गुवाहाटी HC ने आदिवासी कार्यकर्ता Pranab Doley पर लगा NSA हटाया, हिरासत रद्द

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गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत शुक्रवार को रद्द कर दी। खंडपीठ ने पाया कि उन पर लगे आरोप पुराने थे और हिरासत से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसके साथ ही तीन महीने से अधिक समय से जेल में बंद कार्यकर्ता की रिहाई का रास्ता साफ हो गया।

गुवाहाटी, छह नवंबर गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत रद्द कर दी। अदालत के फैसले के साथ ही इस कानून के तहत डोले की तीन महीने से अधिक समय से जारी हिरासत समाप्त हो गई। डोले को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े एक मामले में 13 जुलाई को गुवाहाटी में गिरफ्तार किया गया था।

उन्हें गोलाघाट जिला कारागार में रखा गया था। सत्र न्यायालय ने 30 जुलाई को उन्हें जमानत दे दी थी लेकिन राज्य सरकार ने अगले ही दिन उन पर रासुका लगा दिया, जिसके कारण उन्हें जेल में ही रहना पड़ा। डोले के वकील शांतनु बोरठाकुर ने बताया कि न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराना और न्यायमूर्ति सुस्मिता फुकन खौंड की खंडपीठ ने कार्यकर्ता की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत रद्द कर दी।

बोरठाकुर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी थी। अदालत ने आज (शुक्रवार को) अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीशों ने हिरासत रद्द करने के कुछ आधार बताए हैं, लेकिन पूरे आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही उनका विस्तृत ब्योरा पता चल सकेगा।” उन्होंने बताया कि न्यायाधीशों ने जिन आधारों का उल्लेख किया, उनमें से एक यह था कि डोले के खिलाफ लगाए गए आरोप पुराने थे और उनका मौजूदा स्थिति से सीधा संबंध नहीं था।

कार्यकर्ता के वकील ने बताया कि इसके अलावा, अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए व्यक्ति को उन दस्तावेजों और सामग्री की प्रतियां भी उपलब्ध नहीं कराई थीं, जिनके आधार पर हिरासत का आदेश जारी किया गया था और इससे उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ। वकील ने कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की ओर से दी गई अर्जी पर भी जल्द फैसला किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद डोले को दिन में ही हिरासत से रिहा किए जाने की संभावना है।

राज्य के राजनीतिक विभाग की ओर से जारी रासुका संबंधी आदेश में कहा गया था कि सरकार इस बात से संतुष्ट है कि डोले की गतिविधियां ‘सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ राज्य की सुरक्षा के लिए भी हानिकारक’ थीं। आदेश में यह भी कहा गया था कि रिहा होने पर उनके ऐसी गतिविधियां फिर शुरू करने की आशंका थी।

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