कार्यकर्ता Pranab Doley की NSA हिरासत Gauhati High Court ने की रद्द

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गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम के स्थानीय अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले पर लगे राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति सुस्मिता फुकन खौंड की पीठ ने पाया कि उनके खिलाफ लगे आरोपों का हिरासत के फैसले से सीधा संबंध नहीं था। इसके साथ ही जेल में तीन महीने से अधिक समय से जारी उनकी हिरासत समाप्त हो गई है।

गुवाहाटी, छह नवंबर गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को स्थानीय अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत रद्द कर दी। इसके साथ ही इस कानून के तहत उनकी तीन महीने से अधिक समय से जारी हिरासत समाप्त हो गई। कार्यकर्ता को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट प्रस्तावित पांच सितारा होटल के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में 13 जुलाई को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था।

गोलाघाट जिला जेल में बंद डोले को 29 जुलाई को सत्र अदालत से जमानत मिल गई थी। हालांकि, राज्य सरकार ने अगले ही दिन उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई की, जिससे उनकी हिरासत उसी जेल में जारी रही। डोले के वकील शांतनु बोर्थाकुर ने बताया कि न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति सुस्मिता फुकन खौंड की खंडपीठ ने अधिकार कार्यकर्ता की रासुका के तहत हिरासत रद्द कर दी।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी थी। फैसला आज सुनाया गया। न्यायाधीशों ने हिरासत रद्द करने के कुछ आधार बताए हैं, लेकिन विस्तृत विवरण पूरा आदेश उपलब्ध होने के बाद ही मिल सकेगा।’’ बोर्थाकुर ने कहा कि न्यायाधीशों ने हिरासत रद्द करने के जिन आधारों का उल्लेख किया, उनमें एक यह था कि डोले के खिलाफ लगाये गये आरोपों का हिरासत में लेने के फैसले से कोई संबंध नहीं था।

वकील ने कहा, ‘‘इसके अलावा, हिरासत में लिए गए व्यक्ति की ओर से दिए गए प्रतिवेदन का शीघ्र निपटारा किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।’’ डोले यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट प्रस्तावित पांच सितारा होटल के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे थे। उनका आरोप है कि इस परियोजना से क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को खतरा है। इसके अलावा, वह मूल निवासियों और उनके अधिकारों के लिए नुकसानदेह माने जाने वाले कदमों के खिलाफ भी लगातार आवाज उठाते रहे हैं।

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