पितृपक्ष की समाप्ति! कोलकाता के गंगा घाटों पर तर्पण के लिए उमड़ी भीड़

पितृपक्ष की समाप्ति! कोलकाता के गंगा घाटों पर तर्पण के लिए उमड़ी भीड़

हिंदू धर्म में महालया का अपना एक अलग महत्व होता है। यह अमावस्या के आखरी दिन मनाया जाता है जो पितृपक्ष का भी अंतिम दिन होता है। जानकारी के लिए बता दें कि, महालय का अर्थ है तर्पण, और तर्पण के लिए सुबह से ही गंगा घाटों पर भीड़ उमड़ रही है।महालय के दिन तर्पण पितरों का तर्पण होता है।

बुधवार को महालया के साथ ही दुर्गा पूजा की शुरुआत हो जाएगी। बता दें कि दुर्गा पूजा के पहले महालया का अपना एक खास महत्व है।बंगाल में इस दिन को लोग खास तरीके से मनाते हैं। इसके साथ ही जिन राज्यों में दुर्गा पूजा धूमधाम से मनाया जाता है उन राज्यों में भी महालया का विशेष महत्व है। लोग महालया का साल भर लोग प्रतीक्षा करते हैं।

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हिंदू धर्म में महालया का अपना एक अलग महत्व होता है। यह अमावस्या के आखरी दिन मनाया जाता है जो पितृपक्ष का भी अंतिम दिन होता है। जानकारी के लिए बता दें कि, महालय का अर्थ है तर्पण, और तर्पण के लिए सुबह से ही गंगा घाटों पर भीड़ उमड़ रही है।महालय के दिन तर्पण पितरों का तर्पण होता है।दक्षिणेश्वर से लेकर बागबाजार, कुमारतुली, अहिरीटोला या बाबूघाट तक सुबह से ही कोलकाता के विभिन्न घाटों पर भीड़ जमा हो रही है।कुछ घाटों पर सुबह से ही तर्पण के लिए लंबी लाइन लग गई है।

पुलिस की कड़ी सुरक्षा

बता दें कि गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ने के कारण पुलिस ने कड़ी सुरक्षा कर रखी है ताकि कोई हादसा न हो सके। पुलिस नदी के करीब गश्त कर रही है। आपदा दल के सदस्यों को भी तैयार किया गया है। वहीं कुमारतुली से विभिन्न गंगा घाटों पर फोटोजर्निस्ट भी जुटे हुए हैं। दुर्गा पूजा को लेकर तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में है और बंगाली समुदाय में इस समय काफी उल्लास का माहौल बना हुआ है। 





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