• कड़ी आपत्ति के बाद विधेयक से भूमिपुत्र शब्द हटाएगी गोवा सरकार

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा सरकार 30 जुलाई को विधानसभा द्वारा पारित गोवा भूमिपुत्र अधिकारिणी विधेयक, 2021 से भूमिपुत्र (मिट्टी का पुत्र) शब्द को हटा देगी।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा सरकार 30 जुलाई को विधानसभा द्वारा पारित गोवा भूमिपुत्र अधिकारिणी विधेयक, 2021 से भूमिपुत्र (मिट्टी का पुत्र) शब्द को हटा देगी। भूमिपुत्र शब्द से कई लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं और सरकार इस शब्द को बिल से हटाने के लिए तैयार है। इसे गोवा भूमि अधिकारिणी विधेयक नाम दिया जा सकता है, सावंत ने मंगलवार देर शाम सोशल मीडिया पर एक संबोधन में कहा।

यह घोषणा भाजपा एसटी मोर्चा द्वारा विधेयक में भूमिपुत्र शब्द के इस्तेमाल पर कड़ी आपत्ति  के बाद हुआ। मोर्चा ने कहा कि इससे राज्य के लगभग सभी आदिवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंची है और पूरे समुदाय ने ऐसे किसी भी विधेयक को पारित करने के खिलाफ आंदोलन किया है, जो उचित सुधार के साथ ध्यान न देने पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है।

दरअसल गोवा भूमिपुत्र अधिकारिणी विधेयक कम से कम 30 वर्षों से गोवा में रहने वाले व्यक्ति को भूमिपुत्र का दर्जा देता है। एक बार भूमिपुत्र के रूप में मान्यता प्राप्त होने के बाद वह 1 अप्रैल, 2019 से पहले बनाए गए 250 वर्ग मीटर से अधिक के अपने घर के स्वामित्व का दावा कर सकता है।

इससे पहले दिन में सावंत से मुलाकात के बाद गोवा राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रमेश तावड़कर ने कहा कि भूमिपुत्र शब्द का इस्तेमाल अब तक गौड़ा, कुनबी, वेलिप समुदायों के लिए किया जाता रहा है… इसलिए इस पर कुछ निराशा हुई, क्योंकि इससे हमारी मौलिकता और पहचान को ठेस पहुंची है। सावंत ने हमें आश्वासन दिया है कि वह भूमिपुत्र को विधेयक के नाम से हटा देंगे।

वहीं विपक्ष ने उनकी सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को बुलडोज़िंग करने और बिना चर्चा के एक विधेयक पारित करने का आरोप लगाया था,  सावंत ने कहा कि जिस विपक्ष ने विधानसभा से वॉकआउट करने का फैसला किया, वह 30 जुलाई को कुछ और घंटों के लिए विधेयक पर चर्चा करने के लिए रुक सकता था। सरकार अपनी वेबसाइट पर लोगों से सुझाव प्राप्त करने के लिए तैयार है और सुझावों पर विचार करने के बाद, विधेयक को दो महीने में विधानसभा में फिर से पेश किया जा सकता है।

सावंत ने कहा कि राज्य में मौजूदा कानून, जैसे कि गोवा मुंडकर (बेदखली से संरक्षण) अधिनियम, 1975 और गोवा अनधिकृत निर्माण अधिनियम, 2016 का नियमितीकरण उन लोगों की रक्षा नहीं कर सकता है जिनके आवास सरकारी जमीन पर थे। उन्होंने दक्षिण गोवा के कैनकोना में लगभग 500 घरों का उदाहरण दिया जो विध्वंस की संभावना का सामना कर रहे थे।

सावंत ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि विधेयक प्रवासियों के नहीं बल्कि गोवावासियों के हित में है। उन्होंने कहा कि केवल वे लोग, जिनके नाम पर बिजली और पानी के कनेक्शन हैं, वे बिल के प्रावधानों का लाभ उठा सकते हैं, न कि लीज समझौते वाले लोग।