केंद्र के फैसले पर बोले उमर अब्दुल्ला, बल प्रयोग को समाधान मानने वालों की हुई हार

Former chief minister omar abdullah attack on modi government
केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर पर ‘‘सतत वार्ता’’ की घोषणा के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि इस मुद्दे की राजनीतिक प्रकृति की स्वीकार्यता उन लोगों की शिकस्त है जो ताकत को एक समाधान के तौर पर देखते हैं।

श्रीनगर। केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर पर ‘‘सतत वार्ता’’ की घोषणा के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने कहा कि इस मुद्दे की राजनीतिक प्रकृति की स्वीकार्यता उन लोगों की शिकस्त है जो ताकत को एक समाधान के तौर पर देखते हैं। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने घाटी में आतंकी वित्तपोषण मामले में एनआईए जांच के कदम के निहितार्थ भी जानना चाहा। अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर पर बातचीत के लिये केंद्र के प्रतिनिधि के तौर पर पूर्व खुफिया ब्यूरो प्रमुख दिनेश्वर शर्मा की नियुक्ति के बारे में राजनाथ सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। घोषणा के बाद किये गये एक ट्वीट में पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘केंद्र ने जम्मू कश्मीर में पक्षकारों से बातचीत के लिये वार्ताकार की घोषणा की है।

हम खुला मन रखते हुये वार्ता प्रक्रिया के नतीजे देखने का इंतजार करेंगे।’’ सिंह के बयान पर कि शर्मा राज्य के लोगों की वैध आकांक्षाओं को समझने का प्रयास करेंगे के संदर्भ में अब्दुल्ला ने जानना चाहा कि यह कौन परिभाषित करेगा कि कौन सी मांग उचित है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा, ‘‘जम्मू कश्मीर के लोगों की ‘वैध आकांक्षाएं’ एक रोचक फार्मूला है। यह कौन तय करेगा कि क्या वैध है?’’ उन्होंने आतंकी वित्तपोषण मामले की जांच के बारे में भी सवाल उठाया।

उन्होंने पूछा, ‘‘जम्मू कश्मीर में एनआईए जांच को लेकर इसका क्या मतलब हुआ? क्या हिरासत में लिये गये हुर्रियत नेताओं से बातचीत के लिये जांच को स्थगित किया जायेगा?’’ अब्दुल्ला ने कहा कि बातचीत को लेकर केंद्र का कदम उन लोगों के लिये करारी हार है तो ताकत को कश्मीरी मुद्दे का एक मात्र हल मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर मुद्दे की राजनीतिक प्रकृति की स्वीकार्यता उन लोगों के लिये करारी शिकस्त है जो सिर्फ बल के इस्तेमाल को ही समाधान के तौर पर देख सकते हैं।’’

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