BJP विस्तार से Article 370 हटाने तक, गृह मंत्री Amit Shah का ऐसा रहा राजनीतिक सफर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष रहते हुए पार्टी का देशव्यापी विस्तार किया और इसे दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनाया। वर्ष 2019 में गृह मंत्री बनने के बाद उन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और नागरिकता संशोधन अधिनियम जैसे कई ऐतिहासिक एवं निर्णायक कदम उठाए।
नौकरशाही और राजनीतिक हलकों में "वचनबद्ध व्यक्ति" (man of commitment) के रूप में पहचाने जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जो 22 अक्टूबर को 62 वर्ष के हो जाएंगे, पिछले 12 वर्षों में भारतीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली हस्तियों में से एक बनकर उभरे हैं। 2014 में भाजपा के अध्यक्ष के रूप में पार्टी की कमान संभालने के बाद से, उन्होंने पूरे भारत में भाजपा की राजनीतिक पहुंच का विस्तार किया है। 2019 में मोदी 2.0 सरकार के कार्यकाल के दौरान, देश का गृह मंत्री नियुक्त होने के तुरंत बाद, उन्होंने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक और निर्णायक फैसले लिए। 22 अक्टूबर 1964 को एक संपन्न गुजराती परिवार में कुसुम्बेन और अनिलचंद्र शाह के घर जन्मे अमित शाह ने पार्टी का आगे बढ़कर नेतृत्व किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक दायरे को बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज की है।
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बीजेपी अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, बीजेपी 10 करोड़ से अधिक पंजीकृत सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन गई। अपनी युवावस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने और बाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सक्रिय सदस्य बनने वाले शाह, ज़मीनी स्तर से उठकर भारत की सत्ताधारी पार्टी के प्रमुख बने हैं। उनके समर्पण, कार्यकुशलता और सबसे बढ़कर परिणाम देने की क्षमता के कारण, उन्हें कई राष्ट्रीय नेताओं के चुनाव अभियानों का प्रभारी बनाया गया। इनमें 1991 में लालकृष्ण आडवाणी और 1996 में दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के चुनाव अभियान शामिल हैं, जो दोनों ही गुजरात के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र से लड़े गए थे। 2013 में, शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया। उनकी कड़ी मेहनत और प्रयासों की बदौलत बीजेपी को 2014 के संसदीय चुनावों में ऐतिहासिक सफलता मिली। जुलाई 2014 में उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला, और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। मई 2018 तक, शाह के नेतृत्व में बीजेपी और उसके सहयोगी दल 21 राज्यों में सत्ता में थे, जो पार्टी के चुनावी विस्तार के बड़े पैमाने को दर्शाता है।
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1 जून 2019 को मोदी 2.0 सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री का कार्यभार संभालने वाले शाह ने अपने कार्यकाल के दो महीनों के भीतर ही सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसलों में से एक लिया। यह फैसला अनुच्छेद 370 को खत्म करने का था, जिसने तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया हुआ था। बाद में, अगस्त 2019 में, सरकार ने इस क्षेत्र के विशेष संवैधानिक दर्जे को समाप्त कर दिया और राज्य को पुनर्गठित करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया। यह कदम जम्मू-कश्मीर के प्रति केंद्र सरकार के दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव था और शाह के कार्यकाल के सबसे अहम नीतिगत फैसलों में से एक बन गया। सरकार का तर्क था कि इन बदलावों से इस क्षेत्र में एकीकरण, विकास और बेहतर सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। इस फैसले को लेकर काफी राजनीतिक और कानूनी बहस भी हुई, जिससे यह उस दौर के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक घटनाक्रमों में से एक बन गया। शाह के कार्यकाल में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 जैसे बड़े विधायी बदलाव भी हुए, जिसे उनके कार्यकाल के पहले वर्ष के दौरान संसद द्वारा पारित किया गया था।
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