सभी SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए, फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का करारा जवाब

चुनाव आयोग के खिलाफ दायर उन याचिकाओं के जवाब में, जिनमें आरोप लगाया गया था कि आयोग ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए- जिसमें मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में 'बदलाव' भी शामिल है- ECI ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह से एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान एकतरफा फैसले लेने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में दाखिल एक विस्तृत जवाबी हलफनामे (Counter Affidavit) में आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े सभी तीन मुख्य आदेश आयोग के तीनों सदस्यों की पूर्ण सर्वसम्मति से पारित किए गए थे और इनमें कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का अक्षरशः पालन किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा संयुक्त रूप से दाखिल इस हलफनामे में आयोग ने विपक्ष और याचिकाकर्ताओं द्वारा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत और भ्रम पैदा करने वाला करार दिया है।
चुनाव आयोग के खिलाफ दायर उन याचिकाओं के जवाब में, जिनमें आरोप लगाया गया था कि आयोग ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना कई फैसले लिए- जिसमें मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में 'बदलाव' भी शामिल है- ECI ने कहा कि यह याचिका पूरी तरह से एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस हलफनामे को सर्वसम्मति से मंजूरी दी है। यह हलफनामा मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो चुनाव आयुक्तों की ओर से संयुक्त रूप से दायर किया गया है।
सभी SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए: चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने आगे बताया कि 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए SIR आदेशों को आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी।
चुनाव आयोग ने कहा कि कोई भी फैसला लेने से पहले अधिकारियों और चुनाव आयुक्तों के सुझावों, विचारों और सवालों पर विचार किया जाता है। सभी जरूरी इनपुट पर गौर करने के बाद, आयोग के सदस्य किसी फैसले पर पहुंचते हैं और उसी के अनुसार आदेश जारी किए जाते हैं। चुनाव आयोग में फाइलें पहले एक चुनाव आयुक्त के पास, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त के पास और अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास भेजी जाती हैं। एक बार मंजूरी मिल जाने पर, फैसले को आयोग की फाइल में दर्ज किया जाता है और संबंधित आयुक्तों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। इसके बाद, चुनाव आयोग का सचिवालय उस फैसले के संबंध में अधिसूचना जारी करता है और उसे लागू करना सुनिश्चित करता है।
चुनाव आयोग (EC) ने अपने हलफनामे में कहा, "मुख्य चुनाव आयुक्त या किसी चुनाव आयुक्त द्वारा अन्य आयुक्तों या आयोग के किसी अधिकारी को दिया गया कोई भी सुझाव, विचार या सवाल, अपने आप में चुनाव आयोग का आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता। आधिकारिक फैसला केवल वही होता है, जिस पर आयोग कानून द्वारा तय की गई प्रक्रिया के अनुसार पहुंचा हो।"
चुनाव आयोग ने आगे कहा कि 'अनमैप्ड' (जिनका विवरण दर्ज नहीं है) मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना अनिवार्य नहीं है; बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करने के लिए उनके घर जाएंगे।
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के आदेश के बिना, ECINet पर मतदाता सूची में किसी का नाम जोड़ा या हटाया नहीं जा सकता। आयोग ने बताया कि गोवा में जिन 97 मतदाताओं के 'छूट जाने' की बात कही गई थी, उनमें से 88 पहले से ही मतदाता सूची में शामिल थे, 6 विदेश में थे, और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को पद से हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए होती है; इसलिए, CEC को रोकने की मांग करने वाली याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती। आयोग ने कहा कि उसने मीडिया को कोई भी आंतरिक नोट या फाइल जारी करने की अनुमति नहीं दी है। दशहरे की छुट्टियों के कारण एक संक्षिप्त जवाब दाखिल किया गया है; आयोग ने विस्तृत और बिंदुवार जवाब जमा करने के लिए अनुमति मांगी है।
फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं
आयोग ने उस आरोप को खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि 'SIR' से जुड़े आदेशों के जरिए 'फॉर्म 6' में बदलाव किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि 'फॉर्म 6' में बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।
आयोग ने माना कि ऑनलाइन फॉर्म देखकर ऐसा लग सकता है कि उसमें बदलाव किया गया है, लेकिन स्पष्ट किया कि 21 अक्टूबर से आवेदन फॉर्म और घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन फॉर्म) को अलग-अलग कर दिया गया है।
आयोग ने कहा, "घोषणा पत्र एक अलग दस्तावेज है; हालांकि, चुनाव आयोग ने माना कि ऑनलाइन पोर्टल पर 'फॉर्म 6' और 'घोषणा पत्र' को इस तरह दिखाया गया था जिससे यह भ्रम पैदा हो सकता था कि 'फॉर्म 6' में ही बदलाव कर दिया गया है।"
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