के छात्र राजनीति से सियासी पारी शुरू करने वाले प्रताप सिंह बाजवा की। 

इसे भी पढ़ें: कट्टर ईमानदार हैं भगवंत मान, केजरीवाल बोले- हम दिल्ली की तरह पंजाब में भी शिक्षा को करेंगे बेहतर 

पिता से सीखे सियासत के गुर

पंजाब में प्रताप स‍िंह बाजवा का नाम बड़े ही आदर के साथ लिया जाता है। वह प्रदेश के सबसे वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में से एक हैं और वर्तमान में पंजाब से राज्यसभा सांसद भी हैं। प्रताप सिंह बाजवा को अपने पिता से सियासत के गुर मिले और उन्होंने 1976 में छात्र राजनीति से अपने सियासी पारी की शुरुआत की। इसके बाद वो 1982 में युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने और धीरे-धीरे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की कुर्सी पर भी विराजमान हुए।

प्रताप सिंह बाजपा, सतनाम सिंह बाजवा के पुत्र हैं जो तीन बार विधानसभा पहुंचे और प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। अपने पिता की ही तरह प्रताप सिंह बाजवा भी तीन बार विधायक चुने गए। इस दौरान उन्होंने कई अहम मंत्रालय भी संभाले।

बाजवा ने विनोद खन्ना को हराया था

साल 2009 के लोकसभा चुनाव में प्रताप सिंह बाजपा ने भाजपा के चार बार के सांसद विनोद खन्ना को मात दे दी और गुरदासपुर से चुनकर लोकसभा पहुंचे। इसके बाद प्रताप सिंह बाजवा 10 अप्रैल, 2016 को राज्यसभा के निर्वाचित हुए। हाल ही में प्रताप सिंह बाजवा के छोटे भाई फतेह जंग सिंह बाजवा ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए भाजपा का दामन थाम लिया है। जबकि उन्हें कुछ वक्त पहले ही कांग्रेस ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का ऐलान किया था। प्रताप सिंह बाजवा भी इसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा करते थे। प्रताप सिंह बाजवा की पत्नी चरणजीत कौर बाजवा पिछली विधानसभा में विधायक रही हैं। 

इसे भी पढ़ें: कांग्रेस उम्मीदवार गोल्डी ने AAP के मान को दी खुली चुनौती, धुरी सीट पर कांटे का मुकाबला होने की संभावना 

मुख्यमंत्री पद के हैं दावेदार

कांग्रेस ने पंजाब में मुख्यमंत्री पद के चेहरा तो घोषित नहीं किया है लेकिन चुनाव मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में ही लड़ा जा रहा है। कुछ वक्त पहले कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट के जरिए पंजाब से जुड़ा एक वीडियो साझा कर इस बात के संकेत दे दिए थे। वहीं दूसरी तरफ प्रदेशाध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू साफ कर चुके हैं कि पंजाब की जनता तय करेगी कि मुख्यमंत्री कौन होगा। इसके अलावा प्रताप सिंह बाजवा भी इस बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें पार्टी ने कादियां से चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट से पिछली बार उनके भाई फतेह जंग सिंह बाजवा विधानसभा पहुंचे थे। जो अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं। हालांकि प्रताप सिंह बाजवा को भी मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन 10 मार्च को ही स्थिति साफ हो पाएगी कि किसकी सरकार बनने वाली है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

Prabhasakshi logoखबरें और भी हैं...

राष्ट्रीय

झरोखे से...