ज्ञानवापी सर्वे: अजय मिश्रा ने वाराणसी कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट, 'मंदिरों का मलबा, शेषनाग-कमल की कलाकृति' होने का दावा

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रेनू तिवारी । May 19, 2022 9:57AM
ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर लगातार नयी नयी अपडेट सामने आ रही हैं। पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट पेश कर दी है। 6 और 7 मई को हुए सर्वे की अजय मिश्रा ने रिपोर्ट सौंप दी है।

ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे को लेकर लगातार नयी नयी अपडेट सामने आ रही हैं। पूर्व एडवोकेट कमिश्नर अजय मिश्रा वाराणसी कोर्ट में ज्ञानवापी मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट पेश कर दी है। 6 और 7 मई को हुए सर्वे की अजय मिश्रा ने रिपोर्ट सौंप दी है। अभी तक बाहरी रूप से केवल शिवलिंग मिलने का जो दावा किया जा रहा था अब साफ तौर पर रिपोर्ट में कई और खुलासे किए गये हैं। रिपोर्ट के अनुसार सर्वे रिपोर्ट में अजय मिश्रा ने दावा किया है ज्ञानवापी परिसर में शिव मंदिर के अन्य प्रमाण भी मिले हैं जिससे यह सिद्ध हो रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद ने नीचे एक भव्य मंदिर था। जिसे तोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि सर्वे के दौरान खोदी गयी दीवार के कोने पर मंदिर का मलबा मिला है। मंदिरों का मलबा के साथ साथ शेषनाग-कमल की कलाकृति और इसके अलावा दीवारों पर हिंदू धर्म की संस्कृति से जुड़े निशान मिले हैं। शिव से जुड़े कलाकृति भी दीवार पर बनीं हैं। शिवलिंग मिलने का दावा तो पहले ही किया जा चुका हैं।

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आपको बता दें कि वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग जैसी संरचना की खोज पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बनी हुई है। कुछ लोग इसे शिवलिंग मानते हैं, जबकि कुछ लोग दावा करते हैं कि यह एक फव्वारा है। ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में मिले शिवलिंग को फव्वारा बताने वाले मुस्लिम पक्ष को अपना दावा साबित करने की चुनौती दी है। ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति ने इसे स्वीकार करते हुए कहा है कि उसे फव्वारे को चला कर दिखाने में कोई परेशानी नहीं है। जैन ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी मस्जिद के वजूखाने में मिले शिवलिंग को फव्वारा बता रहा है और अगर वह वाकई फव्वारा है तो वह उसे चला कर दिखाएं। उन्होंने कहा अगर वह फव्वारा है तो उसके नीचे पानी की आपूर्ति की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। जहां शिवलिंग मिला है उसके नीचे तहखाने की जांच की जाए और शिवलिंग के आकार को नापने की भी इजाजत दी जाए। 

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इस बीच, ज्ञानवापी मस्जिद की रखरखावकर्ता संस्था अंजुमन इंतजामिया मसाजिद के संयुक्त सचिव सैयद मोहम्मद यासीन ने कहा कि उस फव्वारे की जांच कराने का मौका दिया जाए और वह इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा अगर हमें इजाजत दी जाए तो हम उस फव्वारे के नीचे पाइप लगाकर पानी निकालने को भी तैयार है। हौज (जलकुंड) में पहले सरकारी पाइप से पानी भरा जाता था, अब कुएं से जेट पंप लगाकर पानी भरा जाता है। फव्वारे का पाइप अलग है। फव्वारे के पास भी पाइप लगा है ताकि पानी का फव्वारा निकले। यासीन ने बताया कि फव्वारे की एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, उसमें ऊपर की तरफ चार निशान बने हुए हैं। उन्हीं में से फव्वारा निकलता था। हम उसे चला कर दिखा देंगे। 

उन्होंने बताया कि सर्वे वाले दिन उन निशानों में से एक में एक सलाई डाली गई थी जो लगभग 64 सेंटीमीटर अंदर चली गई थी। यानी कि वह छेद है जिसमें से पानी निकलता था। यासीन ने बताया कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह हौज की सफाई के वक्त का है जो लॉकडाउन के वक्त कराई गई थी और हर छह महीने पर हौज की सफाई कराई जाती है। गौरतलब है कि पिछली 16 मई को अदालत के आदेश पर संपन्न हुए ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष ने मस्जिद के वजू खाने में बने हौज में शिवलिंग मिलने का दावा किया था। उसके बाद अदालत के निर्देश पर उस स्थान को सील कर दिया गया। मुस्लिम पक्ष शुरू से ही शिवलिंग बताए जा रहे पत्थर को फव्वारा करार दे रहा है।

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